2029 तक भारतीय बेड़े में शामिल होंगे राफेल-M के पहले 4 विमान, देश की नौसेना के ताकत में होगा इजाफा

2029 तक भारतीय बेड़े में शामिल होंगे राफेल-M के पहले 4 विमान, देश की नौसेना के ताकत में होगा इजाफा

Rafale-M Delivery: भारतीय नौसेना की ताकत में अब एक बड़ा अपग्रेड जुड़ने वाला है। Navy Day 2025 से पहले नौसेना प्रमुख एडमिरल दीनश के त्रिपाठी ने साफ किया कि राफेल-M का पहला सेट 2029 तक हमारे बेड़े में शामिल हो जाएगा। खास बात है कि यह वही फाइटर जेट है जिसकी चर्चा महीनों से दुनिया की रक्षा हलचल में हो रही है। अब सवाल है की इसके आने से समुद्री शक्ति में कितना बड़ा बदलाव आएगा?

क्या है Rafale-M?

Rafale-M इस तरह तैयार किया गया लड़ाकू विमान है जो सीधे युद्धपोत से उड़ान भर सकता है और उसी पर सुरक्षित लैंडिंग भी कर सकता है। बता दें कि अप्रैल 2025 में भारत और फ्रांस ने 26 राफेल-एम विमानों (22 एकल-सीटर और 4 दो-सीटर) की बड़ी सरकारी डील पर हस्ताक्षर किए थे, जिसकी कीमत करीब ₹64,000 करोड़ बताई गई है।

खास बात है कि इस सौदे में प्रशिक्षण, सिम्युलेटर, हथियार और 5 साल की परफॉर्मेंस-आधारित देखभाल जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएँ भी शामिल हैं। गौरतलब है कि यह पूरा कदम इसलिए उठाया गया ताकि INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत जैसे देश के दोनों विमानवाहक पोतों पर अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की पूरी तैनाती हो सके।

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वहीं, मिग-29के ने भले ही वर्षों तक नौसेना की जिम्मेदारी निभाई हो, लेकिन अब उनकी क्षमता और तकनीक पुरानी पड़ने लगी है। राफेल-एम आने से नौसेना को ज्यादा ताकतवर रडार, बेहतर हथियार और मल्टी-रोल क्षमता मिलेगी, जिससे कैरियर एयर विंग की शक्ति पहले से कई गुना बढ़ जाएगी।

TEDBF के लिए क्या है प्लान?

गौरतलब है कि नौसेना फिलहाल राफेल-एम को एक अस्थायी समाधान मान रही है, क्योंकि असली लक्ष्य घरेलू ट्विन-इंजन डेक-बेस्ड फाइटर (TEDBF) को तैयार करना है। नौसेना की योजनाओं के अनुसार TEDBF 2032-2033 के आसपास सेवा में आने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि राफेल-M अगले कुछ वर्षों तक नौसेना को तुरंत ऑपरेशनल ताकत देने वाला अंतरिम सहारा बनेगा।

Rafale-M Delivery टाइमलाइन और अंजान बिंदु

खास बात है कि 26 राफेल-एम विमानों की डिलीवरी (Rafale-M Delivery) का विस्तृत सालाना शेड्यूल अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है और यह भी तय नहीं है कि पहला स्क्वाड्रन किस एयर स्टेशन पर तैनात होगा। वहीं, प्लेटफॉर्म-विशेष भारतीय सिस्टम इंटीग्रेशन कब पूरा होगा, इसकी जानकारी भी सामने नहीं आई है।

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TEDBF की टेस्टिंग और उत्पादन समयरेखा को लेकर भी उपलब्ध डेटा सीमित है, जिससे पूरे प्रोजेक्ट को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बिंदु अभी भी अनसुलझे बने हुए हैं।

प्रभाव और रणनीतिक मायने

बता दें कि राफेल-M के आने से भारतीय नौसेना की समुद्री रणनीति को बड़ी मजबूती मिलेगी। इसके आने से कैरियर बैटल समूहों की ताकत, सीमा सुरक्षा की पकड़ और समुद्री इलाकों में भारत का प्रभुत्व और भी मजबूत होगा। खास बात है कि बदलते क्षेत्रीय हालात और पड़ोसी देशों की नौसैनिक गतिविधियों को देखते हुए यह फैसला भारत की समुद्री सक्षमता बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

लिहाजा 2029 तक पहले चार Rafale-M Delivery नौसेना के लिए सिर्फ एक तकनीकी अपडेट नहीं, बल्कि अगले दशक की समुद्री रणनीति को नया आकार देने वाला मोड़ है। गौरतलब है कि राफेल-एम और स्वदेशी TEDBF के संयोजन से आने वाले वर्षों में नौसेना की फ्लैट-टॉप क्षमता को एक बिल्कुल नई दिशा मिल सकती है।

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