पहली बार ₹92 के पार फिसला रुपया, बना अब तक का सबसे निचला स्तर, क्या RBI रोकेगा ये गिरावट?

Rupee crosses 92 Hits Historic Low
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Rupee Hits Historic Low: भारतीय करेंसी मार्केट में गुरुवार को बड़ा झटका देखने को मिला, जब रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 के स्तर (rupee crosses 92) के नीचे फिसल गया। यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर रुपये पर इतना दबाव क्यों है और क्या अब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) इस गिरावट को थामने के लिए मैदान में उतरेगा?

आखिर क्यों फिसल रहा है भारतीय रुपया?

अगर आंकड़ों पर नज़र डालें, तो इस साल अब तक रुपया करीब 2 प्रतिशत कमजोर हो चुका है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय मर्चेंडाइज़ एक्सपोर्ट्स पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद से लगभग 5 प्रतिशत की रुपये में गिरावट दर्ज की गई है।

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रुपये पर दबाव डालने वाले मुख्य कारण

रुपये पर दबाव डालने वाले मुख्य कारणों में विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी, आयातकों की बढ़ती डॉलर मांग, कंपनियों की आक्रामक हेजिंग और वैश्विक व्यापार तनाव शामिल हैं। गौरतलब है कि भारत की आर्थिक नींव मजबूत है, हालाकी शॉर्ट टर्म में ये फैक्टर्स रुपये को सहारा नहीं दे पा रहे हैं और मुद्रा बाजार में बेचैनी बढ़ा रहे हैं।

ग्लोबल ट्रेड तनाव और करेंसी सेंटिमेंट का असर

बता दें कि भारतीय रुपया हाल ही में कमजोर होने का एक कारण वैश्विक व्यापार तनाव और करेंसी की धारणा भी है। अमेरिका और अन्य देशों के बीच बढ़ती व्यापारिक खटास, डॉलर की मजबूती और उभरते बाजारों से पूंजी का पलायन, इन सबने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। यह स्थिति भारत की मजबूत आर्थिक ग्रोथ के बावजूद सामने आई है, जहां मैक्रो इकॉनमी तो मजबूत है लेकिन मुद्रा कमजोर दिखाई दे रही है।

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अगर रुपया इसी तरह गिरता रहा, तो आयात महंगा होगा, महंगाई बढ़ेगी और विदेशी कर्ज पर ब्याज लागत बढ़ सकती है। हालाकि, भारतीय रिज़र्व बैंक के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है और जरूरत पड़ने पर वह बाजार में कड़ा हस्तक्षेप कर सकता है। फिलहाल निवेशक और आम लोग दोनों RBI की अगली चाल और वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।

क्या RBI अब हस्तक्षेप करेगा?

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को लोकल स्पॉट सेशन शुरू होने से पहले ही भारतीय रिज़र्व बैंक ने बाजार में दखल दिया। ट्रेडर्स का मानना है कि RBI ने डॉलर बेचकर रुपये में गिरावट की रफ्तार को धीमा करने की कोशिश की।

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एक विदेशी बैंक के ट्रेडर ने बताया कि,

RBI का मकसद किसी खास लेवल को बचाना नहीं, बल्कि ज्यादा उतार-चढ़ाव को रोकना था। RBI पहले भी साफ कर चुका है कि वह किसी तय एक्सचेंज रेट को टारगेट नहीं करता, बल्कि सिर्फ अत्यधिक अस्थिरता को कंट्रोल करने के लिए हस्तक्षेप करता है।

हालांकि, जिस तेजी से रुपया 92 के स्तर के करीब पहुंचा, उसने पॉलिसी मेकर्स और बाजार दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

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Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

Veer Rai जय जगदम्बा न्यूज के Founder और Editor हैं। उन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है। वे बिहार और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों के साथ करियर, शिक्षा, नौकरी, राजनीति, धर्म, बिजनेस, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जैसे विषयों पर गहन और शोध-आधारित लेख प्रकाशित करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल, स्पष्ट और विश्वसनीय भाषा में उपयोगी, तथ्यपरक और प्रमाणित जानकारी पहुंचाना है, जिससे लोग सही और जागरूक निर्णय ले सकें।

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