भारत में बड़ा साइबर अटैक, इंटरनेट पर लीक हुए लाखों बैंक ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड
Bank Data Leak: भारत में एक चौंकाने वाला साइबर खतरा सामने आया है। लाखों भारतीय यूजर्स के बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड इंटरनेट पर खुलेआम मिल रहे हैं। बता दें कि यह डेटा एक असुरक्षित Amazon S3 सर्वर से लीक हुआ। चिन्ता की बात ये है कि इसमें खाताधारकों के नाम, अकाउंट नंबर और ट्रांजैक्शन अमाउंट जैसी बेहद संवेदनशील जानकारी भी शामिल है। आइए जानते हैं इस पूरे मामले की पूरी कहानी।
Bank Data Leak: भारत में लाखों यूजर्स का ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड उजागर
भारत में साइबर सुरक्षा को लेकर एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। UpGuard की रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त के आखिर में रिसर्चर्स ने एक असुरक्षित Amazon S3 सर्वर पर करीब 2.73 लाख PDF फाइलें खोजीं, जिनमें लाखों भारतीय ग्राहकों के बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड मौजूद थे। सोचने वाली बात है कि ये डेटा ज्यादातर NACH (National Automated Clearing House) से जुड़ा था, जिसका इस्तेमाल वेतन ट्रांसफर, लोन EMI, बिजली-पानी के बिल और अन्य नियमित भुगतानों के लिए होता है।
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रिपोर्ट के अनुसार यह डेटा कम से कम 38 बैंकों और वित्तीय संस्थानों से संबंधित था। सबसे ज्यादा दस्तावेजों में Aye Finance का नाम सामने आया, जबकि देश के सबसे बड़े बैंक SBI का नाम भी कई रिकॉर्ड्स में मिला। हालांकि यह अभी साफ नहीं हो पाया है कि किस बैंक से कितने ग्राहकों का डेटा प्रभावित हुआ। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना भारत में डेटा सुरक्षा के स्तर पर गंभीर सवाल खड़े करती है और ऐसे मामलों से बचने के लिए बैंकों को अपने डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करना होगा।
NPCI और SBI का क्या है बयान?
बता दें कि इस बड़े Bank Data Leak मामले की जानकारी सबसे पहले Aye Finance, NPCI और अन्य संस्थानों को दी गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि शुरुआती सितंबर तक यह संवेदनशील डेटा इंटरनेट पर खुला रहा और रोज़ नई-नई फाइलें जुड़ती रहीं। बाद में CERT-In (भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम) की मदद से सर्वर को सुरक्षित किया गया।
NPCI ने साफ कहा है कि उनके सिस्टम में कोई सेंध नहीं लगी और सब कुछ सुरक्षित है, जबकि Aye Finance और SBI जैसी बड़ी संस्थाओं ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। गौरतलब है कि यह घटना एक बार फिर भारत में डिजिटल प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी पर बड़े सवाल खड़े करती है।
आखिरकार जब लाखों लोगों का बैंक डाटा ऑनलाइन आ सकता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए न सिर्फ बैंकों को बल्कि सरकार को भी और सख्त डेटा प्रोटेक्शन कानून लागू करने होंगे।
आगे क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपने सर्वर की सिक्योरिटी को और मजबूत करना बेहद जरूरी है। ग्राहकों को भी जागरूक रहना चाहिए और अपने बैंक खातों में किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन को तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए।
खास बात है कि भारत में डेटा प्रोटेक्शन बिल पर काम चल रहा है, लेकिन अभी भी इसे और सख्त बनाने की जरूरत है ताकि ऐसे लीक दोबारा न हों। गौरतलब है कि कई देशों में पहले से ही स्ट्रिक्ट प्राइवेसी लॉ लागू हैं, भारत को भी साइबर सिक्योरिटी के मामले में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के बराबर पहुंचना होगा।
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