25 जनवरी से सुरू हो गई है केतु की उल्टी चाल, इन 2 राशियों पर अचानक टूट सकता है संकट
Ketu Gochar 2026: ज्योतिष में केतु को रहस्यमयी और पाप ग्रह माना जाता है, जिसकी चाल हमेशा उल्टी होती है। खास बात है कि जब केतु किसी नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश करता है, तो उसका असर बेहद तीव्र और अचानक देखने को मिलता है। हालाकी इस बार का केतु गोचर 2026 कुछ राशियों के लिए बड़े झटके लेकर आ सकता है।
गौरतलब है कि 25 जनवरी की सुबह केतु ने ऐसा ही एक परिवर्तन किया है, जिससे दो राशियों के जातकों को खास सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
Ketu Gochar 2026: कब और कहां हुआ केतु का गोचर?
ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, पाप ग्रह केतु ने 25 जनवरी 2026 को सुबह करीब 7 बजे पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम पद में गोचर किया है। यहां केतु 29 मार्च 2026 तक विराजमान रहेंगे। इसके बाद केतु माघ नक्षत्र के चतुर्थ पद में प्रवेश कर जाएंगे।
ज्योतिषविदों का कहना है कि केतु जब किसी नक्षत्र के पहले चरण में होता है, तो उसका प्रभाव अचानक और बिना चेतावनी के सामने आता है। ऐसे समय में जिन लोगों की कुंडली में केतु प्रतिकूल स्थिति में हो, उन्हें जीवन में अचानक संकट, मानसिक उलझन और आर्थिक झटके झेलने पड़ सकते हैं।
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क्यों माना जा रहा है यह गोचर खतरनाक?
केतु एक ऐसा ग्रह है जो भ्रम, अचानक बदलाव, वैराग्य और अनजानी परेशानियों का कारक माना जाता है। खास बात है कि केतु संकेत नहीं देता, बल्कि सीधे परिणाम देता है। यही वजह है कि इस दौरान व्यक्ति को समस्या आने से पहले कोई आभास तक नहीं होता।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का संबंध सुख-सुविधा, रिश्तों और भौतिक जीवन से होता है। ऐसे में केतु का यहां होना इन क्षेत्रों में उथल-पुथल मचा सकता है। ज्योतिष के अनुसार, इस गोचर का सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव मिथुन और वृश्चिक राशि पर पड़ सकता है।
मिथुन राशि के लिए परीक्षा की घड़ी बनेगा केतु का गोचर
केतु का नक्षत्र परिवर्तन मिथुन राशि के जातकों के लिए आसान नहीं रहने वाला है। इस दौरान जीवन में अचानक अस्थिरता आ सकती है और हालात तेजी से बदलते नजर आ सकते हैं। जिस इंसान पर आप पूरा भरोसा कर रहे हैं, वही आपको किसी बड़ी परेशानी में डाल सकता है।
अब तक जिन निवेशों से फायदा मिल रहा था, वे अचानक नुकसान देने लग सकते हैं। कारोबार से जुड़े लोगों को भी अनचाहा घाटा झेलना पड़ सकता है। भ्रम की स्थिति बढ़ेगी और जल्दबाजी में लिए गए फैसले मुश्किलें और बढ़ा सकते हैं, हालाकी इस समय जोखिम उठाने से बचना ही समझदारी होगी।
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क्या करें उपाय?
राहत के लिए भगवान गणेश की नियमित पूजा करें, बुधवार के दिन उन्हें दूर्वा घास चढ़ाएं और पशु-पक्षियों को रोटी या अनाज खिलाएं, इससे केतु के नकारात्मक प्रभाव कुछ हद तक कम हो सकते हैं।
वृश्चिक राशि पर केतु का असर
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए केतु का यह नक्षत्र परिवर्तन थोड़ा चुनौती भरा रह सकता है। इस दौरान आपके खर्च अचानक बढ़ सकते हैं, जिससे जेब पर दबाव और मन में चिंता बनी रह सकती है। धन से जुड़े काम आसानी से बनते नजर नहीं आएंगे और पैतृक संपत्ति से जुड़ा कोई मामला तनाव की वजह बन सकता है।
जल्दबाजी में किया गया निवेश फैसला नुकसान बढ़ा सकता है, इसलिए सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी होगा। बातचीत की कमी के चलते रिश्तों में भी दूरी महसूस हो सकती है। गौरतलब है कि इस समय चोट या दुर्घटना का भी योग बन रहा है, ऐसे में वाहन चलाते वक्त अतिरिक्त सावधानी बरतें।
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क्या करें उपाय?
उपाय के तौर पर शनिवार को शनि देव की पूजा करें, शनि मंदिर में सरसों तेल और काले तिल का दीपक जलाएं, वहीं मंगलवार को हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करना शुभ रहेगा।