15 मिनट… और 1500 KM दूर दुश्मन का खेल खत्म! भारत की नई हाइपरसोनिक मिसाइल के आगे दुश्मन होगा बेबस
India Hypersonic Anti-Ship Missile: भारत ने समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित 1500 किलोमीटर मारक क्षमता वाली हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल अब दुश्मन के युद्धपोतों के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। ये मिसाइल महज 15 मिनट के भीतर लक्ष्य को भेदने में सक्षम है।
बता दें कि इस स्वदेशी लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल को पहली बार 77वें गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्यपथ पर देश के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। ये मिसाइल खास तौर पर भारतीय नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ और ज्यादा मजबूत होने वाली है।
क्या है LRAShM Missile?
LRAShM यानी लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल भारत की ऐसी घातक मिसाइल है जो हाइपरसोनिक रफ्तार, यानी ध्वनि की गति से पांच गुना से भी तेज उड़ान भरती है, यही वजह है कि दुश्मन के रडार इसे समय रहते पकड़ नहीं पाते। इसकी मारक क्षमता करीब 1500 किलोमीटर तक है।
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DRDO के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ए. प्रसाद गौड़ के अनुसार,
यह मिसाइल महज 15 मिनट में दुश्मन के युद्धपोत को निशाना बना सकती है, जिससे सामने वाले को बचाव का लगभग कोई मौका नहीं मिलता। ये मिसाइल हर श्रेणी के युद्धपोत, चाहे वह विमान वाहक पोत हो या विध्वंसक जहाज, सभी को तबाह करने में सक्षम है।
गौरतलब है कि इस LRAShM में मल्टी-पेलोड क्षमता भी दी गई है, यानी यह अलग-अलग तरह के हथियार ले जा सकती है, जिससे भारतीय नौसेना को मिशन के हिसाब से रणनीति बदलने की पूरी आज़ादी मिलती है, हालाँकि सुरक्षा कारणों से इसके तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
समुद्र से आसमान तक भारत की हाइपरसोनिक छलांग
बता दें कि भारत की नई हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक समुद्र में देश की ताकत को पूरी तरह नए स्तर पर ले जा रही है। इस मिसाइल की शानदार वायुगतिकीय क्षमता इसे लंबी दूरी तक बिना रफ्तार कम किए फिसलते हुए आगे बढ़ने में मदद करती है, जिससे समुद्री युद्ध की तस्वीर ही बदल सकती है।
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गौरतलब है कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन सहित कई देशों की बढ़ती नौसैनिक हलचल के बीच यह मिसाइल भारत की ओर से एक साफ और मजबूत रणनीतिक संदेश भी मानी जा रही है।
DRDO का कहना है कि,
भविष्य पूरी तरह हाइपरसोनिक मिसाइलों का है और भारत इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। संगठन फिलहाल हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल तकनीक और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल तकनीक पर काम कर रहा है।
परियोजना निदेशक ए. प्रसाद गौड़ के मुताबिक,
आने वाले समय में भारत 3000 से 3500 किलोमीटर तक मार करने वाली हाइपरसोनिक क्षमता हासिल कर सकता है, जो देश की रक्षा शक्ति को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाएगी।
रिपब्लिक डे परेड में दिखेगा भारत का पराक्रम
26 जनवरी को कर्तव्यपथ पर जब देश गणतंत्र दिवस परेड देखेगा, तब भारत की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल की झलक भी सबका ध्यान खींचेगी। ये सिर्फ एक मिसाइल का प्रदर्शन नहीं होगा, बल्कि यह साफ संकेत होगा कि भारत अब समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर पूरी तरह तैयार है।
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ये मिसाइल बेहद तेज़ रफ्तार से लंबी दूरी तक वार करने में सक्षम है, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। हालाकी इसकी आधिकारिक तैनाती की तारीख सामने नहीं आई है, लेकिन रक्षा जानकारों का मानना है कि परीक्षण पूरे होने के बाद इसे जल्द ही भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया जा सकता है।
गौरतलब है कि ऐसे समय में जब हिंद महासागर क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ रही हैं, यह ताकत भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगी।