क्रिप्टो मार्केट में भारी बिकवाली, $80,000 के नीचे फिसला Bitcoin, मिनटों में $1.6 बिलियन साफ
Bitcoin Crash: क्रिप्टो निवेशकों के लिए शनिवार का दिन किसी झटके से कम नहीं रहा। दरसल न्यूयॉर्क में शनिवार दोपहर ट्रेडिंग के दौरान बिटकॉइन पहली बार अप्रैल 2025 के बाद $80,000 से नीचे (Bitcoin below 80000) चला गया। लिहाजा एक झटके में $1.6 बिलियन का पोजिशन साफ हो गया। खास बात है कि ये गिरावट सिर्फ बिटकॉइन नहीं, बल्कि Ethereum और Solana जैसी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में भी देखी गई।
अब कई निवेशक सोच रहे हैं कि यह सिर्फ अस्थायी गिरावट है या क्रिप्टो मार्केट में भरोसे की बुनियाद पर सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसे में आइए जानते हैं की क्यों बिटकॉइन अब निवेशकों के लिए चुनौती बन गया है और सोने-चांदी की तरफ रुख क्यों बढ़ रहा है।
$80,000 के नीचे फिसला बिटकॉइन
बता दें कि शनिवार की मिड-डे ट्रेडिंग में क्रिप्टो बाजार में अचानक हड़कंप मच गया, जब दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin करीब 7.1 प्रतिशत टूटकर सीधे $78,159.41 तक फिसल गई। इस गिरावट के साथ बिटकॉइन अपने हालिया रिकॉर्ड स्तर से अब 30 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आ चुका है, जो निवेशकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
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पिछले 24 घंटों में पूरे क्रिप्टो मार्केट से करीब $111 बिलियन की वैल्यू साफ हो गई, जबकि CoinGecko और Coinglass के आंकड़े बताते हैं कि इसी दौरान लगभग $1.6 बिलियन की शॉर्ट और लॉन्ग पोजिशन लिक्विडेट हो गईं। गौरतलब है कि इन लिक्विडेशन का बड़ा हिस्सा सिर्फ आखिरी चार घंटों में हुआ, जिसमें सबसे ज्यादा मार Bitcoin और Ethereum पर पड़ी।
हालाकी गिरावट यहीं नहीं रुकी, Ether में 10 प्रतिशत से ज्यादा और Solana में 11 प्रतिशत से अधिक की टूट देखने को मिली। ट्रेडर्स तेजी से पोजिशन काटते नजर आए, जिससे साफ संकेत मिलता है कि फिलहाल निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं और पूरे क्रिप्टो सेक्टर में कमजोरी का माहौल बना हुआ है।
Liberation Day के बाद फिर वहीं पहुंचा बाजार
ताजा गिरावट ने Bitcoin को एक बार फिर उन्हीं स्तरों पर पहुंचा दिया है, जो “Liberation Day” के बाद देखने को मिले थे। गौरतलब है कि अक्टूबर में रिकॉर्ड हाई छूने के बाद जनवरी 2026 की शुरुआत में क्रिप्टो मार्केट में जबरदस्त तेजी आई थी और निवेशकों का भरोसा लौटता नजर आया था, लेकिन हालाकी मौजूदा गिरावट उस तेजी का बिल्कुल उलटा चेहरा दिखा रही है।
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इस बार बिटकॉइन को वे सपोर्ट भी नहीं मिल सके, जो पहले अक्सर कीमतों को थाम लेते थे। जनवरी में अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ा, निवेशक नीतिगत जोखिमों को लेकर सतर्क हुए और ट्रंप प्रशासन से जुड़ी अनिश्चितताओं की चर्चा तेज रही, इसके बावजूद क्रिप्टो मार्केट में कोई खास हलचल नहीं दिखी।
इतना ही नहीं, जब सोना रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा और चांदी में भी तेज उछाल आया, तब भी Bitcoin नई खरीदारी खींचने में नाकाम रहा। शुक्रवार को गोल्ड और सिल्वर में आई बड़ी हलचल के बावजूद बिटकॉइन का बेअसर रहना यह संकेत देता है कि फिलहाल निवेशक क्रिप्टो को लेकर पहले जितने आश्वस्त नहीं दिख रहे हैं।
निवेशक क्यों क्रिप्टो से बना रहे हैं दूरी
क्रिप्टो मार्केट से निवेशकों का भरोसा लगातार कमजोर पड़ता दिख रहा है और इसकी एक बड़ी वजह अमेरिका में क्रिप्टो सेक्टर से जुड़े नए नियमों में हो रही देरी है। बता दें कि इन नियमों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता घटा दी है, जिस कारण लोग अब सुरक्षित विकल्पों की तलाश में हैं।
Louis Navellier के मुताबिक,
फिएट करेंसी को लेकर बढ़ती चिंता के बीच सोना और चांदी निवेशकों के लिए ज्यादा भरोसेमंद विकल्प बनते जा रहे हैं, जिससे बिटकॉइन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
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हालाकी बाजार पर दबाव यहीं तक सीमित नहीं है। मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, खासकर ईरान और इजरायल को लेकर आक्रामक बयानबाजी और संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका, भी बिटकॉइन की कमजोरी को बढ़ा रही है।
इतने बड़े भू-राजनीतिक जोखिमों के बावजूद Bitcoin में वह मांग नहीं दिखी, जिसकी उम्मीद पहले की जाती थी, जबकि एक समय इसे वैश्विक संकट में सुरक्षित निवेश माना जाता था। मौजूदा हालात इस धारणा को कमजोर करते नजर आ रहे हैं और यही वजह है कि निवेशक क्रिप्टो से दूरी बनाते जा रहे हैं।