रतन टाटा, साइरस मिस्त्री या चंद्रशेखरन? किसके दौर में Tata Group का मार्केट कैप सबसे ज्यादा बढ़ा

Tata Group Market Cap: टाटा ग्रुप के शेयर बाजार में सफर को देखें तो पिछले तीन चेयरमैन के दौर में तस्वीर काफी बदली है। रतन टाटा के समय जहां समूह की सूचीबद्ध कंपनियों की संख्या 10 से बढ़कर 23 हुई, वहीं एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल में इन कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप 8.22 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 23.35 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि एक चेयरमैन का प्रदर्शन दूसरे से सीधे बेहतर रहा? जवाब इतना आसान नहीं है। कंपनियों की संख्या, लिस्टिंग और बाजार के वैल्यूएशन में हुए बदलाव को साथ रखकर इन आंकड़ों को समझना जरूरी है।
रतन टाटा के समय Tata Group का बाजार मूल्य कितना था?
रतन टाटा ने 25 मार्च 1991 को Tata Sons के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली थी। उस समय टाटा ग्रुप की 10 कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध थीं। ACE Equity के आंकड़ों के मुताबिक, 28 दिसंबर 2012 को उनके कार्यकाल के अंत तक सूचीबद्ध कंपनियों की संख्या बढ़कर 23 हो चुकी थी।
इन 23 कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप उस समय 4,72,051.69 करोड़ रुपये था। यानी करीब 4.72 लाख करोड़ रुपये। यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 1991 के आंकड़े में सिर्फ 10 सूचीबद्ध कंपनियां थीं, जबकि 2012 में इनकी संख्या 23 हो चुकी थी। इसलिए 2012 के 4.72 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप को 1991 के आंकड़े से सीधे जोड़कर पूरी तस्वीर निकालना सही नहीं होगा।
इस बढ़ोतरी में मौजूदा कंपनियों के शेयरों की वैल्यू बढ़ने के साथ उन कंपनियों का योगदान भी शामिल था जो इस दौरान सूचीबद्ध हुईं। यानी रतन टाटा के दौर में Tata Group का listed universe भी काफी बड़ा हुआ।
साइरस मिस्त्री के 4 साल की कार्यकाल में कितना बढ़ा मार्केट कैप
28 दिसंबर 2012 को साइरस मिस्त्री ने रतन टाटा के बाद Tata Sons के चेयरमैन का पद संभाला। उनके कार्यकाल की शुरुआत में Tata Group की 23 सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप 4,72,051.69 करोड़ रुपये था। 24 अक्टूबर 2016 को मिस्त्री को Tata Sons के चेयरमैन पद से हटाए जाने के समय यही आंकड़ा बढ़कर 8,29,045.55 करोड़ रुपये हो गया।
यानी करीब चार साल की इस अवधि में संयुक्त मार्केट कैप में लगभग 3.57 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। प्रतिशत के हिसाब से यह करीब 75.6 फीसदी की बढ़ोतरी थी। मिस्त्री को हटाए जाने के बाद रतन टाटा ने अंतरिम चेयरमैन के रूप में Tata Sons की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद मिस्त्री और Tata Sons के बीच विवाद ने कानूनी रूप ले लिया।
मिस्त्री ने कंपनी में उत्पीड़न और कुप्रबंधन के आरोप लगाए थे। Tata Sons ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि बोर्ड का मिस्त्री पर भरोसा नहीं रहा था। मिस्त्री परिवार से जुड़ी Cyrus Investments और Sterling Investment ने भी इस मामले में कानूनी रास्ता अपनाया। मामला कई स्तरों से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और 2021 में अदालत ने मिस्त्री को हटाने के फैसले को बरकरार रखा।
एन चंद्रशेखरन के दौर में कितना हुआ टाटा ग्रुप मार्केट कैप?
