कभी डर का नाम थे बिहार के ये बाहुबली, अब उनके बच्चे कर रहे हैं समाज का नाम रोशन

कभी डर का नाम थे बिहार के ये बाहुबली, अब उनके बच्चे कर रहे हैं समाज का नाम रोशन

Bihar Bahubali Education: बिहार का नाम जब भी बाहुबलियों के लिए लिया जाता है, तो लोगों के मन में अपराध की तस्वीर उभर आती है। लेकिन इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है, जहां वही बाहुबली अपने बच्चों के लिए एक नई, साफ-सुथरी और शिक्षित राह तैयार करते हैं। हालाकि खुद वे अपराध की दुनिया में रहे, मगर चाहते थे कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल करें और समाज में इज्जत से जिएं।

Bihar Bahubali Education: बिहार के 3 दबंग परिवारों की दिलचस्प कहानी

ये हैं बिहार के वे बाहुबली जिन्होंने अपने बच्चों को अपराध की दुनिया से दूर रखकर अच्छी शिक्षा और सम्मानजनक जीवन दिया। इन दबंग परिवारों में कामदेव सिंह, मुन्ना शुक्ला और Sunil Pandey का नाम सामील है।

कामदेव सिंह

बेगूसराय जिले के प्रसिद्ध भूमिहार नेता कामदेव सिंह को लोग गरीबों का मसीहा मानते थे, हालांकि पुलिस की नजर में वे ‘तस्कर सम्राट’ थे। कहा जाता है कि 1980 में पुलिस कार्रवाई के दौरान वे गंगा नदी में कूद गए थे। मगर खास बात यह है कि उन्होंने अपने बेटे राज कुमार सिंह को अपराध से दूर रखा।

राज कुमार ने दिल्ली के रामजस कॉलेज से स्नातक किया (Bihar Bahubali Education) और एक सफल व्यवसायी बने। 2020 में वे लोजपा से विधायक चुने गए और इस बार जदयू के टिकट पर मटिहानी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। यह दिखाता है कि शिक्षा इंसान की पहचान बदल सकती है।

ये भी पढ़ें: चुनाव में तेजस्वी का नया दाव, बाहुबली नेता सूरजभान सिंह थामेंगे RJD का हाथ, भूमिहार वोट बैंक पर टिकी है नजर

डॉ. विजय कुमार शुक्ला (मुन्ना शुक्ला)

डॉ. विजय कुमार शुक्ला, जिन्हें लोग मुन्ना शुक्ला के नाम से जानते हैं, अपराध की दुनिया में एक बड़ा नाम रहे हैं। वे उम्रकैद की सजा काट रहे हैं, लेकिन गौरतलब है कि उन्होंने 2012 में जेल में रहते हुए हिंदी साहित्य में पीएचडी (Munna Shukla Bihar Bahubali Education) की उपाधि हासिल की।

मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला ने पिता के कहे रास्ते पर नहीं, बल्कि शिक्षा की राह पकड़ी। उन्होंने दिल्ली के डीपीएस आरकेपुरम से स्कूलिंग की, फिर बेंगलुरु के एलायंस यूनिवर्सिटी से बीए-एलएलबी, और लंदन की लीड्स यूनिवर्सिटी से एलएलएम की डिग्री प्राप्त की। अब वे अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभालने और न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में हैं।

सुनील पांडेय

डॉ. नरेन्द्र कुमार पांडेय उर्फ सुनील पांडेय की गिनती भी बिहार के नामी बाहुबलियों में होती रही है। हालांकि जेल में रहते हुए उन्होंने भगवान महावीर की अहिंसा पर पीएचडी (Sunil Pandey Bihar Bahubali Education) की। यह उनके भीतर के बदलाव की निशानी थी। उन्होंने अपने बेटे विशाल प्रशांत को दिल्ली के इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाया।

विशाल राजनीति में कदम रखते ही भाजपा से विधायक बने। उनकी पत्नी ऐश्वर्या राज ने जून 2025 में ‘मिसेज बिहार’ का खिताब जीतकर इस परिवार की नई पहचान बनाई। ऐश्वर्या न केवल उच्च शिक्षित हैं बल्कि राज्य स्तरीय बास्केटबॉल खिलाड़ी भी रह चुकी हैं।

ये भी पढ़ें: JDU की पहली उम्मीदवार सूची जारी, नीतीश कुमार ने उतारे 3 बाहुबली, इन 57 चेहरों पर लगा दांव

शिक्षा से बदली बाहुबलियों के अगली पीढ़ी की सोच

यह कहना गलत नहीं होगा कि इन बाहुबलियों ने अपनी गलतियों से सबक लिया। उन्होंने अपने बच्चों को वही राह नहीं दी जिस पर खुद चले थे। खास तौर पर शिक्षा के महत्व (Bihar Bahubali Education) को समझते हुए उन्होंने अपने परिवार को सम्मानजनक जीवन दिया। बिहार के इन उदाहरणों से यह बात साफ होती है कि शिक्षा न सिर्फ जिंदगी बदलती है बल्कि समाज की सोच को भी नया आकार देती है।

ऐसे ही और महत्वपूर्ण खबरों को अपने फोन पर पाने के लिए, जुड़िए हमारे साथ

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें