RJD से अलग होकर तेज प्रताप यादव ने बनाई नई पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’, पोस्टर में दिखे गांधी और अंबेडकर, लेकिन लालू यादव गायब

RJD से अलग होकर तेज प्रताप यादव ने बनाई नई पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’, पोस्टर में दिखे गांधी और अंबेडकर, लेकिन लालू यादव गायब

Tej Pratap New Party: राजद के भीतर उठ रही हलचल अब सियासत की नई दहलीज़ पर आकर टिक गई है। खास बात ये है की लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अचानक अपनी नई राह चुनते हुए जनशक्ति जनता दल (Janshakti Janata Dal) नाम से पार्टी लॉन्च कर दी है और चुनाव चिन्ह के रूप में उन्होंने ‘ब्लैकबोर्ड’ चुना है। पढ़िए, क्या है इस कदम की राजनीति और क्या असर पड़ेगा बिहार के चुनावी नक्शे पर।

Janshakti Janata Dal Party: पोस्टर में गांधी-अंबेडकर-लोहिया, लेकिन लालू यादव गायब!

बता दें कि लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे Tej Pratap Yadav ने अपनी नई पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ लॉन्च कर बिहार की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। खास बात है कि तेज प्रताप ने अपने X (पहले ट्विटर) हैंडल पर पार्टी का पोस्टर शेयर कर इसका चुनाव चिन्ह ‘ब्लैकबोर्ड’ घोषित किया।

पोस्टर में महात्मा गांधी, बी.आर. अंबेडकर, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण और कर्पूरी ठाकुर जैसे पांच महापुरुषों को जगह मिली है। गौरतलब है कि पोस्टर में लालू प्रसाद यादव की तस्वीर शामिल नहीं है। यह साफ संकेत देता है कि तेज प्रताप अब अपनी अलग वैचारिक पहचान गढ़ना चाहते हैं। Tej Pratap Yadav ने लिखा कि उनकी पार्टी बिहार के संपूर्ण विकास और नई व्यवस्था के ‘नव-निर्माण’ के लिए समर्पित है।

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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम RJD के वोट बैंक में सेंध लगा सकता है और तेजस्वी यादव के लिए नई चुनौती बन सकता है। बता दें की महागठबंधन में पहले से ही कांग्रेस तेजस्वी यादव को CM चेहरा घोषित नहीं कर रही थी और इस बीच अब तेज प्रताप का यह कदम बिहार चुनाव 2025 में समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।

क्या ‘जनशक्ति जनता दल’ तोड़ेगी RJD का वोट बैंक

तेज प्रताप यादव ने साफ़ कर दिया है कि उनकी पार्टी जनता की असली आवाज़ बनेगी और खासतौर पर युवाओं, किसानों और गरीब तबके के अधिकारों के लिए संघर्ष करेगी। हालाँकि, उन्होंने अभी सीटों और संभावित गठबंधन को लेकर कोई ठोस रणनीति घोषित नहीं की है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि Tej Pratap Yadav की नई पार्टी कुछ सीटों पर असर डाल सकती है, ख़ासकर उन इलाकों में जहाँ यादव परिवार का वोट बैंक मज़बूत है।

लेकिन सच्चाई यह भी है कि बिहार की सियासत में बड़ा खिलाड़ी बनने के लिए उन्हें ज़मीनी संगठन, मज़बूत कैडर और स्पष्ट चुनावी एजेंडा की ज़रूरत होगी। अगर वह ये सब हासिल कर लेते हैं तो बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में Janshakti Janata Dal महागठबंधन और एनडीए दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।

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