दिल्ली में इंटरनेट बंदी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और मेट्रो ने दाखिल किया हलफनामा

Delhi Internet Ban: दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने इस मामले में अदालत के सामने बिना शर्त माफी मांगी है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि इंटरनेट बंद करने का फैसला अदालत के आदेश की अनदेखी करने के इरादे से नहीं लिया गया था। अब इस मामले में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने भी अपना पक्ष रखा है।
दिल्ली में इंटरनेट क्यों बंद हुआ?
केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने अपने हलफनामे में बताया कि,
दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के कारण मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने का अनुरोध किया था। राजधानी में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान किसी अप्रिय घटना को रोकने और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया था।
सरकार के मुताबिक, इंटरनेट बंद करने की पाबंदी 9 अक्टूबर 2026 की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक लागू रही। यह प्रतिबंध रायसीना हिल्स के आसपास लगभग चार किलोमीटर के दायरे में लगाया गया था।
केंद्र ने अदालत को बताया कि इस फैसले का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना था। गृह सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का इरादा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करना नहीं था। हालांकि, इस मामले में अदालत पहले ही अधिकारियों से जवाब मांग चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों भेजा नोटिस?
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान मेट्रो, रेल और इंटरनेट सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। अदालत ने 9 अक्टूबर को निर्देश दिया था कि मेट्रो और रेल सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जाए। साथ ही इंटरनेट सेवाएं चालू रखने और लोगों की आवाजाही पर रोक नहीं लगाने की बात कही गई थी।
इसके बाद 11 अक्टूबर को हुई सुनवाई में अदालत ने इस बात पर सवाल उठाए कि उसके निर्देशों का पालन किस तरह किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और DMRC की चेयरपर्सन को अवमानना का नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
अब केंद्रीय गृह सचिव ने हलफनामे के जरिए बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा है कि,
अदालत के आदेश की अवहेलना करने का कोई जानबूझकर किया गया प्रयास नहीं था।
इस जवाब के बाद मामले में सरकार का पक्ष सामने आया है। हालांकि, अधिकारियों की माफी स्वीकार करनी है या नहीं, इसका फैसला अदालत को करना है।
DMRC ने हलफनामे में क्या कहा?
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की चेयरपर्सन डी. थारा ने भी सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी है। DMRC ने कहा कि 10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो का पूरा नेटवर्क बंद नहीं किया गया था। सुरक्षा कारणों से कुछ स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास पर पाबंदी लगाई गई थी।
निगम के अनुसार, शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की गई और प्रतिबंधित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी गई।
DMRC ने बताया कि,
दिल्ली मेट्रो के कुल 303 स्टेशनों में से 258 स्टेशन आम लोगों के लिए पूरी तरह खुले रहे। 10 अक्टूबर को 271 ट्रेनों के जरिए निर्धारित समय के अनुसार कुल 4,157 यात्राएं पूरी की गईं।
DMRC का कहना है कि पाबंदियां कुछ खास स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास तक सीमित थीं। रात 10 बजे प्रतिबंध हटा दिए गए थे। निगम ने अदालत से अनुरोध किया है कि उसके जवाब और माफी को ध्यान में रखते हुए अवमानना की कार्यवाही में राहत दी जाए।
अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला अहम
केंद्र सरकार और DMRC की ओर से हलफनामे दाखिल किए जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट इन जवाबों पर विचार करेगा। इस मामले में अदालत यह देख सकती है कि उसके पहले दिए गए निर्देशों का पालन किस तरह किया गया और अधिकारियों की ओर से दी गई सफाई कितनी स्वीकार्य है।
केवल माफी मांगने से अवमानना का मामला अपने आप समाप्त नहीं होता। इस पर आगे क्या कार्रवाई होगी, यह अदालत के विचार और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
फिलहाल, केंद्र सरकार और DMRC ने अपना पक्ष रख दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम इस मामले की दिशा तय करेगा।