साइरस मिस्त्री के बाद Tata Sons के स्थायी चेयरमैन की तलाश शुरू हुई। जनवरी 2017 में Tata Consultancy Services के तत्कालीन CEO एन चंद्रशेखरन को Tata Sons का एग्जीक्यूटिव चेयरमैन चुना गया। उन्होंने 21 फरवरी 2017 को पद संभाला। चंद्रशेखरन Tata परिवार से नहीं आते हैं। वह लंबे समय से टाटा ग्रुप से जुड़े प्रोफेशनल एग्जीक्यूटिव रहे हैं।
उनकी नियुक्ति को समूह के शीर्ष स्तर पर प्रोफेशनल मैनेजमेंट की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा गया। ACE Equity के आंकड़ों के अनुसार, जब चंद्रशेखरन ने Tata Sons की कमान संभाली, तब Tata Group की सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप 8,22,504.96 करोड़ रुपये था। 12 अगस्त 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 23,35,517.65 करोड़ रुपये हो गया।
यानी करीब 15.13 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी। प्रतिशत में देखें तो यह लगभग 184 फीसदी का उछाल है। यही वजह है कि उपलब्ध इन दो market-cap points के आधार पर चंद्रशेखरन का कार्यकाल सबसे बड़ी absolute और percentage increase दिखाता है। हालांकि, यहां भी केवल मार्केट कैप के आंकड़ों के आधार पर किसी चेयरमैन को सीधे विजेता घोषित करना सही नहीं होगा।
शेयर बाजार का मूल्यांकन कई कारणों से बदलता है और समय के साथ Tata Group की कंपनियों और कारोबारी संरचना में भी बदलाव हुए हैं। चंद्रशेखरन को पहले पांच साल के लिए नियुक्त किया गया था। फरवरी 2022 में Tata Sons के बोर्ड ने उन्हें सर्वसम्मति से दूसरी बार पांच साल के लिए नियुक्त किया। उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक है।
Tata Trusts की भूमिका और अब अगला चेयरमैन कौन?
रतन टाटा का अक्टूबर 2024 में निधन हो गया। इसके बाद नोएल टाटा को Tata Trusts का सर्वसम्मति से चेयरमैन नियुक्त किया गया। यहां Tata Trusts और Tata Sons के बीच अंतर समझना जरूरी है। दोनों के चेयरमैन पद अलग हैं। Tata Trusts के पास सामूहिक रूप से Tata Sons की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। Tata Sons Tata Group की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और समूह की कई बड़ी कंपनियों की प्रमोटर है।
अब Tata Group के सामने अगला बड़ा सवाल Tata Sons के अगले चेयरमैन को लेकर है। एन चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होगा। ऐसे में उनके उत्तराधिकारी को लेकर फैसला समूह के लिए महत्वपूर्ण होगा।
तीन चेयरमैन के दौर की तस्वीर क्या बताती है?
उपलब्ध आंकड़ों को देखें तो रतन टाटा के कार्यकाल के अंत में 23 सूचीबद्ध Tata कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप 4.72 लाख करोड़ रुपये था। साइरस मिस्त्री के कार्यकाल के अंत में यह बढ़कर 8.29 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं चंद्रशेखरन के पद संभालने के समय यह 8.22 लाख करोड़ रुपये था, जो 12 अगस्त 2026 तक 23.35 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
इस तुलना से एक बात साफ है कि टाटा ग्रुप की सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार मूल्य पिछले कई दशकों में काफी बढ़ा है। लेकिन इन आंकड़ों को केवल तीन चेयरमैन के प्रदर्शन की सीधी रैंकिंग के तौर पर देखना सही नहीं होगा। कंपनियों की संख्या, बाजार की स्थिति, कॉरपोरेट बदलाव और valuation में बदलाव भी इन आंकड़ों को प्रभावित करते हैं।
फिर भी, 12 अगस्त 2026 तक के आंकड़े एक दिलचस्प तस्वीर जरूर दिखाते हैं: एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप की सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप 8.22 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 23.35 लाख करोड़ रुपये हो चुका है।

