24 घंटे का अल्टीमेटम! अमेरिका ने ईरान को दी खुली चेतावनी, नहीं माने तो होगा बड़ा एक्शन
Hormuz Strait US Warning: हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर तेज हो गया है। अमेरिका ने ईरान को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए साफ कहा है कि वह सार्वजनिक रूप से सभी समुद्री मार्ग खोलने और जहाजों पर हमले रोकने की घोषणा करे, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
इस विवाद का असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों, पेट्रोल-डीजल और वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है। जानिए आखिर पूरा मामला क्या है और दुनिया की नजर इस घटनाक्रम पर क्यों टिकी हुई है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका की क्या मांग है?
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार,
ईरान को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना होगा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य के सभी शिपिंग मार्ग पूरी तरह खुले हैं और अब व्यापारिक जहाजों पर कोई हमला नहीं होगा।
यह संदेश ईरान तक सीधे और क्षेत्रीय मध्यस्थों के जरिए पहुंचाया गया है। अमेरिका का कहना है कि,
यदि ईरान इस मांग को स्वीकार नहीं करता है तो उसके पास आगे की कार्रवाई के लिए कई विकल्प मौजूद हैं।
अधिकारियों के मुताबिक,
कूटनीतिक बातचीत जारी है, लेकिन यदि जहाजों पर हमले जारी रहे तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
गौरतलब है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
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इस सप्ताह कतर और सऊदी अरब के तीन व्यावसायिक तेल टैंकरों पर हमले की घटनाएं सामने आईं। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के कुछ ठिकानों पर कार्रवाई की, जबकि जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन घटनाओं के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जून में दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम को समाप्त घोषित कर दिया।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि,
हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक रही है और समाधान की कोशिशें जारी हैं।
वहीं, ईरान ने अमेरिका से कहा है कि,
हाल में जहाजों पर हुए हमले उसकी व्यवस्था के “भटके हुए हिस्से” की वजह से हुए थे।
हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका का रुख
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा केवल समुद्री सुरक्षा तक सीमित नहीं है। अमेरिका की एक बड़ी मांग यह भी है कि ईरान अपने परमाणु सामग्री को लेकर स्पष्ट कदम उठाए। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान के पास बड़ी मात्रा में उच्च संवर्धित यूरेनियम मौजूद है।
दोनों देशों के बीच जून में हुए समझौते के तहत परमाणु मुद्दे पर 60 दिनों की बातचीत का ढांचा तय किया गया था। अमेरिका का कहना है कि,
यदि परमाणु सामग्री को लेकर सहमति नहीं बनती है तो कोई व्यापक समझौता संभव नहीं होगा।
इधर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शनिवार को ओमान का दौरा करेंगे। वहां द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ हॉर्मुज जलडमरूमध्य की मौजूदा स्थिति और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों की नजर इस बैठक पर भी टिकी हुई है क्योंकि इससे आगे की कूटनीतिक दिशा तय हो सकती है।
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हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यदि यहां तनाव बढ़ता है तो:
- कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेजी आ सकती है।
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है।
- वैश्विक शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
आगे की कूटनीति पर टिकी नजरें
ऐसे में पूरी दुनिया इस बात पर नजर रखे हुए है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल अमेरिका ने ईरान के सामने स्पष्ट शर्त रखी है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध शिपिंग की सार्वजनिक गारंटी दे।
दूसरी ओर, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता भी जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ईरान अमेरिका की मांग पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या बातचीत के जरिए तनाव कम हो पाता है।
