खाड़ी युद्ध के बीच दुनिया की टेक इंडस्ट्री पर मंडराया बड़ा खतरा, अब मोबाइल और लैपटॉप खरीदना पड़ सकता है भारी
दुनिया के एक कोने में चल रहा युद्ध अब दूसरे कोनों को भी झकझोर रहा है। खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह टेक्नोलॉजी की दुनिया तक पहुंच चुका है। बता दें कि इस युद्ध ने सेमीकंडक्टर यानी चिप उत्पादन पर सीधा खतरा पैदा कर दिया है, जो आने वाले समय में बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकता है।
खाड़ी युद्ध से ग्लोबल सप्लाई चेन पर बड़ा असर
वैश्वीकरण के इस दौर में एक जगह की घटना पूरी दुनिया को प्रभावित करती है। 28 फरवरी से खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध ने यही साबित कर दिया है। हालांकि अब तक ज्यादा चर्चा तेल की कीमतों को लेकर हो रही थी, लेकिन असली चिंता चिप इंडस्ट्री (Gulf War Semiconductor Impact) को लेकर बढ़ती जा रही है।
यह वही चिप्स हैं जो मोबाइल, कंप्यूटर, कार और कई जरूरी मशीनों में इस्तेमाल होती हैं। इस युद्ध के कारण सप्लाई चेन में बाधा आ रही है, जिससे दुनिया भर के देशों में आर्थिक असर देखने को मिल रहा है। दूर बैठे देश भी इस संकट से अछूते नहीं हैं।
दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों को बड़ा झटका
बता दें कि दक्षिण कोरिया, जो सेमीकंडक्टर व्यापार का बड़ा केंद्र है, वहां के शेयर बाजार में युद्ध शुरू होने के बाद करीब 18 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। इससे बाजार की वैल्यू में 500 अरब डॉलर से ज्यादा की कमी आई है।
वहीं ताइवान, जो दुनिया के सबसे एडवांस चिप्स बनाता है, अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। उसकी लगभग 97 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतें बाहर से पूरी होती हैं। मौजूदा हालात में होर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी की सप्लाई रुक गई है, जिससे ताइवान की चिप उत्पादन क्षमता पर खतरा मंडरा रहा है।
कच्चे माल की कमी से और गहरा सकता है संकट
सेमीकंडक्टर बनाने के लिए कई खास कच्चे माल की जरूरत होती है, जैसे ब्रोमिन और हीलियम, जिनका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। हीलियम का इस्तेमाल चिप बनाने के दौरान मशीनों को ठंडा रखने के लिए किया जाता है, जबकि ब्रोमिन का उपयोग सिलिकॉन पर सटीक डिजाइन बनाने में होता है।
विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि इन संसाधनों के लिए खाड़ी देशों पर ज्यादा निर्भरता खतरे का संकेत है। यह युद्ध उस जोखिम को अब साफ तौर पर सामने ला रहा है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो इसका असर सिर्फ ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा।
इससे उन सभी उद्योगों पर असर पड़ेगा जो चिप्स पर निर्भर हैं, जैसे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम। बता दें कि आधुनिक दुनिया की लगभग हर तकनीक चिप्स पर टिकी है, ऐसे में यह संकट और भी गंभीर हो सकता है।
