NSE IPO 2026: सितंबर में आ सकता है ₹30,000 करोड़ का मेगा IPO, ₹5 लाख करोड़ से ज्यादा होगी वैल्यूएशन
NSE IPO 2026: भारत के शेयर बाजार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज NSE अपना IPO सितंबर में लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। अगर यह योजना तय समय पर पूरी होती है तो यह भारतीय बाजार के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल होगा और कई पुराने रिकॉर्ड भी टूट सकते हैं।
बाजार से जुड़े लोगों के मुताबिक, इस आईपीओ का आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है। ऐसे में निवेशकों के साथ-साथ पूरे वित्तीय बाजार की नजर इस पेशकश पर बनी हुई है।
कब लॉन्च होगा NSE का IPO?
करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद NSE IPO 2026 अब अंतिम चरण में पहुंचता दिख रहा है। जानकारी के अनुसार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज सितंबर में अपना बहुप्रतीक्षित आईपीओ ला सकता है। इससे पहले एक्सचेंज निवेशकों और संस्थागत खरीदारों के लिए रोडशो भी शुरू करेगा।
बताया जा रहा है कि इस आईपीओ के जरिए एनएसई की वैल्यूएशन 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह अक्टूबर 2024 में आए Hyundai Motor India के करीब 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ को भी पीछे छोड़ देगा।
गौरतलब है कि NSE ने पहली बार वर्ष 2016 में आईपीओ लाने की कोशिश की थी। हालांकि, उस समय कॉर्पोरेट गवर्नेंस और को-लोकेशन मामले से जुड़े सवालों के कारण SEBI से मंजूरी नहीं मिल सकी थी। इसके बाद एक्सचेंज ने कई सुधारात्मक कदम उठाए और नियामक के सामने कई बार अपना पक्ष रखा।
IPO में कौन बेच रहा है हिस्सेदारी?
यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा, जिसमें कंपनी नए शेयर जारी नहीं करेगी बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक कुल 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर बिक्री के लिए रखे जाएंगे, जो एनएसई की कुल इक्विटी का करीब 6 प्रतिशत है, जबकि एक्सचेंज के लगभग 1.8 लाख शेयरधारक हैं।
हिस्सेदारी बेचने वालों के विवरण कुछ इस प्रकार हैं:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| आईपीओ का प्रकार | ऑफर फॉर सेल (OFS) |
| बिक्री के लिए कुल शेयर | 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर |
| कुल इक्विटी में हिस्सा | लगभग 6% |
| कुल शेयरधारक | करीब 1.8 लाख |
| सबसे बड़ा विक्रेता | स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) – 2.48 करोड़ शेयर |
| दूसरा सबसे बड़ा विक्रेता | एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड – 1.60 करोड़ शेयर |
| अन्य प्रमुख शेयरधारक | कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) पीटीई लिमिटेड, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी |
वहीं, LIC, जिसके पास एनएसई में 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी है, इस ऑफर फॉर सेल में अपने शेयर नहीं बेचेगी। NSE के बोर्ड ने 6 फरवरी को SEBI से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिलने के बाद आईपीओ प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस पूरे इश्यू के प्रबंधन के लिए 20 मर्चेंट बैंकरों के साथ कानूनी सलाहकार और अन्य विशेषज्ञों की नियुक्ति भी की जा चुकी है।
NSE की वित्तीय स्थिति क्या कहती है?
IPO की तैयारी के बीच NSE के ताजा वित्तीय नतीजे भी चर्चा में हैं, क्योंकि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कर के बाद मुनाफा 15 प्रतिशत घटकर 10,302 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 12,188 करोड़ रुपये था, और कुल आय भी 19,177 करोड़ रुपये से फिसलकर 18,713 करोड़ रुपये पर आ गई।
हालांकि मार्च तिमाही में शुद्ध लाभ 8 प्रतिशत बढ़कर 2,871 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 2,650 करोड़ रुपये था, वहीं कुल आय भी 22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 5,360 करोड़ रुपये हो गई, जबकि एक साल पहले यह 4,397 करोड़ रुपये थी।
ऐसे में साफ है कि साल भर के आंकड़ों में कमजोरी दिखी है, लेकिन आखिरी तिमाही में कारोबार ने अच्छी रफ्तार पकड़ी है और आईपीओ के समय निवेशक कंपनी की इसी वित्तीय सेहत पर खास नजर रखेंगे।
| वित्तीय संकेतक | वित्त वर्ष 2025-26 | वित्त वर्ष 2024-25 | बदलाव |
|---|---|---|---|
| कर के बाद मुनाफा (PAT) | ₹10,302 करोड़ | ₹12,188 करोड़ | 15% की गिरावट |
| कुल आय | ₹18,713 करोड़ | ₹19,177 करोड़ | कमी दर्ज |
मार्च तिमाही (Q4) प्रदर्शन
| वित्तीय संकेतक | मार्च तिमाही FY26 | मार्च तिमाही FY25 | बदलाव |
|---|---|---|---|
| शुद्ध लाभ (PAT) | ₹2,871 करोड़ | ₹2,650 करोड़ | 8% की बढ़त |
| कुल आय | ₹5,360 करोड़ | ₹4,397 करोड़ | 22% की बढ़त |
जून में आ सकता है Jio प्लेटफॉर्म्स का ड्राफ्ट
बाजार में यह भी चर्चा तेज है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज समर्थित जियो प्लेटफॉर्म्स ने जून में अपना ड्राफ्ट पेपर दाखिल कर दिया है और अगर एक साथ ये दोनों बड़े IPO बाजार में उतरते हैं, तो भारतीय पूंजी बाजार के लिए यह वाकई ऐतिहासिक समय साबित हो सकता है। करीब दस साल की लंबी प्रक्रिया, कई नियामकीय मंजूरियों और जरूरी सुधारों के बाद NSE का यह बहुप्रतीक्षित IPO अब सितंबर में लॉन्च होने की ओर बढ़ रहा है, और अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा तो यह न सिर्फ नया रिकॉर्ड बना सकता है बल्कि निवेशकों के लिए भी बड़ा मौका लेकर आ सकता है।
