ईरान की मिसाइलों से दहला सऊदी एयर बेस, अमेरिकी विमानों वाला ठिकाना बना निशाना

Iran attacks Prince Sultan Air Base in Saudi Arabia
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मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक और बड़ी घटना सामने आई है। खबर है कि ईरान ने सऊदी अरब के एक अहम सैन्य अड्डे को निशाना बनाया है। यह वही एयर बेस है जहां कई अमेरिकी युद्धक विमान तैनात हैं। इस हमले ने पूरे इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अब और देशों तक पहुंचता दिख रहा है।

प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर मिसाइल और ड्रोन से हमला

रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब की राजधानी रियाद के पास अल-खर्ज इलाके में स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन से हमला (Iran attacks Prince Sultan Air Base) किया गया। यह एयर बेस सऊदी अरब के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों में से एक माना जाता है।

इस एयर बेस पर कई अमेरिकी लड़ाकू विमान तैनात हैं और यहां अमेरिका के सैनिक भी मौजूद रहते हैं। इसी वजह से इस हमले को काफी गंभीर माना जा रहा है। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि,

रियाद और पूर्वी प्रांत के इलाकों में कम से कम 10 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया गया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि मिसाइल या ड्रोन से एयर बेस को कितना नुकसान पहुंचा है।

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ईरानी एजेंसी का दावा, मिसाइलों की सलामी दागी

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने दावा किया है कि उसने प्रिंस सुल्तान एयर बेस की ओर मिसाइलों की एक श्रृंखला दागी है। हालांकि सऊदी अरब की तरफ से अभी तक इस दावे की पूरी पुष्टि नहीं की गई है।

बता दें कि पिछले कुछ समय से सऊदी अरब को कई बार मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है। इससे पहले भी सऊदी अधिकारियों ने कहा था कि उन्होंने एयर बेस की ओर दागे गए मिसाइल और ड्रोन को रास्ते में ही रोक लिया था।

हालांकि सऊदी अरब अमेरिका का करीबी सहयोगी है और उसके यहां बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, लेकिन अब तक सऊदी अरब ने सीधे तौर पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं की है।

अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ा वैश्विक संकट

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर और हमले करने की चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि,

अमेरिकी हमलों से वहां काफी नुकसान हुआ है और जरूरत पड़ने पर और भी हमले किए जा सकते हैं।

हालांकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा है कि, देश का नेतृत्व पूरी तरह सुरक्षित है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

इस बीच एक और बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सामने आई है। यह वही समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस गुजरता है।

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हालांकि कुछ ईरानी जहाज अभी भी इस रास्ते से गुजर रहे हैं, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने यहां से गुजरना लगभग बंद कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार इस रास्ते में बाधा आने से वैश्विक तेल बाजार को इतिहास की सबसे बड़ी रुकावटों में से एक का सामना करना पड़ सकता है।

बताया जा रहा है कि मार्च के दौरान दुनिया की तेल आपूर्ति में करीब 8 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि मध्य पूर्व का यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ इस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा और व्यापार व्यवस्था पर भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

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