अब कचड़े से बनेगी भारत की सड़के, जानिए क्या है नितिन गडकरी का पूरा प्लान, जो बदलेगा देश का रोड नेटवर्क
Waste to Roads Initiative: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण और अनूठा विचार प्रस्तुत किया है, जिसे “Waste-to-Roads” नाम दिया गया है। इसका लक्ष्य है कि नई सड़कों के निर्माण में ठोस कचरा (solid waste) का उपयोग किया जाए। हालाँकि यह विचार नया नहीं है, लेकिन इसे अब बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना बन रही है।
मंत्री जी ने बताया कि अब तक करीब 80 लाख टन कचरे का उपयोग सड़कों में हो चुका है। उनका कहना है कि 2027 तक देश में जितना ठोस कचरा मौजूद है, वह सड़क निर्माण में प्रयोग किया जाएगा।
Waste to Roads Initiative: योजनाओं का विस्तार
भारत सरकार की इस योजना (Waste to Roads Initiative) के तहत नगर निगमों द्वारा एकत्रित प्लास्टिक, रबर और अन्य मिश्रित अपशिष्ट को सड़क निर्माण में भराव सामग्री और मिश्रण के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे न केवल कचरा निपटान की समस्या घटेगी, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों की बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी भी होगी।
केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि 2027 तक सभी राज्यों में यह तकनीक अपनाई जाए, ताकि यह एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बन सके और स्वच्छ, टिकाऊ विकास की दिशा में भारत एक कदम और आगे बढ़े।
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ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए भी बड़ी बात
नितिन गडकरी ने कहा कि आने वाले 5 वर्षों में भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री विश्व स्तर पर सबसे बड़ी बनने वाली है। अभी भारत की ऑटो इंडस्ट्री का आकार लगभग 22 लाख करोड़ रुपये का है, जो इसे तीसरे स्थान पर रखता है यानि केवल अमेरिका और चीन उसके आगे हैं। इस नए Waste to Roads Initiative से वाहन इंजीनियरिंग, कचरा प्रबंधन टेक्नोलॉजी और निर्माण कंपनियों को लाभ मिल सकता है।
मंत्री ने यह भी कहा कि- “दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों में चार पहाड़ों की उपस्थिति सड़क निर्माण के दृष्टिकोण से “अच्छा नहीं लगता” और इस दिशा में सुधार की जरूरत है।”
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बता दें की सरकार का “Waste-to-Roads initiative” देश के लिए एक सतत और पर्यावरण-अनुकूल सोच का प्रतीक है। सही नियोजन और त्वरित कार्यान्वयन से यह विचार न सिर्फ सड़क बुनियादी ढाँचे में बदलाव लाएगा, बल्कि कचरा प्रबंधन की दीर्घकालीन चुनौतियों को भी कम कर सकता है। खास तौर पर बड़े शहरों में इस तरह की पहल से मिट्टी, बजरी और अन्य निर्माण सामग्री की मांग कम हो सकती है।
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