आसमान से उड़कर सीधे समुद्र में उतर सकता है भारत का नया हाईटेक ड्रोन, दुश्मनों पर रखेगा दोहरी नजर

आसमान से उड़कर सीधे समुद्र में उतर सकता है भारत का नया हाईटेक ड्रोन, दुश्मनों पर रखेगा दोहरी नजर

भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठा लिया है। अब देश ने ऐसा हाईटेक ड्रोन विकसित किया है जो आसमान में उड़ने के साथ, सीधे समुद्र के अंदर जाक भीर मिशन पूरा कर सकता है। इस नई तकनीक का नाम Avataar Drone है। इस ड्रोन को बेंगलुरु की डीप-टेक स्टार्टअप AquaAirX Autonomous Systems ने विकसित किया है।

इसकी आधिकारिक लॉन्चिंग 5 मार्च 2026 को हुई थी। खास बात है कि लॉन्च के तुरंत बाद इस प्रोजेक्ट को Zerodha के निवेश प्लेटफॉर्म Rainmatter से करीब 12.5 करोड़ रुपये की शुरुआती फंडिंग भी मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि अवतार एम्फीबियस ड्रोन भारत की समुद्री सुरक्षा और रक्षा तकनीक के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है।

Avataar Drone क्या है?

Avataar Drone भारत का पहला ऐसा उभयचर ड्रोन माना जा रहा है जो हवा और पानी दोनों में काम कर सकता है। जहां सामान्य ड्रोन केवल आसमान में उड़ान भरते हैं, वहीं यह उन्नत मशीन हवा से सीधे समुद्र में उतरकर भी मिशन पूरा कर सकती है।

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सरल शब्दों में समझें तो यह एक ऐसा स्मार्ट रोबोट है जो विमान की तरह उड़ सकता है और पनडुब्बी की तरह समुद्र के अंदर जाकर निगरानी कर सकता है। यह तकनीक मल्टी-डोमेन रोबोटिक्स का हिस्सा है, जिसमें एक ही मशीन अलग-अलग वातावरण में काम कर सकती है।

समुद्र में काम करने के लिए खास डिजाइन

समुद्र के अंदर काम करने वाली किसी भी मशीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती नमकीन पानी होता है। नमक के कारण धातु जल्दी खराब हो सकती है और सेंसर भी प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से Avataar Drone को तीन स्तर की सुरक्षा के साथ तैयार किया गया है।

ड्रोन की बॉडी कार्बन फाइबर से बनाई गई है। यह सामग्री हल्की होने के साथ-साथ मजबूत भी होती है और नमकीन पानी से जल्दी खराब नहीं होती। इसके अलावा सेंसर पर एक विशेष कोटिंग की गई है जो नमक और गंदगी को चिपकने से रोकती है।

हालांकि हर मिशन के बाद ड्रोन को ताजे पानी से साफ किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि समुद्री नमक का असर मशीन पर न पड़े और यह लंबे समय तक सुरक्षित तरीके से काम करता रहे।

Technology Readiness Level-6 क्यों महत्वपूर्ण है

डेवलपर्स के अनुसार Avataar Drone ने Technology Readiness Level-6 यानी TRL-6 हासिल कर लिया है। विज्ञान और इंजीनियरिंग की दुनिया में TRL-6 का मतलब यह होता है कि तकनीक अब केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रही है।

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अवतार एम्फीबियस ड्रोन का प्रोटोटाइप, वास्तविक जलाशयों में परीक्षण के दौरान सफल रहा है। हालांकि कई तकनीकें केवल प्रयोगशाला में सफल होती हैं, लेकिन वास्तविक परिस्थितियों में काम नहीं कर पातीं। TRL-6 यह साबित करता है कि यह ड्रोन पानी का दबाव, तेज धार और अन्य चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है।

अब माना जा रहा है कि यह तकनीक अंतिम परीक्षण के चरण में पहुंच चुकी है और भविष्य में बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए तैयार हो सकती है।

समुद्र के अंदर कैसे काम करता है अवतार एम्फीबियस ड्रोन?

समुद्र के अंदर अक्सर पानी गंदला या अंधेरा होता है, जिससे कैमरे से देखना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से अवतार एम्फीबियस ड्रोन एक खास ध्वनि आधारित तकनीक का इस्तेमाल करता है। यह ड्रोन ध्वनि तरंगें भेजता है जो आसपास की वस्तुओं से टकराकर वापस लौटती हैं। इन संकेतों के आधार पर ड्रोन अपने आसपास का त्रि-आयामी नक्शा (3D Map) तैयार करता है।

यह तकनीक कुछ हद तक उस तरीके जैसी है जिससे चमगादड़ अंधेरे में रास्ता खोजते हैं। इसके अलावा ड्रोन में लगा एक उन्नत सेंसर समुद्र की सतह के मुकाबले इसकी गति को मापता रहता है, जिससे इसे अपनी सही दिशा और स्थिति का पता चलता है।

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भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के लिए क्यों अहम है

विशेषज्ञों के अनुसार Avataar Drone भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह हाईटेक ड्रोन बंदरगाहों और समुद्री क्षेत्रों में लंबे समय तक निगरानी कर सकता है। इससे पानी के ऊपर और समुद्र के भीतर दोनों जगह संभावित खतरों का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

हालांकि इसका उपयोग केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह समुद्र के नीचे बिछी पाइपलाइन और केबल की जांच करने में भी मदद कर सकता है। इसके अलावा आपात स्थितियों में खोज और बचाव अभियानों में भी यह बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

गौरतलब है कि इसकी लंबी निगरानी क्षमता के कारण किसी भी क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा सकती है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था में कोई अंधा क्षेत्र नहीं बचता।

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