2016 के बाद इस नवरात्रि बन रहा है खास संयोग, मिलेगा माँ के 9 रूपों का विशेष आशीर्वाद; जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Navratri Puja Vidhi: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) का विशेष महत्व होता है। यह पर्व देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना और उनकी शक्ति का स्मरण कराने वाला होता है। इस साल यह पर्व और भी खास है क्योंकि नवरात्रि 10 दिनों की होने जा रही है। बता दें कि यह अद्भुत संयोग लगभग 9 साल बाद बन रहा है। इससे पहले ऐसा 2016 में हुआ था। Navratri 2025 इस बार 22 सितंबर, सोमवार से शुरू होकर 10 दिनों तक चलेगी। इसकी वजह चतुर्थी तिथि का दो दिन तक रहना है, जिसके कारण नवरात्रि की अवधि बढ़ गई है।
Shardiya Navratri की शुरुआत 22 सितंबर 2025, सोमवार से हो रही है। इस दिन घटस्थापना (Kalash Sthapana) की जाएगी। नवरात्रि के दौरान भक्तगण व्रत रखते हैं, मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं और नवरात्रि कथा का पाठ करते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस समय आध्यात्मिक ऊर्जा चरम पर होती है और साधना करने से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।
घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat for Ghatasthapana)
घटस्थापना Navratri का पहला और सबसे महत्वपूर्ण ritual है। इसके लिए शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस बार घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं।
- प्रातःकाल का मुहूर्त: सुबह 06:27 बजे से 08:16 बजे तक। इसकी कुल अवधि 1 घंटा 48 मिनट रहेगी।
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:07 बजे से 12:55 बजे तक। यह मुहूत्र 48 मिनट का होगा।
भक्त इनमें से किसी भी समय पर घटस्थापना कर सकते हैं।
घटस्थापना की विधि (Ghatasthapana Vidhi)
घटस्थापना के लिए सबसे पहले एक कलश लें और उसे साफ पानी और गंगाजल से भर दें। खास बात है कि कलश के अंदर थोड़ी साफ मिट्टी, जौ के दाने, पांच आम या अशोक के पत्ते और एक नारियल रखना चाहिए। इसके ऊपर लाल कपड़े में लपेटा हुआ नारियल रखकर मौली बांधें। कलश के चारों ओर फूल, अक्षत, हल्दी, लौंग, इलायची, सुपारी, कपूर और दीपक सजाएं। इसके बाद घर के मुख्य पूजा स्थल पर एक चौकी पर इस कलश की स्थापना करें और वहां मां दुर्गा की फोटो या मूर्ति स्थापित करें।
सुबह की शुरुआत: सबसे पहले सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
शुद्धिकरण: पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करके गंगाजल का छिड़काव करें ताकि वातावरण शुद्ध हो जाए।
अभिषेक: इसके बाद मां दुर्गा का अभिषेक करें। अभिषेक में गंगाजल, दूध, दही, शहद और जल का प्रयोग करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि अभिषेक से देवी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।
अर्पण: अभिषेक के बाद मां को अर्घ्य अर्पित करें। साथ ही अक्षत (साबुत चावल), ताजे फूल और सिंदूर चढ़ाएं। अक्षत लंबी आयु और स्वास्थ्य का, फूल शांति का और सिंदूर शक्ति का प्रतीक है।
पाठ: नवरात्रि के दौरान रोज कथा या दुर्गा चालीसा का पाठ अवश्य करें। इससे मन देवी की ओर केंद्रित होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
आरती और भोग: पाठ के बाद दीप और धूप जलाकर मां की आरती करें। अंत में मां को भोग लगाएं। भोग में सात्विक चीजें जैसे फल, मिठाई या हलवा शामिल करें। भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में परिवार के सभी सदस्यों में बांट दें।
नवरात्रि पूजा के लिए जरूरी सामग्री (Essential Puja Samagri List)
नवरात्रि पूजा के लिए आपको निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता पड़ेगी: गंगाजल, सुपारी, मौली, रोली, जटा वाला नारियल, लाल सूत्र, सिक्का, लाल कपड़ा, ताजे फूल, अक्षत, हल्दी, इलायची, लौंग, कपूर और आरती का सामान। इस तरह से विधि-विधान से की गई पूजा देवी दुर्गा को अत्यंत प्रिय होती है और भक्तों को उनकी असीम कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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