ईरान के परमाणु ठिकानों का राज बताने पर मिलेगा करोड़ों का इनाम, अमेरिका ने किया बड़ा ऐलान

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ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सरकार ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी देने वाले लोगों के लिए 20 मिलियन डॉलर (करीब 200 लाख डॉलर) तक के इनाम का ऐलान किया है। इसके साथ ही जानकारी देने वालों को दूसरी जगह बसाने की सुविधा भी मिल सकती है।

यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ईरान के साथ बातचीत आगे बढ़ाने या सैन्य कार्रवाई तेज करने का विकल्प मौजूद है। वहीं, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगने के बाद इस युद्ध को लेकर राजनीतिक दबाव भी बढ़ गया है।

ईरान के परमाणु ठिकानों और वैज्ञानिकों पर अमेरिका की नजर

अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि,

अमेरिकी विदेश विभाग के ‘रिवार्ड्स फॉर जस्टिस’ (Rewards for Justice) कार्यक्रम के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देने वालों को 20 मिलियन डॉलर तक का इनाम दिया जा सकता है।

इस इनाम के लिए केवल परमाणु ठिकानों की जानकारी ही नहीं, बल्कि वहां इस्तेमाल होने वाले उपकरणों, तकनीक और इससे जुड़े लोगों के बारे में जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी। इसमें परमाणु वैज्ञानिकों और इस क्षेत्र में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों की जानकारी भी शामिल है।

अमेरिका ने यह भी कहा है कि,

योग्य जानकारी देने वाले व्यक्ति को आर्थिक इनाम के साथ दूसरी जगह सुरक्षित रूप से बसाने की सुविधा मिल सकती है।

हालांकि, अधिकतम 20 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर जानकारी देने वाले व्यक्ति को इतनी ही रकम मिलेगी।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी दावा कर चुके हैं कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में इस नए इनाम की घोषणा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर अमेरिका अब ईरान के परमाणु ठिकानों और उनसे जुड़ी गतिविधियों के बारे में किस तरह की अतिरिक्त जानकारी जुटाना चाहता है।

मध्यावधि चुनाव में हार के बाद ट्रंप के सामने बढ़ी मुश्किल

अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इन चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है। चुनावी नतीजों के पीछे ईरान के साथ जारी युद्ध और बढ़ती ईंधन कीमतों को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है।

इस युद्ध का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण तेल की आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दबाव पड़ा है। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आम लोगों से लेकर कारोबार तक देखने को मिला है।

चुनाव के बाद ट्रंप के बयानों में भी बदलाव दिखाई दिया है। कभी वह ईरान के खिलाफ और कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देते हैं, तो कभी कहते हैं कि दोनों देशों के बीच समझौता हो सकता है।

एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी हार के बाद ट्रंप के सामने युद्ध को आगे बढ़ाने या बातचीत के जरिए समाधान निकालने का दबाव है। हालांकि, शुक्रवार को ईरान के क़ेश्म द्वीप के पास अमेरिकी सेना की ओर से सीमित सैन्य कार्रवाई किए जाने की खबर भी सामने आई। इससे साफ है कि बातचीत की कोशिशों के बावजूद तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

कतर के जरिए समझौते की कोशिश

दूसरी तरफ, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। कतर ने ईरान के अधिकारियों के सामने कुछ नए प्रस्ताव रखे हैं, जिनका मकसद दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद दूर करना है।

रॉयटर्स की 5 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने कतर के माध्यम से अमेरिका को परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक प्रस्ताव भी भेजा है। अमेरिकी प्रशासन इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तें पूरी हुए बिना बातचीत शुरू करने के पक्ष में नहीं है।

बातचीत से पहले ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं शर्तें

ईरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी प्रतिबंध हटाना, उसके फ्रीज किए गए आर्थिक संसाधनों को वापस करना और युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा देना शामिल है। इसके अलावा ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी खत्म करे और क्षेत्र में जारी सैन्य कार्रवाई रोकी जाए। इसमें लेबनान में इजरायल की कार्रवाई खत्म करने की मांग भी शामिल है।

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वहीं, अमेरिका चाहता है कि किसी भी शुरुआती समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा शामिल हो। यही दोनों देशों के बीच बातचीत की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है। दूसरी तरफ, ईरान के अधिकारी अपनी शर्तों पर कायम हैं।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रंप प्रशासन कतर के प्रस्तावों के जरिए समझौते की दिशा में आगे बढ़ता है या ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज करता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

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