भारत का सबसे बड़ा परमाणु प्रोजेक्ट शुरू! ₹28,000 करोड़ के मेगा प्लांट का टेंडर जारी
Mahi Banswara Nuclear Project: भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा कदम उठा लिया है। करीब ₹28,000 करोड़ की लागत वाले 2800 मेगावाट क्षमता के मेगा न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। यह सिर्फ एक नया बिजली संयंत्र नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, स्वदेशी तकनीक और स्वच्छ बिजली उत्पादन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इस परियोजना से भारतीय उद्योगों और MSME के लिए भी बड़े अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
यह परमाणु प्रोजेक्ट कहां बनाया जा रहा है?
यह परियोजना (Mahi Banswara Nuclear Project) भारत के स्वदेशी प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) कार्यक्रम के तहत शुरू की जा रही है। इसके लिए 2800 मेगावाट क्षमता वाले न्यूक्लियर आइलैंड ईपीसी (Engineering, Procurement and Construction) पैकेज की बोली आमंत्रित की गई है। यह भारत के स्वदेशी PHWR कार्यक्रम के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा न्यूक्लियर आइलैंड ईपीसी पैकेज माना जा रहा है।
यह प्रोजेक्ट राजस्थान के माही बांसवाड़ा राजस्थान एटॉमिक पावर प्रोजेक्ट (MBRAPP) में विकसित किया जाएगा। यहां 700 मेगावाट क्षमता के चार स्वदेशी PHWR रिएक्टर लगाए जाएंगे। परियोजना का संचालन अनुषक्ति विद्युत निगम लिमिटेड (ASHVINI) करेगा, जो न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और NTPC लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है।
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इस संयुक्त उद्यम में NTPC की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस परियोजना में ऐसा क्या खास है, जिसे भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है?
इस मेगा प्रोजेक्ट में आखिर क्या-क्या बनाया जाएगा?
जारी किए गए न्यूक्लियर आइलैंड मेगा ईपीसी पैकेज में परियोजना के लगभग सभी महत्वपूर्ण कार्य शामिल किए गए हैं। इसके तहत इंजीनियरिंग, उपकरणों का निर्माण, आपूर्ति, सिविल निर्माण, विभिन्न प्रणालियों की स्थापना, परीक्षण और कमीशनिंग से जुड़ी सहायता प्रदान की जाएगी।
यह पैकेज चारों 700 मेगावाट क्षमता वाले परमाणु रिएक्टरों के महत्वपूर्ण न्यूक्लियर आइलैंड सिस्टम को कवर करेगा। NPCIL के अनुसार,
यह परियोजना भारत के स्वदेशी परमाणु निर्माण तंत्र को और मजबूत करेगी। साथ ही उन्नत इंजीनियरिंग क्षमताओं को बढ़ावा देने और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश की प्रगति को तेज करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
कंपनी का कहना है कि माही बांसवाड़ा परमाणु परियोजना भारत की सबसे बड़ी परमाणु अवसंरचना परियोजनाओं में से एक होगी, जिसमें भारतीय उद्योगों और MSME को बड़े पैमाने पर भागीदारी का अवसर मिलेगा।
2047 तक भारत का बड़ा लक्ष्य क्या है?
NPCIL का कहना है कि,
यह परियोजना देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ कम कार्बन उत्सर्जन वाली भरोसेमंद बेसलोड बिजली उपलब्ध कराने में भी मदद करेगी।
भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। माही बांसवाड़ा परियोजना को इस लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2025 में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी।
यह संयंत्र माही नदी के दाहिने किनारे पर, माही बजाज सागर बांध के ऊपरी हिस्से के पास 1,300 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। यहां चारों स्वदेशी 700 मेगावाट क्षमता वाले PHWR रिएक्टर स्थापित किए जाएंगे। कुल मिलाकर, ₹28,000 करोड़ का यह मेगा प्रोजेक्ट भारत के स्वदेशी परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
यदि योजना के अनुसार काम आगे बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में यह परियोजना देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ स्वच्छ बिजली उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को भी नई गति दे सकती है।
