ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए रखीं 3 बड़ी शर्तें, अमेरिका-इजरायल से मांगा हर्जाना और सुरक्षा की गारंटी

Iran Conditions to End War
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मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध लगातार गंभीर होता जा रहा है। संघर्ष के 13वें दिन अब एक बड़ा मोड़ सामने आया है। ईरान ने पहली बार साफ शब्दों में बताया है कि आखिर किन शर्तों पर यह युद्ध रोका जा सकता है। ईरान के राष्ट्रपति ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रही इस जंग को खत्म करने के लिए तीन अहम शर्तें माननी होंगी। अब सवाल यह है कि आखिर ये शर्तें क्या हैं, क्या इन्हें माना जाएगा और यह युद्ध अभी कितना लंबा खिंच सकता है?

युद्ध खत्म करने के लिए ईरान की तीन शर्तें (Iran Conditions to End War)

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि उनका देश शांति चाहता है, लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी शर्तों को मानना होगा।

उन्होंने बताया कि,

युद्ध को समाप्त करने का एकमात्र रास्ता यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पहले ईरान के वैध अधिकारों को स्वीकार करे। इसके अलावा युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए हर्जाना दिया जाए।

वहीं तीसरी शर्त के तौर पर ईरान ने भविष्य में किसी भी तरह के सैन्य हमले को रोकने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी की मांग की है। ईरान का आरोप है कि यह युद्ध अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई से शुरू हुआ। इसलिए तेहरान का कहना है कि शांति तभी संभव है जब इन मुद्दों का समाधान किया जाए।

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ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उन्होंने रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत कर शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

अमेरिका का दावा, युद्ध में बढ़त हासिल

दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि,

अमेरिका इस संघर्ष में पहले ही जीत की स्थिति में पहुंच चुका है। अमेरिकी सैनिक अभी क्षेत्र में तैनात रहेंगे। सेना तब तक वापस नहीं लौटेगी, जब तक अभियान पूरी तरह पूरा नहीं हो जाता।

गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले किए थे। इसके बाद से पूरे क्षेत्र में लगातार हमले और जवाबी हमले हो रहे हैं। युद्ध के अब तक के दौर में करीब 1200 लोगों के हताहत होने की खबर सामने आ चुकी है। इससे मध्य पूर्व की स्थिति और अधिक तनावपूर्ण बन गई है।

तेल आपूर्ति पर असर, भारत की रूस से खरीद बढ़ी

इस युद्ध का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। वैश्विक तेल बाजार भी इससे प्रभावित हुआ है। ईरान के तेल टैंकरों पर हमलों और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात प्रभावित होने से तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। इसके कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है।

तेल की कमी की आशंका के बीच भारत ने रूस से तेल आयात बढ़ा दिया है। व्यापारिक सूत्रों और जहाज ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार मार्च के पहले 11 दिनों में रूस से भारत का तेल आयात काफी बढ़ गया है। संघर्ष शुरू होने से पहले भारत की रूस से तेल खरीद करीब 8 लाख से 10 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान था। हालांकि हालिया हालात के बाद यह बढ़कर लगभग 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई है।

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कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स कंपनी के जहाज ट्रैकिंग डेटा से भी संकेत मिलता है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात प्रभावित होने के कारण भारत जैसे देशों ने वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका और बड़ा असर पड़ सकता है। इससे तेल की कीमतों में और उछाल आने की आशंका भी जताई जा रही है।

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