ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका, भारत के आधिकारिक नक्शे से कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज
US India Trade Agreement 2026: भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील के ऐलान ने जहां व्यापार जगत में हलचल मचा दी है, वहीं इस डील से जुड़ा एक ऐसा कदम सामने आया है जिसने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप प्रशासन की ओर से जारी भारत के आधिकारिक नक्शे ने कूटनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
हालाकी भारत की संप्रभुता पर कभी सवाल नहीं रहा, लेकिन अमेरिका का यह बदला हुआ रुख पाकिस्तान के लिए किसी झटके से कम नहीं माना जा रहा।
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के साथ आया चौंकाने वाला नक्शा
जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की जानकारी सार्वजनिक की, उसी वक्त भारत का एक आधिकारिक नक्शा भी सामने आया, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। इस नक्शे में पूरे जम्मू-कश्मीर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अक्साई चिन को साफ तौर पर भारत का अभिन्न हिस्सा दिखाया गया है।
अब तक अमेरिका अपने आधिकारिक दस्तावेजों में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर संतुलित रुख अपनाता रहा था, ताकि पाकिस्तान की आपत्तियों को जगह मिल सके। हालांकि इस बार ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के दावों को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए अलग और कड़ा संदेश दे दिया है, जिसे कूटनीतिक नजरिए से बेहद अहम माना जा रहा है।
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क्यों चर्चा में है अमेरिका का नया भारत नक्शा?
अब तक अमेरिका का विदेश विभाग और उसकी अन्य सरकारी एजेंसियां पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर सीमाओं को जानबूझकर अस्पष्ट रखती थीं, ताकि पाकिस्तान की आपत्तियों से बचा जा सके, लेकिन इस बार जारी नए नक्शे में ऐसा कुछ भी नहीं दिखता। इसमें साफ तौर पर भारत की क्षेत्रीय अखंडता को दर्शाया गया है।
हालाकी भारत हमेशा से यह कहता आया है कि उसे अपनी संप्रभुता के लिए किसी बाहरी देश की मंजूरी की जरूरत नहीं, फिर भी अमेरिका जैसे वैश्विक ताकतवर देश की ओर से ऐसा स्पष्ट संकेत पाकिस्तान के लिए मजबूत राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
इस नक्शे में सिर्फ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर ही नहीं, बल्कि अक्साई चिन को भी भारत का हिस्सा दिखाया गया है, जो लंबे समय से चीन के दावों और भारत-चीन तनाव का केंद्र रहा है। भारत का विदेश मंत्रालय पहले भी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा नक्शों में की गई गलत प्रस्तुति पर आपत्ति जता चुका है, ऐसे में ट्रंप प्रशासन का यह कदम भारत की पुरानी आपत्तियों को स्वीकार करने जैसा माना जा रहा है।
Trade Deal का टाइमिंग क्यों है खास?
इस पूरे घटनाक्रम का समय भी बेहद अहम है। एक ओर भारत और अमेरिका के रिश्ते ट्रंप प्रशासन के दौरान फिर से मजबूत हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रेड डील को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था, जो अमेरिकी सहयोगी देशों में सबसे ज्यादा था।
लेकिन अब अंतरिम ट्रेड डील के तहत इसे घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जो एशियाई देशों में सबसे कम दरों में शामिल है। इससे भारत के निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है और अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों में नई ऊर्जा आई है।
विशेषज्ञों की तीखी प्रतिक्रिया
अमेरिका की ओर से जारी इस नए नक्शे को लेकर रणनीतिक और रक्षा मामलों के जानकारों ने खुलकर अपनी राय रखी है। रिटायर्ड मेजर गौरव आर्य ने सोशल मीडिया पर लिखा कि,
नक्शे के मामले में अमेरिका पूरे नंबर पाने का हकदार है और यह वाकई शानदार कदम है।
वहीं कई लोगों का मानना है कि यह फैसला पाकिस्तान, उसके सेना प्रमुख असीम मुनीर और अमेरिका दौरों के जरिए बनाए जा रहे प्रचार पर सीधा झटका है।
पाकिस्तान की आक्रामक कूटनीति को लगा बड़ा झटका
बीते छह महीनों में पाकिस्तान की कूटनीति काफी आक्रामक रही, इस दौरान असीम मुनीर तीन बार अमेरिका पहुंचे और दो बार तत्कालीन राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात भी हुई। जून में हुई लंच मीटिंग इसलिए ज्यादा चर्चा में रही क्योंकि पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख से बिना किसी नागरिक नेतृत्व के बातचीत की थी।
हालांकि, एक वरिष्ठ पत्रकार ने साफ लिखा कि ट्रेड डील अपनी जगह है, लेकिन असली गेम बदलने वाला कदम यही नक्शा है, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत का हिस्सा दिखाया गया है।
US India Trade Agreement 2026 से भारत को क्या मिला?
बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाली यह अंतरिम व्यापार डील (US India Trade Agreement 2026) मार्च के मध्य तक साइन होने की पूरी संभावना है और इस समझौते से भारत को कई बड़े फायदे मिले हैं। इस डील के तहत स्टील, एल्युमिनियम, तांबा, दवाइयों और कार व वाहन पुर्जों जैसे क्षेत्रों में भारत को बड़ी रियायतें दी गई हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा होगा।
हालाकी कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भारत ने कोई समझौता नहीं किया है और अपनी लाल रेखा साफ तौर पर बरकरार रखी है, जिसे घरेलू किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हित में बेहद अहम माना जा रहा है।
