20 साल बाद अब नए समझौते पर लगी मुहर, Stellantis और Tata Motors ने साइन किया नया डील
Stellantis Tata Motors Partnership: भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। Stellantis और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने अपनी 20 साल पुरानी साझेदारी को और मजबूत करते हुए एक नया समझौता किया है। हालांकि यह सिर्फ एक MoU नहीं, बल्कि आने वाले समय में भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस डील का मतलब क्या है और इसका फायदा किसे मिलने वाला है।
20 साल की साझेदारी का नया अध्याय
स्टेलेंटिस और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (Tata Motors Passenger Vehicles) ने अपनी 20 साल पुरानी मैन्युफैक्चरिंग साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए एक नए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत दोनों कंपनियां भारत और कुछ चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में वाहन निर्माण, इंजीनियरिंग और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की दिशा में काम करेंगी।
यह साझेदारी फिएट इंडिया ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से संचालित हो रही है, जो दोनों कंपनियों का बराबर हिस्सेदारी वाला संयुक्त उपक्रम है।
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बता दें कि स्थापना के बाद से अब तक इस संयुक्त उपक्रम में 13,70,000 से अधिक वाहनों का निर्माण किया जा चुका है और यहां करीब 5 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। वहीं, महाराष्ट्र के पुणे के पास स्थित रांजणगांव संयंत्र की सालाना उत्पादन क्षमता 2,22,000 इकाइयों की है, जो अब सिर्फ देश तक सीमित न रहकर एक वैश्विक वाहन निर्माण केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।
कौन सी गाड़ियां बनती हैं इस प्लांट में?
ज्यादातर लोग जीप और टाटा की गाड़ियों को अलग-अलग कंपनियों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इन दोनों की कई पॉपुलर गाड़ियां एक ही रांजणगांव प्लांट में तैयार होती हैं। इस प्लांट में स्टेलेंटिस के तहत जीप कंपास, जीप मेरिडियन, जीप ग्रैंड चेरोकी (सीकेडी) और जीप रैंगलर (सीकेडी) का निर्माण किया जाता है।
वहीं टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स की ओर से टाटा नेक्सन, टाटा अल्ट्रोज और टाटा कर्व भी यहीं बनती हैं। बता दें कि यहां सिर्फ गाड़ियां ही नहीं, बल्कि इंजन, ट्रांसमिशन और ट्रैक्शन मोटर्स भी तैयार किए जाते हैं, जिन्हें बाद में वाहनों में इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि यह प्लांट घरेलू बाजार के साथ-साथ जापान और साउथ अफ्रीका जैसे देशों में गाड़ियों के एक्सपोर्ट के लिए भी एक अहम केंद्र बन चुका है।
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स्टेलेंटिस और टाटा मोटर्स ने साझेदारी पर क्या कहा?
इस मौके पर दोनों कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने अपनी बात रखी। स्टेलेंटिस एशिया पैसिफिक के मुख्य परिचालन अधिकारी ग्रेगोरी ओलिवियर ने कहा कि,
यह संयुक्त उपक्रम लंबे समय से चले आ रहे मजबूत सहयोग का प्रतीक है और इससे यह साफ होता है कि दोनों कंपनियां एक-दूसरे पर भरोसा करती हैं। आने वाले समय में ध्यान भविष्य के लिए तैयार विनिर्माण, नई तकनीकों के विकास और टिकाऊ विकास पर रहेगा।
वहीं टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी शैलेश चंद्रा ने कहा कि,
यह साझेदारी आपसी विश्वास और साझा मूल्यों पर टिकी हुई है। दोनों कंपनियां आने वाले वर्षों में इस रिश्ते को और गहराई देने और साथ मिलकर आगे बढ़ने को लेकर पूरी तरह उत्साहित हैं।
भारत कैसे बनता जा रहा है ऑटोमोबाइल सेक्टर का बड़ा केंद्र?
बता दें कि नए समझौता ज्ञापन (Stellantis Tata Motors Partnership) की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई हो, लेकिन जानकारों का मानना है कि इससे भारत की भूमिका आने वाले समय में भविष्य की मोबिलिटी योजनाओं में और मजबूत होगी। गौरतलब है कि फिएट इंडिया ऑटोमोबाइल्स पहले ही वाहन निर्माण, इंजन तकनीक और सप्लाई चेन के क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बना चुका है।
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ऐसे में स्टेलेंटिस की अंतरराष्ट्रीय तकनीकी ताकत और टाटा मोटर्स की भारतीय बाजार की गहरी समझ जब साथ आती है, तो यह साझेदारी एक बड़ा बदलाव लाने वाली साबित हो सकती है। कुल मिलाकर, स्टेलेंटिस और टाटा मोटर्स की 20 साल पुरानी साझेदारी के तहत हुआ यह नया समझौता सिर्फ दो कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत को आने वाले वर्षों में ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
