ईबोला वायरस के कीलर वर्ज़न ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, WHO ने जारी की इंटरनेशनल हेल्थ चेतावनी
Ebola Virus Outbreak: अफ्रीका में एक बार फिर खतरनाक Ebola Virus ने चिंता बढ़ा दी है। WHO ने कांगो और युगांडा में फैल रहे नए बुंडीबुग्यो स्ट्रेन को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। सबसे डराने वाली बात यह है कि इस स्ट्रेन के लिए अभी कोई खास वैक्सीन मौजूद नहीं है। तेजी से फैलने वाले इस वायरस के मामले बड़े शहरों तक पहुंचने लगे हैं। जानिए आखिर कितना खतरनाक है यह संक्रमण, कैसे फैलता है और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं।
ईबोला वायरस का नया रूप कितना खतरनाक?
अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में ईबोला वायरस का नया स्ट्रेन तेजी से चिंता बढ़ा रहा है। इस बार संक्रमण बुंडीबुग्यो स्ट्रेन की वजह से फैल रहा है, जिसे ईबोला वायरस का अलग और खतरनाक प्रकार माना जाता है। यह स्ट्रेन पहली बार साल 2007-08 में युगांडा के बुंडीबुग्यो इलाके में सामने आया था, जहां 100 से ज्यादा लोग संक्रमित हुए थे और कई मरीजों की मौत हो गई थी।
अब एक बार फिर इसी वायरस ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। कांगो के इटुरी प्रांत में यह 17वीं बार ईबोला का प्रकोप देखा गया है, लेकिन इस बार सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई खास वैक्सीन या तय दवा मौजूद नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि,
बुंडीबुग्यो स्ट्रेन, जैरे स्ट्रेन जितना घातक नहीं माना जाता, फिर भी यह तेजी से फैल सकता है और गंभीर हालात पैदा कर सकता है।
ईबोला वायरस आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है, इसलिए संक्रमित इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। WHO समेत कई स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि संक्रमण को बड़े स्तर पर फैलने से रोका जा सके।
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Ebola Virus Symptoms: शरीर में दिखें ये संकेत तो तुरंत हो जाएं सतर्क
ईबोला वायरस के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य फ्लू या वायरल बुखार जैसे लगते हैं, इसलिए लोग शुरुआत में इसे नजरअंदाज कर देते हैं। संक्रमित व्यक्ति को अचानक तेज बुखार, तेज सिरदर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, कमजोरी और बहुत ज्यादा थकान महसूस हो सकती है। हालांकि कुछ दिनों बाद बीमारी तेजी से गंभीर रूप लेने लगती है।
मरीज को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गले में खराश जैसी दिक्कतें शुरू हो सकती हैं। गंभीर हालत में आंखों, मसूड़ों या शरीर के अन्य हिस्सों से खून निकलना भी शुरू हो सकता है। कई मामलों में सांस लेने में परेशानी और शरीर के अंगों के काम करना बंद करने जैसी स्थिति भी बन जाती है।
डॉक्टरों के अनुसार संक्रमण के 2 से 21 दिनों के भीतर इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, उल्टी या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है। खास बात यह है कि यह हवा या पानी से नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित शव को छूना भी बेहद खतरनाक माना जाता है।
Ebola Virus के आम लक्षण
- अचानक तेज बुखार आना
- सिरदर्द और शरीर दर्द
- कमजोरी और थकान
- उल्टी और दस्त
- पेट दर्द और गले में खराश
- मसूड़ों या आंखों से खून आना
- सांस लेने में परेशानी
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बचाव के लिए क्या करें?
- संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से बचें
- बार-बार साबुन से हाथ धोएं
- जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें
- लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
- संक्रमित क्षेत्र से आने वाले लोगों पर नजर रखें
क्या Ebola Virus का इलाज संभव है?
ईबोला वायरस का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन फिलहाल दुनिया के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है, क्योंकि इसके लिए अभी तक कोई खास वैक्सीन या पक्की एंटीवायरल दवा मौजूद नहीं है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि मरीज को बचाया नहीं जा सकता। डॉक्टर समय पर इलाज और सही देखभाल से कई मरीजों की जान बचाने में सफल हो रहे हैं।
इलाज के दौरान शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी पूरी की जाती है। जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन सपोर्ट, ब्लड ट्रांसफ्यूजन और बुखार-दर्द की दवाएं भी दी जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि,
अगर संक्रमित व्यक्ति को जल्दी अस्पताल में भर्ती कर अलग रखा जाए तो उसके ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
World Health Organization और स्थानीय स्वास्थ्य एजेंसियां संक्रमण रोकने के लिए लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं। कांगो और युगांडा के कई इलाकों में संपर्क ट्रेसिंग और सुरक्षित दफन प्रक्रिया पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
संक्रमण से बचने के लिए जरूरी सावधानियां
- बार-बार साबुन से हाथ धोएं
- संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से बचें
- जंगली जानवरों और उनके मांस से दूरी रखें
- बुखार या कमजोरी होने पर तुरंत जांच कराएं
- एयरपोर्ट और सीमा क्षेत्रों पर स्क्रीनिंग को गंभीरता से लें
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। सही समय पर पहचान और इलाज से इस खतरनाक वायरस को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
