दुश्मन के ड्रोन का खेल खत्म करेगी भारत की ज्वाला मिसाइल, 2 रॉकेट मोटर टेस्ट ने बढ़ाई उम्मीद

Jwala Micro Missile
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Jwala Micro Missile: सीमा पर छोटे ड्रोन से पैदा होने वाला खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में भारत को कम लागत वाले और तेजी से तैनात किए जा सकने वाले काउंटर-ड्रोन हथियार की जरूरत है। इसी दिशा में भारतीय डिफेंस टेक कंपनी IG Drones ने ज्वाला माइक्रो मिसाइल के दो सॉलिड रॉकेट मोटर का सफल परीक्षण पूरा किया है।

3 अक्टूबर को हुए इस परीक्षण को ज्वाला कार्यक्रम के लिए अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, मिसाइल अभी टेस्टिंग फेज में है, लेकिन इसकी तकनीक भारत की काउंटर-ड्रोन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है।

ज्वाला माइक्रो मिसाइल क्या है?

ज्वाला माइक्रो मिसाइल (Jwala Micro Missile) को खास तौर पर दुश्मन के ड्रोन को हवा में रोकने और नष्ट करने के लिए विकसित किया जा रहा है। यह एक छोटी दूरी की इंटरसेप्टर मिसाइल है, जिसे भारतीय डिफेंस टेक कंपनी IG Drones तैयार कर रही है।

इस मिसाइल की बताई गई इंगेजमेंट रेंज 2 से 5 किलोमीटर तक है। वहीं, यह 50 मीटर से लेकर 5,000 मीटर तक की ऊंचाई पर काम करने के लिए डिजाइन की जा रही है। इसमें डुअल पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर और फिन बेस कंट्रोल जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस सिस्टम का उद्देश्य केवल मिसाइल को लॉन्च करना नहीं है। इसे सेंसर से शूटर तक काम करने वाले आर्किटेक्चर के रूप में विकसित किया जा रहा है। यानी पहले हवा में मौजूद खतरे की पहचान होगी, फिर उसे ट्रैक किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इंटरसेप्टर उसे रोकने के लिए सक्रिय होगा।

दो सॉलिड रॉकेट मोटर का टेस्ट क्यों अहम है?

किसी भी मिसाइल सिस्टम के विकास में रॉकेट मोटर का परीक्षण एक महत्वपूर्ण चरण होता है। Jwala के दो सॉलिड रॉकेट मोटर का सफल परीक्षण पूरा होने के बाद अब इस कार्यक्रम को आगे के चरण में ले जाने का रास्ता खुला है।

सॉलिड फ्यूल रॉकेट मोटर मिसाइल को जरूरी गति और ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इसके परीक्षण में सफलता Jwala के आगे के विकास के लिए अहम मानी जा रही है।

यह सिस्टम खास तौर पर ऐसे ड्रोन खतरों से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है, जो कम ऊंचाई पर तेजी से सामने आ सकते हैं। छोटे ड्रोन की संख्या अधिक होने की स्थिति में हर खतरे के खिलाफ महंगी और बड़ी मिसाइल का इस्तेमाल करना व्यावहारिक नहीं होता। ऐसे में छोटे इंटरसेप्टर की जरूरत बढ़ जाती है।

भारत के लिए क्यों जरूरी है ज्वाला मिसाइल?

ड्रोन अब केवल निगरानी तक सीमित नहीं हैं। इनका इस्तेमाल सर्विलांस, टारगेटिंग और हमले के लिए भी किया जा सकता है। खास बात यह है कि छोटे ड्रोन पहले की तुलना में ज्यादा सुलभ हो गए हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती पैदा हुई है।

किसी छोटे ड्रोन को रोकने के लिए बड़ी और महंगी मिसाइल का इस्तेमाल करने पर लागत काफी बढ़ सकती है। Jwala का उद्देश्य इसी समस्या के लिए एक छोटा और कम लागत वाला इंटरसेप्टर उपलब्ध कराना है।

इस सिस्टम में सेंसर और शूटर क्षमता को एक साथ जोड़ने की योजना है। इसका मतलब है कि सिस्टम खतरे की पहचान करने, उसे ट्रैक करने और इंटरसेप्टर के जरिए जवाब देने की प्रक्रिया में मदद कर सकता है।

Jwala की एक और खास बात बड़े पैमाने पर उत्पादन और तेजी से तैनाती की संभावना है। अगर इसका विकास और आगे के परीक्षण सफल रहते हैं, तो ऐसी तकनीक भारत की काउंटर-ड्रोन सुरक्षा व्यवस्था में उपयोगी भूमिका निभा सकती है।

इसके साथ ही यह भारत के निजी डिफेंस सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण परियोजना है। देश में ही विकसित की जा रही ऐसी तकनीक से विदेशी सिस्टम पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल Jwala Micro Missile विकास और परीक्षण के चरण में है। दो सॉलिड रॉकेट मोटर का सफल परीक्षण इसके अगले चरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले परीक्षण यह तय करेंगे कि यह सिस्टम वास्तविक परिस्थितियों में कितना प्रभावी साबित होता है।

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Bhavna Kalyani

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज
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