महिंद्रा को मिला अब तक का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर, इंडोनेशिया जाएंगी 35 हजार स्कॉर्पियो पिकअप

महिंद्रा को मिला अब तक का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर, इंडोनेशिया जाएंगी 35 हजार स्कॉर्पियो पिकअप

Mahindra Export Order: भारतीय ऑटो सेक्टर से एक बड़ी और खुशखबरी सामने आई है। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने पूरी इंडस्ट्री का ध्यान खींच लिया है। कंपनी को अब तक का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर मिला है, जिसमें 35,000 स्कॉर्पियो पिकअप गाड़ियां (Mahindra 35000 Scorpio Pik Up Deal) शामिल हैं। यह डील न सिर्फ महिंद्रा के लिए मील का पत्थर है, बल्कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग ताकत को भी ग्लोबल स्तर पर मजबूती देती है।

इंडोनेशिया के साथ 35 हजार स्कॉर्पियो पिकअप की डील?

बुधवार को महिंद्रा एंड महिंद्रा ने एक बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि कंपनी को अब तक का सबसे बड़ा निर्यात ऑर्डर मिला है। इस ऐतिहासिक डील के तहत महिंद्रा 35 हजार स्कॉर्पियो पिकअप वाहनों की सप्लाई इंडोनेशिया को करेगी। इन वाहनों की डिलीवरी साल 2026 में की जाएगी और यह सौदा कंपनी के वित्त वर्ष 2025 में किए गए कुल निर्यात से भी ज्यादा बड़ा है, यानी एक ही ऑर्डर में महिंद्रा ने पूरे साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

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ये वाहन इंडोनेशिया की कंपनी एग्रीनास पंगन नुसंतारा को दिए जाएंगे और इन्हें वहां सरकार के बड़े प्रोजेक्ट कोपरासी देसा / केलुरहान मेराह पुतिह के तहत इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि यह सिर्फ गाड़ियों की सप्लाई नहीं है, बल्कि इस पहल का मकसद देश की सहकारी व्यवस्था को मजबूत करना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को नई रफ्तार देना है, जिससे गांवों और किसानों को सीधा फायदा मिल सके।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मिलेगा बड़ा सपोर्ट

कंपनी के मुताबिक स्कॉर्पियो पिकअप वाहनों का इस्तेमाल इंडोनेशिया में गांव स्तर की सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया जाएगा, हालांकि यह सिर्फ गाड़ियां देने तक सीमित नहीं है। ये वाहन किसानों की उपज को सीधे बाजार तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे, जिससे गांवों में परिवहन व्यवस्था बेहतर होगी, किसानों को समय पर सही बाजार मिलेगा और फसल की बर्बादी भी काफी हद तक कम होगी।

इससे इंडोनेशिया का खेत से बाजार तक का पूरा सिस्टम बदल सकता है। वहीं महिंद्रा ने यह भी साफ किया है कि एग्रीनास पंगन नुसंतारा के साथ मिलकर वह स्थानीय सहकारी समितियों, जिन्हें वहां कोपरासी कहा जाता है, को मजबूत और भरोसेमंद वाहन उपलब्ध कराएगी। हालाकी इस साझेदारी का असली मकसद किसानों और उपभोक्ताओं के बीच की दूरी को कम करना है, ताकि गांव धीरे-धीरे आत्मनिर्भर आर्थिक केंद्र के रूप में उभर सकें।

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गांवों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार होंगी महिंद्रा की गाड़ियां

महिंद्रा ने साफ किया है कि,

इस ऑर्डर के तहत सप्लाई की जाने वाली सभी स्कॉर्पियो पिकअप गाड़ियां भारत के नासिक प्लांट में ही बनाई जाएंगी और इन्हें पूरी तरह गांवों की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है। इन वाहनों को खराब और कच्ची ग्रामीण सड़कों, खेतों तक जाने वाले पगडंडी जैसे रास्तों और भारी सामान ढोने की जरूरत को ध्यान में रखकर खास तौर पर कस्टमाइज किया गया है।

गौरतलब है कि इससे फर्स्ट माइल लॉजिस्टिक्स को बड़ा फायदा मिलेगा, यानी किसानों की फसल खेत से सीधे सहकारी समितियों तक पहुंचाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा। हालांकि असर सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांवों के अंदर सामान की आवाजाही भी तेज और ज्यादा असरदार हो सकेगी, जिससे ग्रामीण कारोबार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

क्यों अहम है ये डील?

महिंद्रा को मिला यह सौदा इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि यह कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा निर्यात ऑर्डर है, जो वित्त वर्ष पच्चीस में किए गए पूरे निर्यात से भी बड़ा है। इस डील से भारत की मैन्युफैक्चरिंग ताकत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलेगी और यह साफ संदेश जाएगा कि भारतीय कंपनियां अब वैश्विक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।

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हालांकि इसका असर सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर भी सीधा और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जो इसे और ज्यादा महत्वपूर्ण बनाता है।

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