जापान में सानाए ताकाइची की ऐतिहासिक जीत, 300 सीटों के साथ सत्ता पर मजबूत हुई पकड़
Japan Election Result 2026: जापान की राजनीति में रविवार (8 फरवरी) को ऐसा उलटफेर देखने को मिला, जिसने पूरे एशिया की रणनीतिक तस्वीर बदल दी। स्नैप चुनाव में प्रधानमंत्री साने टकाइची (Sanae Takaichi) के नेतृत्व वाली लिब्रल डेमोक्रैटिक पार्टी (LDP) ने जबरदस्त जीत दर्ज करते हुए न सिर्फ बहुमत हासिल किया, बल्कि विपक्ष को लगभग हाशिये पर धकेल दिया।
इस जीत के बाद अब टकाइची सरकार के पास ऐसे अधिकार आ गए हैं, जिनसे वह बिना बड़ी रुकावट के अहम कानून पारित कर सकती है और यही बात पड़ोसी देशों की चिंता बढ़ा रही है।
जापान में हुए स्नैप चुनाव के नतीजे आते ही सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। चुनाव परिणाम आने के कुछ ही घंटों के भीतर लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ने 233 सीटों का जादुई आंकड़ा पार कर लिया, जो साधारण बहुमत के लिए जरूरी माना जाता है। मौजूदा अनुमानों के मुताबिक, यह पार्टी 465 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में करीब 300 सीटें जीत सकती है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
अपनी गठबंधन सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी (इशिन) के साथ मिलकर प्रधानमंत्री साने टकाइची अब दो-तिहाई सुपर बहुमत की मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी हैं। इसका सीधा असर यह होगा कि सरकार अब ऊपरी सदन की बड़ी रुकावटों के बिना अहम कानूनों को तेजी से पास कर सकेगी, जिससे आने वाले दिनों में बड़े फैसलों की उम्मीद और भी बढ़ गई है।
पीएम मोदी से लेकर ट्रम्प तक विश्व नेताओं की प्रतिक्रिया
बता दें कि जापान में प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की ऐतिहासिक जीत पर दुनियाभर के नेताओं ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “ऐतिहासिक जीत” बताया और कहा कि,
भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी सानाए ताकाइची को बधाई दी और रोम और टोक्यो के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग पर जोर दिया। वहीं, ताकाइची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को उनके सार्वजनिक समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और जापान-अमेरिका गठबंधन को “असीम” बताया।
उन्होंने यह भी पुष्टि की कि वह इस वसंत में व्हाइट हाउस का दौरा करेंगी। अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बिसेंट ने कहा कि मजबूत जापान एशिया में अमेरिका की स्थिति को और सशक्त बनाता है।
शिंजो आबे के बाद LDP की सबसे बड़ी जीत
जापान में यह जीत साल 2017 के बाद सत्तारूढ़ दल एलडीपी की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है, जब पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के नेतृत्व में पार्टी ने जबरदस्त बहुमत हासिल किया था और आबे को वर्तमान प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का राजनीतिक मार्गदर्शक भी माना जाता है। समर्थकों को संबोधित करते हुए ताकाइची ने साफ कहा कि,
उनकी सरकार वित्तीय जिम्मेदारी के साथ-साथ सोच-समझकर किए गए निवेश पर जोर देगी, क्योंकि मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की भागीदारी जरूरी है। सत्ता पक्ष के लिए यह जीत ऐतिहासिक रही, लेकिन विपक्ष के लिए हालात काफी निराशाजनक साबित हुए हैं।
मध्यमार्गी सुधार गठबंधन, जिसमें संवैधानिक लोकतांत्रिक पार्टी और एलडीपी की पूर्व सहयोगी कोमेइतो शामिल थीं, को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और अनुमान है कि यह गठबंधन दो-तिहाई से अधिक सीटें गंवा सकता है। वहीं, आव्रजन विरोधी सानसेइतो पार्टी ने सीमित लेकिन ध्यान देने योग्य बढ़त दर्ज की है, जिससे संसद में उसकी मौजूदगी कुछ हद तक मजबूत हुई है।
बता दें की सानाए ताकाइची को कभी कट्टरपंथी नेता माना जाता था, लेकिन हाल के वर्षों में उन्होंने अपनी छवि बदली है और भ्रष्टाचार के मामलों व बढ़ती महंगाई से नाराज मतदाताओं के बीच एलडीपी को दोबारा मजबूती दी है। युवाओं को जोड़ने के लिए उन्होंने लोकप्रिय संस्कृति के अंदाज, सोशल मीडिया की सक्रियता और ऊंचे स्तर की कूटनीति का सहारा लिया, जिससे पार्टी को एक नया और आकर्षक चेहरा मिला है।
हालांकि इतनी बड़ी चुनावी जीत के बावजूद प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के सामने मुश्किलें कम नहीं हैं। बढ़ती महंगाई और ठहरी हुई तनख्वाहें पहले ही दो प्रधानमंत्रियों की कुर्सी ले चुकी हैं, ऐसे में जनता की उम्मीदें काफी ऊंची हैं।
ताकाइची सरकार ने हालात संभालने के लिए बड़ा आर्थिक राहत पैकेज पेश किया है और खाद्य उपभोग कर को निलंबित करने का वादा भी किया है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि जापान पर सार्वजनिक कर्ज का बोझ अब सकल घरेलू उत्पाद से दोगुना हो चुका है, जो भविष्य में गंभीर आर्थिक खतरा बन सकता है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद ताकाइची के उस बयान से भी विवाद खड़ा हो गया, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो जापान सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है। इस बयान पर बीजिंग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और रूस के साथ मिलकर सैन्य अभ्यास तक किए।
2028 तक कोई बड़ा चुनाव नहीं होने के कारण ताकाइची सरकार के पास आर्थिक सुधार, वित्तीय संतुलन और क्षेत्रीय कूटनीति पर खुलकर काम करने का मौका है, लेकिन चीन के साथ रिश्तों को स्थिर करना उनकी सबसे बड़ी कूटनीतिक चुनौती बना रहेगा। अब देखना यह होगा कि रिकॉर्ड बहुमत के साथ सत्ता में लौटी यह सरकार जनता की उम्मीदों पर कितनी खरी उतर पाती है।
