चीन-पाकिस्तान की बढ़ी टेंशन, भारत को मिलने जा रहे 114 राफेल, 3.25 लाख करोड़ का सबसे बड़ा रक्षा सौदा

चीन-पाकिस्तान की बढ़ी टेंशन, भारत को मिलने जा रहे 114 राफेल, 3.25 लाख करोड़ का सबसे बड़ा रक्षा सौदा

India France Rafale Deal: भारत की सैन्य ताकत को लेकर एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। लंबे इंतजार के बाद अब इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में 114 नए राफेल लड़ाकू विमान शामिल होने जा रहे हैं। यह डील न सिर्फ भारत की हवाई ताकत को कई गुना बढ़ाएगी, बल्कि चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के लिए भी बड़ा संदेश मानी जा रही है। ऐसे में आइए जानते हैं इस रक्षा सौदे में क्या खास है जो पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है?

राफेल डील से भारत की सैन्य ताकत को मिला बड़ा बूस्ट

बता दें कि रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है, जिससे भारतीय वायुसेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा होने वाला है। इसी बैठक में भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त P-8I Poseidon टोही विमान खरीदने को भी हरी झंडी मिल गई है।

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यह अहम फैसला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में लिया गया। राफेल डील की अनुमानित कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है, जो भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होगा। हालांकि, इस सौदे को पूरी तरह लागू करने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट समिति ऑन सुरक्षा से अंतिम मंजूरी मिलना अभी बाकी है।

भारतीय वायुसेना के लिए राफेल सौदा क्यों है गेम चेंजर?

बता दें कि भारतीय वायुसेना इस समय लड़ाकू विमानों की गंभीर कमी से गुजर रही है। मौजूदा बेड़े में केवल 29 स्क्वाड्रन ही बचे हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है। पुराने मिग जैसे कई विमान सेवा से बाहर हो चुके हैं, जिससे हालात और चुनौतीपूर्ण हो गए थे। ऐसे में राफेल सौदा वायुसेना के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं माना जा रहा।

इस समझौते के बाद स्क्वाड्रन की संख्या बढ़कर लगभग 35 से 36 तक पहुंच सकती है, जिससे चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर भारत की स्थिति काफी मजबूत होगी। खास बात यह है कि 18 राफेल लड़ाकू विमान सीधे तैयार अवस्था में फ्रांस से आएंगे, जबकि 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे।

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इससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को बड़ा सहारा मिलेगा, रक्षा उत्पादन को गति मिलेगी और हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बनेंगे। हालांकि, कुछ विमान दो सीट वाले भी होंगे, जिनका उपयोग पायलटों के प्रशिक्षण में किया जाएगा, जो आने वाले समय में वायुसेना की ताकत को और मजबूत करेगा।

Rafale Fighter Jet की ताकत: हथियार, रेंज और मारक क्षमता

बता दें कि राफेल एक बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जो हवा में दुश्मन से लड़ने, जमीन पर सटीक हमले करने और समुद्र में भी कार्रवाई करने में पूरी तरह सक्षम है। पाकिस्तान इसकी मारक क्षमता पहले ही देख चुका है। भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल नागेश कपूर के अनुसार, राफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के आने से भारत की हवाई ताकत कई गुना बढ़ जाती है।

राफेल में स्कैल्प मिसाइल लगी है, जो 250 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक सटीक वार कर सकती है, वहीं मेटियोर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, हैमर सटीक हमला करने वाला हथियार, स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और एडवांस्ड एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार इसे दुश्मन के लिए बेहद खतरनाक बनाते हैं। यही वजह है कि राफेल को आज भारत की वायुसेना की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।

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P-8I Poseidon से हिंद महासागर में भारत की निगरानी और मजबूत

भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता को और मजबूत करने के लिए छह अतिरिक्त P-8I Poseidon विमान को मंजूरी दी गई है, जिसके बाद अब भारत के पास कुल 18 ऐसे अत्याधुनिक विमान हो जाएंगे। ये विमान दुश्मन की पनडुब्बियों, युद्धपोतों और हवाई गतिविधियों को बहुत दूर से पहचानने और उन पर नजर रखने में सक्षम हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती हलचल के बीच यह कदम भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

वहीं राफेल लड़ाकू विमानों की डील भी सरकार से सरकार के बीच के मॉडल पर आधारित है, जिससे पूरे सौदे में पारदर्शिता बनी रहती है। इससे पहले वर्ष 2016 में भी इसी तरह 36 राफेल विमानों की खरीद हुई थी। पिछले साल जून में भारत और फ्रांस के बीच दासो एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के बीच हुए 4 बड़े समझौतों से अब राफेल विमानों की आपूर्ति और तेज होने की उम्मीद है, जिससे भारतीय वायुसेना की ताकत आने वाले समय में और बढ़ने वाली है।

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