बक्सर: सर्विस रिवॉल्वर के साथ युवक गिरफ्तार, पुलिस वर्दी में युवती संग दबदबा बनाने पहुंचा था थाने
बक्सर में रविवार दोपहर ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसने खुद पुलिसकर्मियों को भी चौंका दिया। नगर थाना परिसर में एक महिला अपने मामले को लेकर पहुंची, लेकिन उसके साथ खड़ा वर्दीधारी युवक सबका ध्यान खींच रहा था। वह पुलिस की वर्दी में था, कमर पर सर्विस रिवॉल्वर टंगी थी और अंदाज़ बिल्कुल बॉडीगार्ड जैसा।
पहली नज़र में सब सामान्य लगा, लेकिन ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को उसकी गतिविधियों में कुछ असामान्य दिखा। खास बात है की पूछताछ शुरू होते ही कहानी बदल गई। युवती के मामले में दबाव बनाने की कोशिश कर रहा यह युवक ज्यादा देर तक अपनी पहचान छुपा नहीं सका और कुछ ही मिनटों में नगर थाना में उसकी असलियत सामने आ गई।
पूछताछ में खुली परमजीत की पोल
जैसे ही पुलिस अधिकारियों ने युवक से उसकी पोस्टिंग, पद और विभागीय जानकारी से जुड़े सवाल किए, वह घबरा गया। शुरुआत में उसने खुद को पुलिसकर्मी बताया, लेकिन वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। स्थिति को भांपते हुए महिला चुपचाप थाना परिसर से निकल गई, जबकि युवक वहीं बैठा रह गया।
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सख्ती से पूछताछ करने पर युवक ने अपना नाम परमजीत सिंह, पिता मनीष कुमार, निवासी गणपत गांव, थाना हिलसा, जिला नालंदा बताया।यहीं उसकी कहानी उलझ गई। युवक ने स्वीकार किया कि वह वास्तविक पुलिसकर्मी नहीं है। उसने बताया कि वर्दी और पिस्तौल उसके चाचा की है।
चाचा की वर्दी और सरकारी पिस्तौल लेकर पहुँचा थाना
पूछताछ में सामने आया कि उसके चाचा अमित अभिषेक आरा जिले के एससी-एसटी थाना में पीटीसी पद पर तैनात हैं। युवक ने कबूल किया कि वही वर्दी और सर्विस रिवॉल्वर उसने इस्तेमाल की। युवक महिला के साथ नवानगर भी गया था, जहां विपक्षी पक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश की गई।
इसके बाद वे दोनों बक्सर नगर थाना पहुंचे। हालाकी पुलिस की सतर्कता के कारण मामला तुरंत पकड़ में आ गया। अधिकारियों ने मौके पर ही सरकारी हथियार जब्त कर लिया।
पुलिस की सख्ती और कानूनी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज की। युवक परमजीत सिंह और उसके चाचा अमित अभिषेक के खिलाफ केस दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई (Buxar Fake Constable Arrest) शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है कि वर्दी और सरकारी हथियार का दुरुपयोग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि सरकारी पिस्तौल और वर्दी का गलत इस्तेमाल कानूनन गंभीर अपराध है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। यह घटना न सिर्फ पुलिस महकमे के लिए चेतावनी है, बल्कि आम लोगों के लिए भी संदेश है कि कानून से खिलवाड़ करना आसान नहीं है।
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बता दें की पूरे मामले की जड़ एक युवती से जुड़ा प्रकरण बताया जा रहा है। महिला अपने पक्ष में कार्रवाई करवाने के लिए दबाव बनाना चाहती थी। इसी वजह से वह वर्दीधारी युवक को साथ लेकर थाना पहुंची थी, ताकि पुलिस पर प्रभाव डाला जा सके। हालाकी पुलिस अधिकारियों की सतर्कता ने पूरी साजिश को बेनकाब कर दिया। अगर समय रहते शक न होता, तो मामला अलग दिशा ले सकता था।
क्या कहता है कानून?
कानून के अनुसार पुलिस वर्दी और सरकारी हथियार का अनधिकृत उपयोग दंडनीय अपराध है। यह न केवल धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी खतरा माना जाता है। इस मामले में पुलिस ने जो त्वरित कार्रवाई की, उससे साफ है कि विभाग ऐसे मामलों को लेकर गंभीर है।
