आसमान में खतरे के बीच दिल्ली में सुरक्षित उतरा इंडिगो विमान, मौत के साए से लौटे 161 यात्री
दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर शनिवार सुबह अचानक हड़कंप मच गया, जब हवा में उड़ रही इंडिगो फ्लाइट में तकनीकी खराबी की खबर आई। कुछ ही मिनटों में ‘फुल इमरजेंसी’ घोषित कर दी गई और सभी की नजरें इस फ्लाइट पर टिक गईं। हालांकि हालात बेहद तनावपूर्ण थे, लेकिन पायलट की सूझबूझ ने बड़ा हादसा टाल दिया। आखिर क्या हुआ उस फ्लाइट में और कैसे बची 161 यात्रियों की जान, आइए जानते हैं पूरी कहानी।
क्या हुआ था IGI एयरपोर्ट पर?
बता दें कि विशाखापत्तनम से दिल्ली आ रही इंडिगो की फ्लाइट में अचानक इंजन फेल होने की आशंका जताई गई। जैसे ही यह सूचना एयर ट्रैफिक कंट्रोल को मिली, तुरंत रनवे 28 पर ‘फुल इमरजेंसी’ घोषित कर दी गई।
हालांकि, पायलट ने स्थिति को संभालते हुए विमान को सुरक्षित दिशा में रखा और एयरपोर्ट प्रशासन ने भी तेजी से सभी आपातकालीन इंतजाम कर दिए। इस दौरान रनवे के आसपास हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था ताकि किसी भी अनहोनी से निपटा जा सके।
कैसे हुई सुरक्षित लैंडिंग?
गौरतलब है कि इमरजेंसी प्रोटोकॉल के बीच विमान ने सुबह 10 बजकर 54 मिनट पर रनवे 28 पर सुरक्षित लैंडिंग की। लैंडिंग के वक्त रनवे पर पहले से ही दमकल की गाड़ियां और एम्बुलेंस तैनात थीं। विमान में कुल 161 यात्री सवार थे, जिन्हें लैंडिंग के तुरंत बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
सभी यात्रियों की मेडिकल जांच की गई और इसके बाद उन्हें उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया। हालांकि, इंडिगो की तकनीकी टीम अब इस घटना की जांच कर रही है कि आखिर इंजन में यह खराबी कैसे आई और इसे भविष्य में कैसे रोका जा सकता है।
क्या यह सिर्फ एक घटना है या बड़ा संकेत?
हालांकि, यह घटना अकेली नहीं मानी जा रही है। संसद की स्थायी समिति की एक हालिया ऑडिट रिपोर्ट ने विमानन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच 754 कमर्शियल विमानों का ऑडिट किया गया। इनमें से 377 विमानों में बार-बार तकनीकी खामियां पाई गईं, जो कुल संख्या का लगभग 50 प्रतिशत है।
गौरतलब है कि समिति ने पहले ही चेतावनी दी थी कि भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को एक ‘फंडामेंटल रीसेट’ की जरूरत है। आज की यह इमरजेंसी लैंडिंग उसी चिंता को और मजबूत करती है। हालांकि, इस घटना (IGI Airport Emergency Landing) में कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह साफ संकेत है कि विमानन सुरक्षा को लेकर अब और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
