धरती पर फिर मंडरा रहा है बड़ा खतरा, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी; आ सकती है 252 मिलियन साल पहले जैसी तबाही

धरती पर फिर मंडरा रहा है बड़ा खतरा, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी; आ सकती है 252 मिलियन साल पहले जैसी तबाही

Mass Extinction: धरती पर एक बार फिर वही खतरा मंडरा रहा है जो 25.2 करोड़ साल पहले पूरी दुनिया के जीवन को खत्म कर गया था। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इंसान जिस तेजी से कार्बन उत्सर्जन (CO2 emission) कर रहा है, वही गलती दोहरा रहा है। गौरतलब है कि उस समय की घटना को “पर्मियन-ट्राइसिक विलुप्ति” कहा जाता है, जिसमें 96% समुद्री जीव और 70% स्थलीय प्रजातियां हमेशा के लिए मिट गई थीं। MIT के वैज्ञानिक डेनियल रोथमैन के मुताबिक, अगर यह जारी रहा तो धरती पर जीवन गंभीर खतरे में पड़ सकता है।

कैसे बिगड़ रहा है धरती का कार्बन साइकिल?

धरती का Carbon cycle एक बेहद नाजुक संतुलन है जो वायुमंडल, महासागर, जमीन और जीव-जंतुओं के बीच कार्बन के आदान-प्रदान को नियंत्रित करता है। प्राकृतिक रूप से ज्वालामुखी फटने से निकलने वाली Co2 को पेड़-पौधे और महासागर सोख लेते हैं। हालाकि, इंसानी गतिविधियों के कारण अब यह संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है। MIT के वैज्ञानिक डेनियल रोथमैन के मुताबिक, लगातार बढ़ती कार्बन उत्सर्जन से तापमान बढ़ रहा है, महासागर अम्लीय हो रहे हैं और इकोसिस्टम खतरे में हैं। अगर इसी गति से बढ़ा तो पृथ्वी को गंभीर नुकसान हो सकता है।

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कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ने से क्या होता है नुकसान?

आपको बता दें कि धरती के इतिहास में जितनी भी बड़ी तबाहियां आईं, उनमें कार्बन डाइऑक्साइड का असंतुलित बढ़ना मुख्य कारण रहा है। अचानक और भारी मात्रा में Co2 वातावरण में जाने से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है, महासागर अम्लीय हो जाते हैं और पूरे इकोसिस्टम पर बुरा असर पड़ता है। इसके चलते बड़े पैमाने पर समुद्री और स्थलीय जीव-जंतु नष्ट हो जाते हैं। खास बात है कि धीरे-धीरे बढ़ी CO2 इतनी नुकसानदेह नहीं होती, लेकिन तेजी से बढ़ी CO2 इतिहास में कई बार Mass Extinction जैसी तबाहियों का कारण बनी है। आज इंसान वही गलती दोहरा रहा है।

252 मिलियन साल पहले आई थी सबसे बड़ी तबाही

आपको बता दें कि लगभग 252 मिलियन साल पहले धरती ने इतिहास की सबसे बड़ी तबाही झेली थी, जिसे वैज्ञानिक पर्मियन-ट्राइसिक विलुप्ति (Permian-Triassic Mass Extinction) कहते हैं। खास बात है कि इस दौरान 96% समुद्री जीव और करीब 70% जमीन पर रहने वाले जीव हमेशा के लिए खत्म हो गए। हालाकि यह तबाही प्राकृतिक वजहों से हुई थी, लेकिन आज के वैज्ञानिक डर रहे हैं कि लगातार बढ़ते कार्बन उत्सर्जन से इंसान वही गलती दोहरा सकता है।

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क्यों हुई थी यह तबाही?

धरती पर हुई इस सबसे बड़ी तबाही की वजह साइबेरियन ट्रैप्स क्षेत्र में लगातार हुए विशाल ज्वालामुखी विस्फोट थे। लाखों सालों तक इन ज्वालामुखियों ने वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ी, जिससे धरती का तापमान तेजी से बढ़ा और महासागरों में अम्लीयता बढ़ गई। हालात इतने खतरनाक हो गए कि पूरा इकोसिस्टम ढह गया और समुद्री व स्थलीय जीवन का बड़ा हिस्सा हमेशा के लिए समाप्त हो गया। आज वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि इंसान वही गलती दोहरा रहा है।

क्या इंसान वही गलती दोहरा रहा है?

MIT वैज्ञानिक रोथमैन के अनुसार, इंसानों द्वारा लगातार बढ़ाई जा रही Carbon emission से धरती फिर उसी खतरे की ओर बढ़ रही है। खासकर इंडस्ट्रियल गतिविधियों, वाहन प्रदूषण और जंगलों की कटाई ने CO2 स्तर को खतरनाक सीमा पर पहुंचा दिया है। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर समय रहते कार्बन उत्सर्जन को रोका जाए, नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाया जाए और जंगलों को संरक्षित किया जाए तो इस खतरे को कम किया जा सकता है।

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