अमेरिका ने ईरान पर 5000 पाउंड के बंकर बस्टर से किया हमला, जानिए कितना खतरनाक है GBU-72 बम
मिडिल इस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए होरमुज जलडमरूमध्य के पास शक्तिशाली ‘बंकर बस्टर’ बम से हमला किया है। बता दें कि यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। इस कार्रवाई के बाद पूरे मिडिल इस्ट में तनाव और बढ़ गया है। ऐसे में अब सभी की नजर इस पर है कि आगे हालात किस दिशा में जाते हैं।
होरमुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी हमला
बता दें कि अमेरिका ने मंगलवार को ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमला किया। ये ठिकाने होरमुज जलडमरूमध्य के पास स्थित थे, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है। यहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई गुजरती है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन ठिकानों पर ऐसे हथियार रखे गए थे जो अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बन सकते थे। हालांकि, हाल के दिनों में ईरान ने इस इलाके में खदानें, ड्रोन और जहाज तैनात करके रास्ते को लगभग बाधित कर दिया था। इसी कारण अमेरिका ने इन ठिकानों को निशाना बनाकर हमला किया, ताकि समुद्री सुरक्षा को बनाए रखा जा सके।
क्या है GBU-72 ‘बंकर बस्टर’ बम
अमेरिका ने हाल के हमले में जीबीयू-72 एडवांस्ड 5के पेनेट्रेटर (US Bunker Buster GBU-72) नाम का बेहद ताकतवर बम इस्तेमाल किया, जिसका वजन करीब 5000 पाउंड है और इसे पहली बार साल 2021 में इस्तेमाल किया गया था। यह पुराने जीबीयू-28 जैसे बंकर बस्टर का नया और ज्यादा एडवांस रूप है।
GBU-72 की खास बात यह है कि ये सीधे जमीन के अंदर गहराई तक घुस जाता है और फिर अंदर ही जोरदार विस्फोट करता है, जिससे भूमिगत बंकर, मिसाइल ठिकाने और मोटी कंक्रीट की दीवारें भी आसानी से तबाह हो जाती हैं। बता दें कि इसकी कीमत करीब 2.88 लाख डॉलर बताई जाती है।
हालांकि यह 30,000 पाउंड वाले GBU-57 जैसे भारी बम से कम ताकतवर है, लेकिन सटीक निशाना लगाने के मामले में इसे काफी असरदार माना जाता है।
कैसे हुआ इस हथियार का परीक्षण
इस बम का परीक्षण अमेरिका में कई चरणों में किया गया था। अक्टूबर 2021 में फ्लोरिडा के एग्लिन एयर फोर्स बेस पर एक F-15E फाइटर जेट से इसे 35,000 फीट की ऊंचाई से गिराया गया था। इस परीक्षण में पहली बार इस बम की उड़ान, लोडिंग और गिराने की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
इसके अलावा, ग्राउंड टेस्ट में इसका बड़ा विस्फोट किया गया, जिसमें सेंसर और उपकरणों के जरिए इसकी ताकत को मापा गया। गौरतलब है कि इस पूरे परीक्षण में कई सैन्य इकाइयों ने मिलकर काम किया, जिससे यह हथियार पूरी तरह तैयार हो सका।
मिडिल इस्ट में हालात बेकाबू, हर तरफ बढ़ रही टकराव की आशंका
अमेरिका के हमले के बाद मिडिल इस्ट में माहौल और ज्यादा गरम हो गया है, और ईरान ने साफ कहा है कि वह इस कार्रवाई का कड़ा जवाब देगा। हालांकि, तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ था, खासकर तब जब इजरायल के हमले में ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी की मौत हुई, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए।
इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल पर मिसाइल हमले किए। इसी दौरान खाड़ी देशों ने कई ड्रोन और मिसाइल हमलों को बीच में ही रोक दिया, जहां सऊदी अरब, कुवैत और कतर अपनी-अपनी सुरक्षा में जुटे रहे। ऑस्ट्रेलिया ने भी पुष्टि की है कि ईरान का एक प्रक्षेप्य संयुक्त अरब अमीरात में उसके सैन्य मुख्यालय के पास गिरा।
इन लगातार घटनाओं से साफ है कि पूरे इलाके में अस्थिरता तेजी से बढ़ रही है और आने वाले समय में हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।
