5 हफ्तों की जंग के बाद ट्रंप का बड़ा ऐलान, क्या अब खत्म होगा अमेरिका-ईरान टकराव?

5 हफ्तों की जंग के बाद ट्रंप का बड़ा ऐलान, क्या अब खत्म होगा अमेरिका-ईरान टकराव?

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही तनावपूर्ण स्थिति में अब राहत की खबर सामने आई है। करीब 5 हफ्तों तक चले संघर्ष के बाद अचानक युद्धविराम की घोषणा ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बताया जा रहा है कि इस फैसले के पीछे कई अहम शर्तें और रणनीतिक समझौते जुड़े हुए हैं, जिन पर आगे बातचीत हो सकती है।

ट्रंप ने किया दो हफ्ते का युद्धविराम ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने मंगलवार सुबह बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अमेरिका दो हफ्तों तक हमले रोक देगा। उन्होंने इसे दो तरफा युद्धविराम बताया और साफ किया कि यह फैसला कुछ शर्तों पर आधारित है।

ट्रंप ने कहा कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना होगा। यह इलाका दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होती है।

हालांकि, इस घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कई विशेषज्ञ इसे तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं।

ईरान ने भी दी सहमति, लेकिन बताया अपनी जीत

ट्रंप की घोषणा के कुछ समय बाद ही ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) ने भी युद्धविराम पर सहमति (Iran US War Ceasefire) जता दी। हालांकि, ईरान का रुख थोड़ा अलग नजर आया। उसने इस युद्धविराम को अमेरिका की हार करार दिया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि उनकी रणनीति सफल रही और इसी कारण अमेरिका को पीछे हटना पड़ा।

बता दें कि दोनों देशों के बीच पिछले कुछ हफ्तों में कई बार हमले और जवाबी कार्रवाई हुई, जिससे हालात काफी गंभीर हो गए थे। ऐसे में यह युद्धविराम फिलहाल तनाव कम करने की कोशिश माना जा रहा है।

बातचीत की शुरुआत के लिए 10-सूत्रीय योजना बनी आधार

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात ईरान की 10-सूत्रीय योजना को माना जा रहा है। ट्रंप ने खुद कहा कि उन्हें ईरान से यह प्रस्ताव मिला है और यह बातचीत शुरू करने के लिए एक व्यवहारिक आधार हो सकता है। ईरान की मांगों में भविष्य में अमेरिका द्वारा हमला न करने की गारंटी शामिल है। इसके साथ ही उसने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की बात कही है।

इसके अलावा ईरान ने अपने यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को मान्यता देने की मांग रखी है। साथ ही उसने सभी प्रकार के प्रतिबंध हटाने, संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसियों के प्रस्ताव खत्म करने और नुकसान की भरपाई करने की भी बात कही है।

इस योजना में क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और लेबनान में हिजबुल्लाह जैसे समूहों से जुड़े संघर्ष को खत्म करने की भी शर्त रखी गई है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि अमेरिका इन सभी शर्तों को स्वीकार करेगा या नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि इस प्रस्ताव ने बातचीत की एक नई राह खोल दी है।

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