IDBI बैंक में जमा पैसा सुरक्षित रहेगा या नहीं? सरकार के ₹52,878 करोड़ के सौदे के बाद जानें ग्राहकों पर असर

IDBI बैंक में आपका सेविंग अकाउंट, FD या लाखों रुपये जमा हैं, तो बैंक की नई डील से जुड़ी यह खबर आपके लिए अहम है। केंद्र सरकार ने IDBI बैंक में अपनी और LIC की बड़ी हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी है। इस सौदे की कीमत ₹52,878 करोड़ बताई गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या बैंक के मालिक बदलने से ग्राहकों के पैसे या FD पर कोई असर पड़ेगा?
IDBI बैंक की कितनी हिस्सेदारी बिकेगी?
केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर को IDBI बैंक में अपनी और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस सौदे के तहत बैंक की कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची जाएगी। इसमें केंद्र सरकार की 30.48 प्रतिशत और LIC की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।
इस सौदे का कुल मूल्य ₹52,878 करोड़ बताया गया है। हिस्सेदारी की बिक्री पूरी होने के बाद बैंक में सरकार और LIC की हिस्सेदारी पहले के मुकाबले कम रह जाएगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सौदा पूरा होने के बाद केंद्र सरकार के पास 15 प्रतिशत और LIC के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रहने की उम्मीद है।
इस बदलाव का मतलब है कि बैंक के मालिकाना हक में बड़ा परिवर्तन हो सकता है। हालांकि, हिस्सेदारी बेचने का फैसला अपने आप में यह नहीं बताता कि बैंक के रोजमर्रा के कामकाज या ग्राहकों के खातों में तुरंत कोई बदलाव होगा।
क्या ग्राहकों का पैसा सुरक्षित रहेगा? (IDBI Bank Deposit Safety)
IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने की खबर के बाद ग्राहकों के मन में बचत खाते, चालू खाते और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। लेकिन केवल बैंक की हिस्सेदारी बिकने से ग्राहकों के खाते अपने आप बंद नहीं होते हैं।
बैंक में जमा रकम, मौजूदा FD और खाते से जुड़ी सुविधाएं सिर्फ मालिकाना हक बदलने के कारण अपने आप खत्म नहीं हो जातीं। ग्राहकों को केवल इस सौदे की वजह से अपना पैसा निकालने या नया बैंक खाता खोलने की जरूरत नहीं है।
IDBI बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत काम करने वाला बैंक बना रहेगा। ग्राहकों को अपने खाते और जमा रकम से जुड़ी सामान्य बैंकिंग सुविधाओं के लिए बैंक की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
हालांकि, किसी भी बैंक में पैसा जमा करते समय उसकी वित्तीय स्थिति, जमा बीमा के नियम और अपनी जरूरतों को समझना जरूरी है। केवल हिस्सेदारी बिक्री की खबर को खाते में जमा रकम पर तत्काल खतरे का संकेत नहीं मानना चाहिए।
FD पर कितने रुपये का बीमा मिलता है?
IDBI बैंक में FD या बचत खाते में पैसा रखने वाले ग्राहकों के लिए डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) का बीमा महत्वपूर्ण है। DICGC, RBI की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था है, जो पात्र बैंक जमाओं को निर्धारित सीमा तक बीमा सुरक्षा देती है।
DICGC के नियमों के अनुसार, एक जमाकर्ता को एक बैंक में अधिकतम ₹5 लाख तक की जमा बीमा सुरक्षा मिलती है। इसमें मूल रकम और उस पर मिलने वाला ब्याज दोनों शामिल होते हैं।
यहां एक बात समझना जरूरी है। ₹5 लाख की सीमा हर खाते पर अलग-अलग लागू नहीं होती। अगर किसी व्यक्ति के एक ही बैंक में बचत खाता, चालू खाता, FD और रेकरिंग डिपॉजिट (RD) हैं, तो इन सभी पात्र जमाओं को मिलाकर बीमा सीमा तय होती है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी ग्राहक के एक ही बैंक में बचत खाते और FD को मिलाकर कुल पात्र जमा ₹7 लाख है, तो सामान्य नियमों के तहत DICGC की बीमा सुरक्षा अधिकतम ₹5 लाख तक होगी। इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक की हिस्सेदारी बिकने से बाकी रकम अपने आप डूब जाएगी। बीमा सुरक्षा और बैंक में जमा रकम की वास्तविक स्थिति दो अलग बातें हैं।
कुल मिलाकर, IDBI बैंक की हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव से ग्राहकों के खाते या FD अपने आप बंद नहीं होते। ग्राहकों को घबराकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बैंक की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। साथ ही, अगर एक ही बैंक में बड़ी रकम जमा है, तो DICGC बीमा की ₹5 लाख की सीमा और उसके नियमों को समझना भी जरूरी है।

