दोस्ती में दरार? होर्मुज से ईरान ने लौटाए चीन के जहाज, मिडिल ईस्ट में बढ़ा बड़ा तनाव
होर्मुज स्ट्रेट से आई एक बड़ी खबर ने दुनिया का ध्यान खींच लिया है। ईरान ने चीन के दो बड़े कंटेनर जहाजों को बीच रास्ते से वापस लौटा दिया, जबकि दोनों देशों के रिश्ते मजबूत माने जाते हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि अपने करीबी सहयोगी के जहाजों को ही रोक दिया गया?
अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह कदम आने वाले दिनों में वैश्विक व्यापार और राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।
होर्मुज में चीन के जहाजों को क्यों लौटाया गया?
बता दें कि ईरान ने COSCO के दो बड़े कंटेनर जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने से रोक दिया (Iran Blocks China Ships in Hormuz)। इन जहाजों के नाम CSCL Indian Ocean और CSCL Arctic Ocean बताए जा रहे हैं। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और व्यापार गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है।
COSCO vessels abort Strait of Hormuz transit attempt amid ongoing instability
Following COSCO’s announcement to resume booking acceptance to Gulf destinations, new developments overnight suggest the situation in the Strait of Hormuz remains highly unstable.
According to… pic.twitter.com/VkrtGwOZgD
— MarineTraffic (@MarineTraffic) March 27, 2026
दरअसल, चीन की कंपनी ने पहले युद्ध के कारण खाड़ी देशों के लिए बुकिंग बंद कर दी थी, लेकिन बुधवार को अचानक फिर से बुकिंग शुरू करने का ऐलान किया। इसके बाद उसके जहाजों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा। मरीन ट्रैफिक के डेटा के अनुसार, जहाजों का यू-टर्न लेना इस बात का संकेत है कि उन्हें सुरक्षित रास्ते की गारंटी नहीं मिल पा रही थी।
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ईरान का सख्त रुख, IRGC ने दी चेतावनी
हालांकि, IRGC यानी ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने साफ कहा है कि,
उन्होंने तीन जहाजों को वापस लौटाया है। उनका कहना है कि यह रास्ता उन जहाजों के लिए बंद है जो अमेरिका, इजरायल या उनके सहयोगियों से जुड़े हैं
IRGC ने अपने बयान में डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट खुला हुआ है। ईरान का कहना है कि दुश्मन देशों से जुड़े किसी भी जहाज को यहां से गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
साथ ही ईरान ने आम लोगों को भी चेतावनी दी है कि वे अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास न जाएं। इससे साफ है कि तनाव सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर भी खतरा बढ़ रहा है।
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ट्रंप का अल्टीमेटम और युद्ध की नई दिशा
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर बड़े हमले की समय सीमा बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दी है। उन्होंने दावा किया कि बातचीत अच्छी चल रही है और ईरान समझौते के लिए तैयार है। हालांकि, ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह अपनी शर्तों पर ही पीछे हटेगा। वह इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में अपने जवाबी हमले जारी रख सकता है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान ने कुछ तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी है, जिसे उन्होंने बातचीत का सकारात्मक संकेत बताया। लेकिन दूसरी ओर, ईरान की सेना ने अमेरिका और इजरायल पर आम नागरिकों को ढाल बनाने का आरोप लगाया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच चीन और रूस का समर्थन ईरान को मिलता दिख रहा है, लेकिन चीन के जहाजों को रोके जाने से यह संबंध भी सवालों में आ सकता है।
