बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम और इंफेक्शन से बचने के 5 अचूक उपाय, हेल्थ एक्सपर्ट्स ने दी सलाह

October November Health Tips: अक्टूबर और नवंबर (गुलाबी ठंड) के महीने में मौसम बहुत तेजी से करवट लेता है। इस दौरान दिन में तेज धूप और सुबह-रात में हल्की ठंड के कारण लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है। यही वजह है कि इन दिनों वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, सूखी खांसी और श्वास संबंधी एलर्जी (Allergy) के मामले तेजी से बढ़ते हैं। आइए जानते हैं ऐसे मौसम में खुद को स्वस्थ रखने के कुछ आसान और असरदार तरीके।
बदलते मौसम में स्वस्थ रहने के 5 आसान उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अपनी दैनिक दिनचर्या और खानपान में थोड़े से बदलाव करके आप इस बदलते मौसम (Season Change) में खुद को और अपने परिवार को पूरी तरह सेहतमंद रख सकते हैं।
1. डाइट में शामिल करें इम्यूनिटी बढ़ाने वाली चीजें
बदलते मौसम में शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी की जरूरत होती है। इसके लिए सबसे पहले अपने खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। रोजाना की डाइट में ऐसी चीजें शामिल करें, जिनसे शरीर को जरूरी विटामिन और पोषक तत्व मिल सकें।
संतरा, अमरूद, मौसमी और आंवला जैसे फलों में विटामिन-सी पाया जाता है। ये शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकली और कद्दू को भी भोजन का हिस्सा बनाएं।
सुबह गुनगुने पानी के साथ नींबू या तुलसी-अदरक की चाय लेना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि, केवल किसी एक फल या पेय से इम्यूनिटी मजबूत नहीं होती। इसके लिए संतुलित और पौष्टिक भोजन करना जरूरी है।
ये भी पढ़ें: सुबह उठते ही पीते हैं जूस? इन 4 विकल्पों के फायदे जान लें, एक में छिपा है बड़ा खतरा!
2. शरीर को रखें हाइड्रेटेड
ठंड का मौसम शुरू होते ही बहुत से लोग पानी पीना कम कर देते हैं। उन्हें प्यास भी कम महसूस होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शरीर को पानी की जरूरत नहीं है। पर्याप्त पानी नहीं पीने से डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
शरीर को सामान्य तरीके से काम करने के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। इसलिए दिनभर थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। सामान्य या गुनगुना पानी, दोनों ही अच्छे विकल्प हैं।
इसके अलावा अपनी डाइट में सब्जियों का सूप, छाछ और हर्बल टी भी शामिल कर सकते हैं। इससे शरीर में तरल पदार्थों की कमी पूरी करने में मदद मिल सकती है। पानी की मात्रा अपनी उम्र, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य के अनुसार रखें।
3. मौसम के हिसाब से पहनें कपड़े
अक्टूबर और नवंबर में दिन और रात के तापमान में अंतर देखने को मिलता है। दोपहर में धूप के कारण गर्मी महसूस होती है, जबकि सुबह और रात में ठंड बढ़ जाती है। ऐसे में अचानक तापमान बदलने पर शरीर को परेशानी हो सकती है।
इसलिए इस मौसम में कपड़ों की लेयरिंग करना बेहतर रहता है। यानी एक मोटे कपड़े की जगह जरूरत के हिसाब से हल्के कपड़ों की कई परतें पहनें। सुबह घर से निकलते समय हल्की जैकेट, स्टोल या श्रग अपने साथ जरूर रखें।
अगर आप बाइक से सफर करते हैं तो ठंडी हवा से बचने के लिए कान और सीने को ढककर रखें। तापमान के अनुसार कपड़े बदलने से ठंड से होने वाली परेशानी से बचने में मदद मिल सकती है।
4. साफ-सफाई और एलर्जी का रखें ध्यान
मौसम बदलने के साथ हवा में धूल, परागकण और प्रदूषण के संपर्क में आने से कुछ लोगों को एलर्जी की समस्या हो सकती है। खासकर अस्थमा और धूल से एलर्जी वाले लोगों को इस दौरान ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
बाहर से घर लौटने के बाद हाथों को साबुन से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं। इससे हाथों के जरिए फैलने वाले संक्रमण का खतरा कम करने में मदद मिलती है।
घर के बेडरूम, पर्दे, चादर और कालीन की नियमित सफाई भी जरूरी है। इन जगहों पर धूल जमा होने से एलर्जी की परेशानी बढ़ सकती है। वहीं, अगर आपको धूल या प्रदूषण से एलर्जी है तो भीड़भाड़ वाले इलाकों में N-95 मास्क पहनना उपयोगी हो सकता है।
ये भी पढ़ें: सुबह खाली पेट भीगे चने खाना सेहत के लिए वरदान या नुकसान? खाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें
5. नींद और योग को बनाएं दिनचर्या
अच्छी सेहत के लिए केवल खानपान ही नहीं, बल्कि पर्याप्त नींद और शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। कम सोने से शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है और संक्रमण से लड़ने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेने की कोशिश करें।
इसके साथ सुबह के समय 20 से 30 मिनट तक टहलना या हल्की एक्सरसाइज करना फायदेमंद हो सकता है। योग और प्राणायाम को भी अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।
अनुलोम-विलोम जैसे अभ्यास और नियमित वॉक शरीर को सक्रिय रखने में मदद करते हैं। हालांकि, सांस से जुड़ी बीमारी होने पर व्यायाम या प्राणायाम करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
बदलते मौसम में हल्की सर्दी-जुकाम या खांसी होना आम बात हो सकती है, लेकिन हर बार इसे सामान्य वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। अगर बुखार 101 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा है और तीन दिन तक बना रहता है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
इसके अलावा सांस लेने में परेशानी, छाती में भारीपन, लगातार तेज सिरदर्द या बलगम में खून आने जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
मौसम खराब होने या बारिश की संभावना होने पर घर से निकलने से पहले मौसम का हाल भी देख लें। जरूरत पड़ने पर छाता या रेनकोट साथ रखें और खराब मौसम में बिना जरूरत बाहर जाने से बचें।

