-35°C में भी दुश्मन पर सटीक वार, भारतीय सेना को मिले नए कामीकाज़े ड्रोन, जानिए कैसे बदलेगा युद्ध का खेल
भारत की सेना अब और भी खतरनाक और हाईटेक हो गई है। दरअसल सेना को ऐसे कामीकाज़े ड्रोन मिले हैं जो दुश्मन पर सीधा वार करते हैं और खुद को भी विस्फोट कर देते हैं। ये ड्रोन -35°C जैसी भीषण ठंड में भी काम कर सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इनकी असली ताकत और कैसे बदलेंगे युद्ध का तरीका।
भारतीय सेना को मिले स्वदेशी कामीकाज़े ड्रोन
रक्षा मंत्रालय ने गुजरात की एक डीप-टेक कंपनी InsideFPV के साथ करीब 10 करोड़ रुपये का करार किया था। इस करार के तहत कंपनी ने भारतीय सेना को सैकड़ों कामीकाज़े ड्रोन (Indian Kamikaze Drone) सप्लाई किए हैं। हालांकि, सुरक्षा कारणों से ड्रोन की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है।
यह डिलीवरी सेना की नॉर्दर्न कमांड को दी गई है, जो संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में तैनात रहती है। खास बात ये है कि यह डील इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत की गई और कंपनी ने सिर्फ दो महीने के भीतर ड्रोन की सप्लाई पूरी कर दी।
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क्या हैं इन ड्रोन की खासियत?
ये ड्रोन तकनीक के मामले में काफी एडवांस बताए जा रहे हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित गाइडेंस सिस्टम लगाया गया है, जिससे ये अपने लक्ष्य को बेहद सटीक तरीके से पहचान सकते हैं। इनकी अधिकतम स्पीड करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटा है और ये 2.5 किलो तक का पेलोड ले जा सकते हैं।
इसके साथ ही ये कामीकाज़े ड्रोन 10 किलोमीटर तक की दूरी पर ऑपरेशन कर सकते हैं और 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकते हैं। ये ड्रोन -35 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी काम करने में सक्षम हैं, जिससे इन्हें पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में तैनात करना आसान हो जाता है। इनमें वेपॉइंट नेविगेशन, मल्टी-स्टेप सेफ्टी सिस्टम और डिटोनेशन ट्रिगर जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं।
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युद्ध में कैसे आएंगे काम?
हालांकि ये कामीकाज़े ड्रोन छोटे आकार के हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल बेहद खतरनाक मिशनों में किया जा सकता है। ये दुश्मन के ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने, आतंकियों के छिपे अड्डों को खत्म करने और कठिन इलाकों में तेजी से कार्रवाई करने में मददगार होंगे। ये ड्रोन उन जगहों पर भी काम कर सकते हैं जहां GPS सिग्नल उपलब्ध नहीं होता। ऐसे में सेना को दुश्मन के अंदर तक जाकर ऑपरेशन करने में बड़ी सहायता मिलेगी।
इन ड्रोन का इस्तेमाल उन परिस्थितियों में भी किया जा सकता है जहां पारंपरिक सैन्य बलों के लिए पहुंचना मुश्किल होता है। इससे सेना को जोखिम कम करते हुए ज्यादा प्रभावी कार्रवाई करने का मौका मिलेगा। यह कदम देश में स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि सरकार अब तेजी से घरेलू कंपनियों को प्राथमिकता दे रही है।
