बिहार के 7 जिलों में मिला 14 हजार करोड़ का खजाना, बदल सकती है राज्य की अर्थव्यवस्था
बिहार की धरती के नीचे छिपा खनिज खजाना अब राज्य के भविष्य को नई दिशा दे सकता है। भागलपुर, गया, औरंगाबाद, बांका, जमुई, नवादा और रोहतास समेत 7 जिलों में दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth Elements) और कई महत्वपूर्ण खनिजों के बड़े भंडार मिलने के संकेत मिले हैं। इन संसाधनों का अनुमानित मूल्य 14,000 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन खनिजों का व्यावसायिक दोहन शुरू होता है तो बिहार में रोजगार, उद्योग और निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं, जिससे राज्य की आर्थिक तस्वीर बदलने की संभावना है।
आखिर क्यों खास है बिहार में मिली यह खोज?
दुनिया इस समय रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर बड़ी प्रतिस्पर्धा में जुटी हुई है। इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल, विंड टर्बाइन, स्मार्टफोन, कंप्यूटर चिप और रक्षा उपकरणों के निर्माण में इन खनिजों की अहम भूमिका होती है। यही वजह है कि जिन देशों के पास ऐसे संसाधन होते हैं, वे भविष्य की तकनीक और उद्योग में मजबूत स्थिति हासिल करते हैं।
भारत के पास दुनिया के बड़े रेयर अर्थ भंडारों में से एक मौजूद है, लेकिन उत्पादन के मामले में देश अभी पीछे है। ऐसे में बिहार में मिले नए भंडार राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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किन जिलों में क्या-क्या मिला?
भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणों के अनुसार नवादा, गया, जमुई, भागलपुर और बांका जिलों में दुर्लभ मृदा तत्वों के संकेत (Bihar Rare Earth Minerals Discovery) मिले हैं। इनमें नियोडिमियम, सेरियम, लैंथेनम, समेरियम, यूरोपियम, टर्बियम, यिट्रियम और स्कैंडियम जैसे मूल्यवान तत्व शामिल हैं।
इसके अलावा:
• बांका में कोबाल्ट और तांबे के संकेत मिले हैं
• जमुई में सोने की मौजूदगी के संकेत मिले हैं
• नवादा में वैनेडियम युक्त मैग्नेटाइट पाया गया है
• रोहतास में देश के सबसे बड़े पाइराइट भंडारों के साथ ग्लॉकोनाइट (पोटाश) के बड़े भंडार मौजूद हैं
• भागलपुर के बटेश्वरस्थान क्षेत्र में भी रेयर अर्थ तत्वों के संकेत दर्ज किए गए हैं
बिहार के लोगों को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर खनन शुरू होने पर हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हो सकते हैं। इससे राज्य से होने वाले पलायन में भी कमी आ सकती है।
खनिज ब्लॉकों की नीलामी से सरकार को रॉयल्टी आय मिलेगी और जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) फंड मजबूत होगा। इस राशि का उपयोग सड़क, अस्पताल, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।
वहीं रोहतास में मिले ग्लॉकोनाइट भंडार किसानों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। यह प्राकृतिक पोटाश आधारित उर्वरक माना जाता है, जो खेती की लागत कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है।
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अब आगे क्या होगा?
राज्य का खान एवं भूविज्ञान विभाग केंद्र सरकार के सहयोग से अंतिम चरण की खोज और मूल्यांकन प्रक्रिया में जुटा है। आने वाले समय में कई खनिज ब्लॉकों की व्यावसायिक नीलामी की जा सकती है। इसके बाद बड़े स्तर पर खनन गतिविधियां शुरू होने की संभावना है।
यदि परियोजनाएं तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो बिहार केवल कृषि प्रधान राज्य के रूप में नहीं बल्कि देश के उभरते खनिज और औद्योगिक केंद्र के रूप में भी अपनी नई पहचान बना सकता है।
