सोने के बाद अब चांदी पर बड़ा एक्शन, सरकार के नए नियमों से कीमत में आ सकता है बड़ा उछाल
Silver Import Ban India: भारत में चांदी खरीदना अब लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है। सरकार ने चांदी के आयात नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए कई श्रेणियों को “रिस्ट्रिक्टेड” सूची में डाल दिया है। अब बिना सरकारी मंजूरी के चांदी आयात करना आसान नहीं होगा। माना जा रहा है कि इसका सीधा असर बाजार में सप्लाई और कीमतों पर पड़ सकता है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश के फॉरेक्स रिजर्व और डॉलर पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
सरकार ने क्यों लगाया चांदी आयात पर नया प्रतिबंध?
देश में बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने चांदी के आयात नियमों को और सख्त कर दिया है। हाल ही में सरकार ने सोना और दूसरी कीमती धातुओं पर कस्टम ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी थी, वहीं अब चांदी के कई उत्पादों को “फ्री इंपोर्ट” श्रेणी से हटाकर “रिस्ट्रिक्टेड” कैटेगरी में डाल दिया गया है।
यानी अब 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली सिल्वर बार, कच्ची चांदी, अर्धनिर्मित चांदी और चांदी पाउडर के आयात के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी होगी। बता दें कि ईरान-अमेरिका तनाव और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत सरकार डॉलर की ज्यादा निकासी रोकना चाहती है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है, ऐसे में ज्यादा आयात से रुपये और फॉरेक्स रिजर्व पर असर पड़ता है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहले लोगों से सोने की खरीद कम करने की अपील कर चुके हैं। माना जा रहा है कि सरकार का यह कदम आने वाले समय में घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
चांदी आयात से जुड़े नए नियम
• अब 99.9% शुद्धता वाले सिल्वर बार, सिल्वर पाउडर, कच्ची चांदी और अर्ध-निर्मित चांदी के आयात के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
• विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी DGFT की मंजूरी के बिना व्यापारी चांदी आयात नहीं कर सकेंगे।
• चांदी का आयात अब केवल RBI द्वारा नामित बैंकों, DGFT एजेंसियों और IFSCA से मंजूरी प्राप्त जौहरियों के जरिए IIBX प्लेटफॉर्म पर ही किया जा सकेगा।
आयात शुल्क और टैक्स में क्या बदलाव हुआ?
• सरकार ने चांदी पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी है।
• चांदी आयात पर 3% आईजीएसटी भी देना होगा।
• तैयार सिल्वर ज्वेलरी के आयात पर 20% सीमा शुल्क और 3% आईजीएसटी लागू रहेगा।
• विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा टैक्स और सख्त नियमों की वजह से घरेलू बाजार में चांदी महंगी हो सकती है।
विदेश से चांदी लाने वाले यात्रियों के लिए नियम
• केवल वही भारतीय यात्री चांदी ला सकते हैं जो विदेश में कम से कम 6 महीने रहकर लौट रहे हों।
• एक यात्री अधिकतम 10 किलो तक चांदी भारत ला सकता है।
• इसके लिए निर्धारित कस्टम ड्यूटी विदेशी मुद्रा में चुकानी होगी।
किन कारोबारियों को मिलेगी छूट?
• विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी SEZ और 100% निर्यात-उन्मुख इकाइयों को कुछ मामलों में छूट दी गई है।
• जो कंपनियां चांदी से आभूषण बनाकर विदेशों में निर्यात करती हैं, उन्हें भी कुछ नियमों से राहत मिलेगी।
• हालांकि, इन इकाइयों को आयात की गई चांदी घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति नहीं होगी।
क्या अब देश में महंगी होगी चांदी?
सरकार द्वारा चांदी के आयात नियम सख्त किए जाने के बाद अब देश में चांदी महंगी होने की आशंका बढ़ गई है। दरअसल, भारत में चांदी का उत्पादन काफी कम होता है और बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों से चांदी मंगाई जाती है। ऐसे में जब आयात पर नियंत्रण बढ़ेगा तो घरेलू बाजार में सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
अगर बाजार में चांदी की उपलब्धता कम हुई तो इसके दाम तेजी से ऊपर जा सकते हैं। खास बात यह है कि चांदी सिर्फ गहनों या निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, सोलर पैनल और कई फैक्ट्रियों में भी इसका इस्तेमाल होता है। ऐसे में कंपनियां पहले से ज्यादा स्टॉक जमा करना शुरू कर सकती हैं, जिससे बाजार में मांग और बढ़ेगी।
माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी चांदी के दाम में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
बाजार और निवेशकों पर क्या होगा असर?
नई आयात नीति के बाद अब चांदी को सिर्फ एक सामान्य धातु नहीं बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़ी संवेदनशील संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है। इसका मतलब है कि सरकार अब इस धातु के आयात पर ज्यादा निगरानी रखेगी। विशेषज्ञों के अनुसार,
अगर सोना और चांदी दोनों पर आयात नियंत्रण जारी रहता है तो भारतीय बाजार में इनकी कीमतें वैश्विक बाजार से प्रीमियम पर ट्रेड कर सकती हैं। यानी विदेशों की तुलना में भारत में चांदी महंगी बिक सकती है।
हालांकि, यह फैसला सरकार के लिए विदेशी मुद्रा बचाने में मददगार साबित हो सकता है। लेकिन दूसरी तरफ आम खरीदारों, ज्वेलर्स और उद्योगों के लिए आने वाले समय में लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। आने वाले हफ्तों में बाजार की स्थिति और मांग के आधार पर चांदी की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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