300 किमी तक सटीक वार और बहु-मिशन क्षमता, भारत का सूर्यास्त्र बना दुश्मनों के लिए काल

300 किमी तक सटीक वार और बहु-मिशन क्षमता, भारत का सूर्यास्त्र बना दुश्मनों के लिए काल

भारत की आर्टिलरी अब पहले से कहीं ज्यादा शक्तिशाली हो गई है। भारतीय सेना ने हाल ही में सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम (Suryashtra Rocket System) अपनाया है, जो एक ही लॉन्चर से रॉकेट और ड्रोन मिशन चला सकता है। 300 किलोमीटर तक निशाने पर सटीक वार, मॉड्यूलर डिज़ाइन और बहु-मिशन क्षमता इसे सबसे खतरनाक हथियार बनाते हैं। ट्रायल में इसकी ताकत ने सभी को हैरान कर दिया।

सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम की खासियत

विशेषताविवरण
हमले की दूरी (Strike Range)150 किमी और 300 किमी तक रॉकेट दाग सकता है, जिससे छोटे रेंज के पिनाका रॉकेट और लंबी रेंज के ब्रह्मोस मिसाइल के बीच का अंतर भरता है।
मल्टी-कैलिबर क्षमता (Multi-Caliber Versatility)यह सिस्टम “यूनिवर्सल” है, यानी एक ही प्लेटफ़ॉर्म से अलग-अलग प्रकार के रॉकेट और 100 किमी तक के लूटरिंग म्यूनिशन (ड्रोन) लॉन्च किए जा सकते हैं।
अत्यधिक सटीकता (Extreme Precision)इसका CEP (Circular Error Probable) 5 मीटर से कम है, जिससे उच्च मूल्य वाले लक्ष्यों पर सर्जिकल स्ट्राइक संभव है।
शूट-एंड-स्कूट (Shoot-and-Scoot)लॉन्चर एक टैक्टिकल ट्रक पर स्थापित है, जिससे एक साथ फायर करके तुरंत दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा सकता है और दुश्मन की प्रतिक्रिया से बचा जा सकता है।
उन्नत फायर कंट्रोल (Advanced Fire Control)GPS नेविगेशन, इनर्शियल नेविगेशन और डिजिटल बैलिस्टिक कैलकुलेशन के साथ एक ही समय में कई लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता।

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बता दें कि सूर्यास्त्र इजराइल के PULS प्लेटफॉर्म पर आधारित है। ट्रायल में इसकी CEP (Circular Error Probable) केवल 5 मीटर से कम दर्ज हुई, यानी यह लगभग निशाने पर हिट कर सकता है। आमतौर पर इतनी सटीकता केवल महंगी गाइडेड मिसाइलों में होती है, लेकिन सूर्यास्त्र ने रॉकेट आर्टिलरी को भी उसी स्तर तक पहुंचा दिया। सेना ने इसे बिना देरी के अपनाने का फैसला किया।

सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुमुखी क्षमता है। एक ही लॉन्चर से 122mm, 306mm (EXTRA) और 370mm (Predator Hawk) रॉकेट चलाए जा सकते हैं। सिर्फ मॉड्यूलर पॉड बदलने से मिशन के अनुसार तुरंत तैयारी की जा सकती है।

300 किमी तक लंबी दूरी पर हमला

सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम 300 किलोमीटर तक दूरी पर हमला कर सकता है। इससे कमांडरों को बड़े पैमाने पर या सटीक हमले के विकल्प मिलते हैं। स्वदेशी पिनाका सिस्टम फिलहाल एक ही कैलिबर पर आधारित है, और लंबी दूरी वाला वर्जन Pinaka-ER अभी विकसित हो रहा है।

ट्रायल में सूर्यास्त्र ने 300 किमी तक सफल हमले किए। इसका मतलब है कि भारतीय सेना दूर बैठे दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को आसानी से निशाना बना सकती है। यह दूरी और सटीकता इसे वर्तमान पिनाका सिस्टम से कहीं अधिक सामर्थ्यशाली बनाती है।

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रॉकेट से ड्रोन तक: बहु-मिशन क्षमता

सूर्यास्त्र सिर्फ रॉकेट ही नहीं, बल्कि ड्रोन लॉन्चिंग में भी सक्षम है। ट्रायल में इसे SkyStriker जैसे ड्रोन लॉन्च करते देखा गया, जो 100 किमी तक जाकर लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं। इसका फायदा यह है कि युद्ध के दौरान अलग-अलग मिशनों को एक ही सिस्टम से पूरा किया जा सकता है।

पहले दो लॉन्चर और एक लोडिंग वाहन भारतीय सेना को दिए जा चुके हैं। गणतंत्र दिवस परेड में इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाया गया, यह साफ संकेत है कि सूर्यास्त्र अब सेना का हिस्सा बन चुका है। फिलहाल यह अस्थायी समाधान के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन इसकी क्षमता और बहुमुखी उपयोगिता इसे लंबे समय तक सेना में बनाए रख सकती है।

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