तेल महंगा, रुपया कमजोर… अब भारतीय एयरलाइंस पर मंडरा रहा ₹18,000 करोड़ का संकट
Indian Aviation Crisis: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारत के विमानन सेक्टर पर दिखने लगा है। तेल की कीमतों में उछाल, कमजोर होता रुपया और बंद होते हवाई रास्तों ने एयरलाइंस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञ अब चेतावनी दे रहे हैं कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो भारतीय एयरलाइंस को इस साल हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया संकट का भारतीय विमानन पर बड़ा असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब भारत की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर साफ दिखाई देने लगा है। कई देशों ने सुरक्षा कारणों से अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है, जिसकी वजह से भारत से जाने वाली अनेक उड़ानों को या तो रद्द करना पड़ा या उन्हें लंबा रास्ता लेना पड़ा।
बताया जा रहा है कि 28 फरवरी से 2 मार्च के बीच भारत में 1100 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं, जिनमें बड़ी संख्या दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाली थीं। गौरतलब है कि भारत की लगभग आधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पश्चिम एशिया के रास्ते से गुजरती हैं, इसलिए वहां हवाई क्षेत्र बंद होने से विमान कंपनियों को अपने मार्ग बदलने पड़े।
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हालांकि धीरे-धीरे कुछ उड़ानें फिर शुरू हो रही हैं, लेकिन कई विमान अब युद्ध प्रभावित इलाकों से बचते हुए लंबा रास्ता ले रहे हैं, जिससे यूरोप और अमेरिका जाने वाली यात्राओं का समय दो से चार घंटे तक बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए दोहरी मुश्किल बन गई है, क्योंकि पहले से ही पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र भारतीय विमानों के लिए बंद है।
तेल महंगा होते ही एयरलाइंस की बढ़ी टेंशन
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब भारतीय एयरलाइंस की जेब पर पड़ने लगा है। दरअसल विमान चलाने में सबसे बड़ा खर्च एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF का होता है, जो कुल खर्च का करीब 30 से 40 प्रतिशत तक होता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद ATF भी महंगा हो गया है।
मार्च 2026 में इसकी कीमत करीब 96,638 रुपये प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई, जो फरवरी के मुकाबले लगभग 6 प्रतिशत ज्यादा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमत सिर्फ 1 डॉलर प्रति बैरल भी बढ़ती है, तो कई बड़ी एयरलाइंस का सालाना खर्च सैकड़ों करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है।
ऊपर से कई उड़ानों को अब लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है, जिससे विमान ज्यादा ईंधन जला रहे हैं और एक ही फ्लाइट पर एयरलाइंस को पहले से कहीं ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
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कमजोर रुपया भी बना बड़ी चुनौती
भारतीय एयरलाइंस इस समय सिर्फ महंगे ईंधन से ही नहीं, बल्कि कमजोर होते रुपये से भी जूझ रही हैं। हाल के दिनों में रुपया डॉलर के मुकाबले 92 के स्तर से नीचे पहुंच गया, जिसने एयरलाइंस के खर्च को और बढ़ा दिया है। हालांकि आम यात्रियों को इसका असर तुरंत महसूस नहीं होता, लेकिन कंपनियों के लिए यह बड़ी चुनौती बन जाता है।
बता दें कि विमान किराए पर लेने, इंजन के पार्ट्स खरीदने और कई तकनीकी सेवाओं का भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। ऐसे में जब रुपया कमजोर होता है, तो एयरलाइंस को वही भुगतान करने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रुपया सिर्फ 1 प्रतिशत भी गिरता है, तो एयरलाइंस के मुनाफे पर लगभग 5 से 6 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है। यही वजह है कि मौजूदा हालात में कई एयरलाइंस पर आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है।
इस साल भारी नुकसान का अनुमान
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब आम यात्रियों की यात्रा योजनाओं पर भी दिखने लगा है। कई रूट प्रभावित होने के कारण कुछ जगहों पर फ्लाइट टिकट की कीमतें बढ़ने लगी हैं, जबकि कई यात्रियों को अचानक यात्रा रद्द होने की परेशानी झेलनी पड़ी है। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो विदेशों में फंस गए या जिनकी वापसी की उड़ानें रद्द हो गईं।
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यात्रियों की मदद के लिए सरकार ने विशेष कंट्रोल रूम बनाया है, हालांकि सीमित हवाई रास्तों और बदले हुए रूट के कारण अतिरिक्त उड़ानें शुरू करना आसान नहीं है। इसी बीच रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में भारतीय विमानन उद्योग को करीब 17,000 से 18,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है।
हालांकि पहले उम्मीद थी कि आने वाले वर्षों में स्थिति सुधरेगी, लेकिन मध्य पूर्व में जारी तनाव ने इस उम्मीद को कमजोर कर दिया है और विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो एयरलाइंस के लिए आने वाले महीने काफी मुश्किल भरे हो सकते हैं।
