बिहार में रेलवे को मिला बड़ा तोहफा, 9 गुना बढ़ा बजट, 17,000 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी
Bihar Railway Budget 2026: बिहार में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर जो काम सालों में नहीं हो पाया, वह अब कुछ ही वर्षों में जमीन पर उतरता दिख रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य को रेलवे विकास के मामले में बड़ी प्राथमिकता दी है। खास बात है कि बजट से लेकर ट्रैक, स्टेशन और हाईटेक सेफ्टी सिस्टम तक, हर मोर्चे पर बिहार को जबरदस्त बढ़त मिली है।
बिहार की रेलवे को मिला अब तक का सबसे बड़ा बजट
बिहार रेलवे बजट 2026 (Bihar Railway Budget 2026) के तहत बिहार की रेलवे को बड़ी सौगात मिली है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक,
2009-14 के दौरान बिहार के लिए रेलवे का औसत सालाना बजट सिर्फ 1,132 करोड़ रुपये हुआ करता था, वहीं अब 2026-27 में यह बढ़कर 10,379 करोड़ रुपये पहुंच गया है, यानी करीब 9 गुना की सीधी बढ़ोतरी। यह बढ़ा हुआ बजट सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है। आंकड़े बड़े हैं, लेकिन इनके पीछे जमीन पर होता असली काम ज्यादा अहम है।
बता दें की फिलहाल बिहार में 1,09,158 करोड़ रुपये के रेलवे प्रोजेक्ट अलग-अलग चरणों में चल रहे हैं, जो आने वाले समय में राज्य की रेलवे तस्वीर पूरी तरह बदल सकते हैं।
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अमृत भारत स्टेशन योजना से बदलेगा स्टेशनों का चेहरा
अमृत भारत स्टेशन योजना (Amrit Bharat Station Scheme) के तहत बिहार के 98 रेलवे स्टेशनों को पूरी तरह मॉडर्न बनाया जा रहा है, जिन पर करीब 3,287 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बता दें कि थावे और पिरपैंती स्टेशनों पर काम पूरा हो चुका है, जबकि बाकी स्टेशनों पर निर्माण तेज रफ्तार से चल रहा है। इन स्टेशनों पर बेहतर प्लेटफॉर्म, आधुनिक वेटिंग एरिया, लिफ्ट, एस्केलेटर और यात्रियों की सुविधा पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
साथ ही Bihar Train Connectivity में भी जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। आज बिहार से 14 जोड़े वंदे भारत एक्सप्रेस, 21 जोड़े अमृत भारत एक्सप्रेस और 1 जोड़ा नमो भारत एक्सप्रेस चल रही हैं। हालाकी सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 2014 के बाद से अब तक करीब 2,000 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाई जा चुकी है, जो मलेशिया के पूरे रेल नेटवर्क से भी ज्यादा मानी जा रही है।
बिहार की रेलवे हुई पूरी तरह इलेक्ट्रिक, सुरक्षा में भी बड़ा बदलाव
बता दें कि बिहार ने रेलवे के मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है, जहां अब राज्य की 100 प्रतिशत रेलवे लाइनें इलेक्ट्रिफाइड हो चुकी हैं और कुल 3,330 किलोमीटर ट्रैक पर बिजली से ट्रेनें दौड़ रही हैं। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब तक 568 फ्लाईओवर और अंडरपास भी तैयार किए जा चुके हैं, जिससे रेल हादसों का खतरा काफी हद तक कम हुआ है।
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रेलवे यहीं नहीं रुका है, ट्रेन टक्कर रोकने वाले हाईटेक कवच सिस्टम को भी तेजी से लागू किया जा रहा है, जिसके तहत 1,149 किलोमीटर के लिए मंजूरी मिल चुकी है और 802 किलोमीटर हिस्से पर काम या टेंडर प्रक्रिया जारी है। गौरतलब है कि इन कदमों से बिहार में रेल यात्रा पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद होने वाली है।
DDU से झाझा तक 17,000 करोड़ का मेगा रेल प्रोजेक्ट
पूर्व मध्य रेलवे के तहत DDU से झाझा तक करीब 400 किलोमीटर लंबे व्यस्त रेल कॉरिडोर के क्षमता विस्तार को हरी झंडी मिल चुकी है, जिस पर लगभग 17,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस मेगा प्रोजेक्ट में DDU से किऊल तक तीसरी और चौथी रेल लाइन, जबकि किऊल से झाझा तक तीसरी लाइन बिछाई जाएगी।
इससे ट्रेनों की भीड़ कम होगी और सफर पहले से ज्यादा तेज और समय पर होगा। हालाकी यह योजना सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि मालगाड़ियों की आवाजाही को भी आसान बनाएगी। गौरतलब है कि रेलवे अधिकारियों और पूर्व मध्य रेलवे की मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्रा ने इस बड़े प्रोजेक्ट की पुष्टि कर दी है।
रेलवे मेगा प्रोजेक्ट के खंड और निर्माण की टाइमलाइन सामने आई
बता दें कि यह रेलवे मेगा प्रोजेक्ट कई छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि काम तेज और असरदार तरीके से पूरा हो सके। इसमें डीडीयू से दानापुर, दानापुर से फतुहा, फतुहा से बख्तियारपुर, बख्तियारपुर से पुनारख, पुनारख से किऊल (करीब 2,514 करोड़ रुपये) और किऊल से झाझा (करीब 903 करोड़ रुपये) जैसे अहम खंड शामिल हैं।
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पुनारख-किऊल और किऊल-झाझा हिस्सों की स्वीकृति अभी अंतिम चरण में है। जानकारी के मुताबिक पटना इलाके में जमीन की कमी को देखते हुए कुछ जगहों पर रिवर्सिबल ट्रैक बनाए जाने की योजना है। निर्माण कार्य मार्च 2026 से चरणबद्ध तरीके से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
इस पूरे रेलवे विकास से जहां यात्री ट्रेनों की समय पर आवाजाही बेहतर होगी, वहीं मालगाड़ियों का संचालन भी आसान बनेगा, जिससे बिहार के उद्योग, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।