भारत ने ₹79,000 करोड़ के रक्षा सौदों को दी मंजूरी, जानें सेना को मिलेंगे कौन से घातक हथियार
India 79000 Crore Defence Deal: साल 2025 की विदाई भारत ने धमाकेदार अंदाज़ में की है। 29 दिसंबर को लिए गए एक बड़े फैसले ने सरहद पार दुश्मनों के होश उड़ा दिए हैं। ₹79,000 करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी मिलते ही साफ हो गया है कि भारत अब सिर्फ बचाव नहीं, बल्कि पूरी आक्रामक तैयारी के मूड में है।
खास बात है कि इस बार सेना को ऐसे घातक हथियार मिल रहे हैं, जो जमीन, आसमान और समंदर तीनों मोर्चों पर दुश्मन की हर चाल को नाकाम कर सकते हैं।
India 79000 Crore Defence Deal: सेना, वायुसेना और नौसेना को मिले नए ब्रह्मास्त्र
बता दें कि 29 दिसंबर 2025 को रक्षा अधिग्रहण परिषद की अहम बैठक में भारतीय थल सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए करीब ₹79,000 करोड़ के रक्षा सौदों को शुरुआती मंजूरी दी गई है, जो साफ तौर पर दिखाता है कि भारत अब सिर्फ बचाव की नीति पर नहीं, बल्कि आधुनिक और निर्णायक युद्ध की तैयारी पर फोकस कर रहा है।
थल सेना को मिले घातक हथियार
इस फैसले के तहत थल सेना को पिनाका रॉकेट प्रणाली के लिए लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट मिलेंगे, जिससे दुश्मन के बंकर और ठिकानों पर सटीक और घातक हमला संभव होगा, वहीं आत्मघाती ड्रोन आधुनिक युद्ध में जमीन पर कहर बरपाने के लिए सेना के बेड़े में शामिल किए जाएंगे।
दुश्मन के छोटे जासूसी ड्रोन से निपटने के लिए ड्रोन पहचान और निष्क्रिय करने वाली एकीकृत प्रणाली को भी मंजूरी मिली है, जो आसमान में ही खतरे को खत्म कर देगी, साथ ही पहाड़ी इलाकों में निगरानी मजबूत करने के लिए हल्के निम्न स्तर के रडार तैनात होंगे।
वायुसेना को मिली बालाकोट जैसी मारक ताकत
दूसरी ओर, भारतीय वायुसेना को भी बालाकोट जैसी मारक ताकत मिली है, जहां पूरी तरह स्वदेशी अस्त्र मार्क दो मिसाइल से लेकर अत्याधुनिक मार्गदर्शन किट्स तक शामिल हैं, जो साधारण बमों को बेहद सटीक स्मार्ट हथियार में बदल देती हैं।
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इसके अलावा तेजस लड़ाकू विमान के लिए पूर्ण मिशन सिम्युलेटर की खरीद से पायलटों को वास्तविक युद्ध जैसी ट्रेनिंग मिलेगी। गौरतलब है कि ये सभी फैसले मिलकर भारत की सैन्य ताकत को नई ऊंचाई देने वाले हैं और आने वाले समय में देश की सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत बनाएंगे।
हिंद महासागर में नौसेना की सख्त चौकसी, हर हरकत पर रहेगी पैनी नजर
भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर में अपनी निगरानी और भी मजबूत कर दी है। हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्यूरेंस ड्रोन, जिन्हें भारत की तीसरी आंख कहा जा रहा है, हजारों फीट की ऊंचाई से घंटों तक उड़कर समुद्र के हर कोने पर नजर रख सकते हैं, जिससे चीन की बढ़ती गतिविधियों पर पैनी निगाह रखी जाएगी।
वहीं, युद्ध जैसी स्थिति में संपर्क बनाए रखने के लिए हाई फ्रीक्वेंसी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो शामिल किए गए हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित और हैक-प्रूफ बातचीत सुनिश्चित करेंगे। बड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों को संभालने के लिए शक्तिशाली टग बोट्स भी नौसेना के बेड़े का हिस्सा बनेंगी।
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Make in India से आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव
बता दें की India 79000 Crore Defence Deal की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें स्वदेशी रक्षा उद्योग को प्राथमिकता दी गई है। ₹79,000 करोड़ का यह फैसला न सिर्फ सेना को मजबूत करेगा, बल्कि भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएगा। गौरतलब है कि 29 दिसंबर 2025 का यह दिन भारत की सैन्य ताकत के इतिहास में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
हालाकी रक्षा खरीद को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भर भारत पर खास जोर देकर सरकार ने बड़ा संदेश दिया है।
