LPG संकट से मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं पर भी मंडराया खतरा? टेलीकॉम इंडस्ट्री ने दी बड़ी चेतावनी
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध का असर अब भारत की रसोई से आगे टेलीकॉम सेक्टर तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर LPG की कमी लंबी चली, तो मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं पर भी दबाव पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल सेवाएं सामान्य हैं, लेकिन इंडस्ट्री ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई में रुकावट जारी रही, तो टेलीकॉम टावर और डेटा सेंटर के संचालन पर दबाव बढ़ सकता है।
LPG की कमी से टेलीकॉम सेक्टर की बढ़ी चिंता
बताया जा रहा है कि LPG की कमी का असर (LPG Shortage Impact on Telecom) अब टेलीकॉम सेक्टर पर भी पड़ सकता है। दरअसल, कई टेलीकॉम टावर और डेटा सेंटर बिजली कटौती के समय बैकअप के रूप में जनरेटर का इस्तेमाल करते हैं। इन जनरेटरों में कुछ जगहों पर LPG ईंधन के रूप में उपयोग होता है। टेलीकॉम विशेषज्ञों का कहना है कि,
अगर LPG की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है, तो उन इलाकों में दिक्कतें बढ़ सकती हैं जहां बैकअप सिस्टम LPG आधारित है। फिलहाल देश में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से काम कर रही हैं और किसी तरह की बड़ी समस्या सामने नहीं आई है। लेकिन अगर सप्लाई की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो टेलीकॉम कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और कुछ क्षेत्रों में सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
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टेलीकॉम टावर निर्माण भी हो सकता है प्रभावित
LPG की सप्लाई रुकने से टेलीकॉम टावर निर्माण से जुड़ी फैक्ट्रियों पर भी असर पड़ सकता है। DIPA के अनुसार,
कई गैल्वनाइजेशन प्लांट्स में जिंक को पिघली हुई अवस्था में बनाए रखने के लिए लगातार तापमान बनाए रखना जरूरी होता है। अगर ईंधन की आपूर्ति बाधित रहती है, तो इन प्लांट्स को कम तापमान पर काम करना पड़ सकता है। लंबे समय तक ऐसा जारी रहने पर प्लांट्स को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में पिघले हुए जिंक को हटाना और प्लांट को दोबारा शुरू करना काफी समय लेने वाली प्रक्रिया होती है। इसका सीधा असर टेलीकॉम टावर निर्माण पर पड़ सकता है और नई टावर परियोजनाओं में देरी हो सकती है।
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने से रुकी सप्लाई
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (DIPA) के मुताबिक,
सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। इसी कारण तेल कंपनियों ने टेलीकॉम टावर बनाने वाली मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को LPG की आपूर्ति रोक दी है।
हालांकि यह फैसला आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है, लेकिन इसका असर टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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DIPA का कहना है कि,
लगातार और भरोसेमंद टेलीकॉम कनेक्टिविटी आज के समय में बेहद जरूरी है। मोबाइल कॉल और इंटरनेट के अलावा 5G नेटवर्क, राष्ट्रीय सुरक्षा, आपातकालीन सेवाएं, डिजिटल गवर्नेंस, ऑनलाइन बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवाएं और टेलीमेडिसिन जैसी कई महत्वपूर्ण सेवाएं इसी पर निर्भर करती हैं।
सरकार से जल्द समाधान की मांग
इस बीच DIPA ने दूरसंचार विभाग से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि 5 मार्च 2026 के आदेश से टेलीकॉम टावर निर्माण इकाइयों को छूट दी जाए और LPG तथा LNG की सप्लाई जल्द बहाल की जाए।
इसके साथ ही बिजली मंत्रालय और राज्य बिजली कंपनियों से यह भी आग्रह किया गया है कि टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबाइल टावरों को प्राथमिकता के आधार पर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बिजली आपूर्ति में रुकावट आती है और टावरों को डीजल जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ता है, तो इससे परिचालन लागत और बढ़ सकती है।
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गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी प्रभावित किया है। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। आमतौर पर वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत इसी मार्ग से होता है।
ऐसे में अगर इस क्षेत्र में किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। हालांकि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के पास कुछ वैकल्पिक पाइपलाइन मार्ग मौजूद हैं, जिनके जरिए तेल को समुद्री मार्ग से बचाकर दूसरे बंदरगाहों तक पहुंचाया जा सकता है।
फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक तनाव रहने पर वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
