अमेरिका फिर शुरू करेगा परमाणु हथियारों की टेस्टिंग, चीन को लेकर दी बड़ी चेतावनी
Donald Trump Nuclear Testing: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। उन्होंने देश के nuclear weapons programme को तेज़ करने का आदेश दिया है। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका अब तत्काल अपने परमाणु हथियारों की टेस्टिंग शुरू करेगा। खास बात यह है कि यह ऐलान ट्रंप की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक से ठीक पहले आया है।
Donald Trump Nuclear Testing Order: पांच साल में चीन करेगा अमेरिका की बराबरी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म Truth Social पर लिखा कि रूस Nuclear Weapons की दौड़ में पहले स्थान पर है, अमेरिका दूसरे पर और चीन तीसरे पर। हालांकि, ट्रंप का कहना है कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए चीन अगले पांच साल में अमेरिका की बराबरी कर लेगा। इसी वजह से उन्होंने Department of War को तुरंत परमाणु हथियारों की टेस्टिंग शुरू करने का आदेश (Donald Trump Nuclear Testing Order) दिया है।
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बता दें, अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने अमेरिका के नयूक्लीयर हथियारों को आधुनिक बनाने और अपग्रेड करने का दावा किया था। उन्होंने लिखा कि इसकी विनाशक शक्ति को देखते हुए यह फैसला कठिन था, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम था।
दुनिया के नौ परमाणु देशों की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय परमाणु हथियार उन्मूलन अभियान (ICAN) के अनुसार, दुनिया में इस समय नौ देश नयूक्लीयर हथियार रखते हैं। इनमें रूस के पास सबसे ज़्यादा 5,500 वारहेड्स हैं, जबकि अमेरिका के पास 5,044 हैं। चीन तीसरे स्थान पर है जिसके पास 600 वारहेड्स हैं।
| रैंक | देश | परमाणु हथियारों की संख्या |
|---|---|---|
| 1 | रूस | 5,500 |
| 2 | अमेरिका | 5,044 |
| 3 | चीन | 600 |
| 4 | फ्रांस | 290 |
| 5 | यूनाइटेड किंगडम | 225 |
| 6 | भारत | 180 |
| 7 | पाकिस्तान | 172 |
| 8 | इज़राइल | 90 |
| 9 | उत्तर कोरिया | 50 |
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गौरतलब है कि रूस और अमेरिका मिलकर करीब 10,544 वारहेड्स रखते हैं, जो चीन की क्षमता से करीब 17 गुना ज़्यादा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में चीन तेजी से इस गैप को कम कर सकता है।
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु हथियार प्रतिबंध संधि क्या है?
संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2017 में परमाणु हथियार प्रतिबंध संधि (Treaty on the Prohibition of Nuclear Weapons) को अपनाया था, जिसका मुख्य उद्देश्य दुनिया को परमाणु हथियारों के खतरों से पूरी तरह मुक्त करना है। इस संधि को 122 देशों ने समर्थन दिया था और यह जनवरी 2021 में लागू हुई। इस समझौते के तहत किसी भी देश को परमाणु हथियार बनाने, रखने, तैनात करने या उनका इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है।
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खास तौर पर, यह संधि उन देशों को भी रोकती है जो किसी अन्य राष्ट्र को परमाणु हथियार कार्यक्रम में मदद करते हैं। ऐसे समय में जब अमेरिका, रूस और चीन जैसे देश फिर से परमाणु होड़ में शामिल हो रहे हैं, यह संधि वैश्विक शांति और सुरक्षा की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है।
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