यूपी में चुनाव से पहले ओवैसी की एंट्री, योगी को संभल और अखिलेश को गोरखपुर से लड़ने की चुनौती

उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती के बीच अब असदुद्दीन ओवैसी ने भी दोनों नेताओं को घेरा है। AIMIM प्रमुख ने योगी को संभल और अखिलेश को गोरखपुर से चुनाव लड़ने की चुनौती देते हुए दोनों के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया है।
ओवैसी ने दोनों नेताओं को घेरा
असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में चल रही बयानबाजी के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने दोनों नेताओं को अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन छोड़कर दूसरी जगह से चुनाव लड़ने की चुनौती दी। ओवैसी ने कहा कि योगी संभल और अखिलेश गोरखपुर से चुनाव लड़कर दिखाएं।
ओवैसी का दावा है कि जनता और AIMIM दोनों नेताओं को इन सीटों पर चुनौती दे सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि योगी और अखिलेश अयोध्या को राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रहे हैं और दोनों के बीच पहले से समझ बनी हुई है। हालांकि, यह मिलीभगत का आरोप ओवैसी का अपना दावा है।
उन्होंने अयोध्या में कथित वित्तीय गड़बड़ी और चंदे से जुड़े मामले का भी जिक्र किया। ओवैसी ने सवाल उठाया कि इस मामले में एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले में पकड़े गए लोगों को जमानत मिलने वाली है। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है।
सपा और मुस्लिम नेतृत्व पर सवाल
AIMIM प्रमुख ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि मुसलमानों ने कई पीढ़ियों तक सपा का समर्थन किया, लेकिन इससे उनके राजनीतिक हितों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। उन्होंने आजमगढ़ का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि सपा ने वहां के लिए क्या किया और शिबली कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा क्यों नहीं दिलाया।
ओवैसी के मुताबिक,
अब मुस्लिम समुदाय के एक हिस्से में खुद नेतृत्व करने और सत्ता में अपनी हिस्सेदारी हासिल करने की मांग बढ़ रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सपा इस बदलाव को ठीक से नहीं समझ रही है। अपने बयान में ओवैसी ने 2014, 2017, 2019, 2022 और 2024 के चुनावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन चुनावों में सपा के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए और कहा कि केवल वोट हासिल करने की राजनीति से काम नहीं चलेगा।
उनके इन बयानों के जरिए AIMIM ने उत्तर प्रदेश में मुस्लिम नेतृत्व और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। हालांकि, सपा के प्रति मुस्लिम मतदाताओं की राय को एक जैसा मानना सही नहीं होगा। अलग-अलग क्षेत्रों में मतदाताओं की प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं।
आजमगढ़ रैली में तीन दलों पर निशाना
रविवार को आजमगढ़ में आयोजित रैली के दौरान ओवैसी ने समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य उत्तर प्रदेश में केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि लोगों को नेतृत्व का अवसर देना है।
चुनाव आयोग पर तंज कसते हुए ओवैसी ने कहा कि,
उसका नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री जिताओ कमीशन’ कर देना चाहिए।
यह टिप्पणी उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक कटाक्ष के तौर पर की। ओवैसी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए एक एयरपोर्ट के निर्माण पर 108 करोड़ रुपये खर्च होने और आठ महीने बाद उसके बंद होने का दावा किया।
उन्होंने विश्वविद्यालय के निर्माण पर 900 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि इसके बावजूद छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिली। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित परियोजनाओं, खर्च और छात्रवृत्ति के आधिकारिक रिकॉर्ड देखना जरूरी है।
रैली में ओवैसी ने लोगों से मतदाता सूची में अपना नाम जांचने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का नाम सूची में नहीं है, वे फॉर्म-6 भरकर पंजीकरण के लिए आवेदन करें। उनके अनुसार, AIMIM लोगों को राजनीति में आगे बढ़ने और नेतृत्व करने का अवसर देना चाहती है।
उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल के बीच अयोध्या, मुस्लिम नेतृत्व, विकास परियोजनाओं और मतदाता सूची जैसे मुद्दे राजनीतिक चर्चा में हैं। योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच शुरू हुई चुनौती में ओवैसी की एंट्री ने बहस को एक नया मोड़ दिया है।
अब यह देखना होगा कि संभल और गोरखपुर से चुनाव लड़ने की चुनौती पर दोनों नेता क्या प्रतिक्रिया देते हैं। साथ ही, ओवैसी के आरोपों पर सपा और भाजपा की ओर से क्या जवाब आता है। फिलहाल, ये बयान राजनीतिक दलों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा हैं।

