किम जोंग उन का खतरनाक टेस्ट, ‘सुपर पावर’ मिसाइल से क्या अब अमेरिका होगा निशाने पर?
उत्तर कोरिया ने एक बार फिर ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। किम जोंग उन की निगरानी में हुआ यह नया मिसाइल इंजन परीक्षण सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि बड़ा रणनीतिक संकेत माना जा रहा है। सवाल यह है कि क्या अब अमेरिका सीधे निशाने पर है? हालांकि, इस परीक्षण के बाद वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई बहस छिड़ गई है और तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
उत्तर कोरिया ने किया शक्तिशाली सॉलिड-फ्यूल इंजन का परीक्षण
किम जोंग (Kim Jong Un) के नेतृत्व में उत्तर कोरिया ने एक उच्च क्षमता वाले सॉलिड-फ्यूल इंजन का सफल परीक्षण (North Korea Missile Test) किया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, यह ‘ग्राउंड जेट टेस्ट’ था, जिसका मकसद नई पीढ़ी की मिसाइलों को और ताकतवर बनाना है।
गौरतलब है कि इस परीक्षण का निरीक्षण खुद किम जोंग उन ने किया। इस नए इंजन में आधुनिक कंपोजिट कार्बन फाइबर सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसकी मजबूती और क्षमता दोनों बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि,
इस तरह के इंजन भविष्य की लंबी दूरी की मिसाइलों के लिए बेहद अहम होते हैं, खासकर इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी ICBM के लिए।
इंजन की बढ़ी ताकत, मल्टीपल वॉरहेड की तैयारी?
इस नए इंजन की अधिकतम क्षमता 2,500 किलोटन मापी गई है, जो पिछले साल सितंबर में हुए 1,971 किलोटन के परीक्षण से काफी ज्यादा है। यह बढ़ोतरी केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि एक बड़े सैन्य इरादे की ओर इशारा करती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस ताकत का उपयोग एक ही मिसाइल में कई वॉरहेड लगाने के लिए किया जा सकता है।
यानी एक मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकती है। बता दें कि ऐसी तकनीक अमेरिका जैसे देशों की मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। क्योंकि एक साथ कई वारहेड को रोकना बेहद मुश्किल होता है।
यह परीक्षण उस समय सामने आया है जब अमेरिका (USA) और उसके सहयोगी देशों के साथ उत्तर कोरिया (North Korea) के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं। किम जोंग उन ने हाल ही में अपने देश को “अपरिवर्तनीय परमाणु शक्ति” घोषित किया था। उन्होंने अमेरिका पर वैश्विक आक्रामकता का आरोप लगाते हुए मध्य पूर्व के हालात का भी जिक्र किया।
उनका कहना है कि देश की सुरक्षा के लिए सैन्य ताकत को मजबूत करना जरूरी है। गौरतलब है कि सॉलिड-फ्यूल मिसाइलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें लॉन्च करने में ज्यादा समय नहीं लगता। तरल ईंधन वाली मिसाइलों के मुकाबले इन्हें तुरंत तैयार किया जा सकता है, जिससे इन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है।
यह परीक्षण उत्तर कोरिया के पांच साल के सैन्य विस्तार कार्यक्रम का हिस्सा बताया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह तकनीक और आगे बढ़ती है, तो यह वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
