60 साल बाद वॉरेन बफेट ने दिया इस्तीफा, अब कौन संभालेगा दुनिया के सबसे बड़े निवेश कंपनी का कमान

60 साल बाद वॉरेन बफेट ने दिया इस्तीफा, अब कौन संभालेगा दुनिया के सबसे बड़े निवेश कंपनी का कमान

Warren Buffett Resignation: निवेश की दुनिया में एक ऐतिहासिक अध्याय अब अपने अंतिम मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका के दिग्गज निवेशक और “ओमाहा के ओरेकल” कहे जाने वाले वॉरेन बफेट ने बर्कशायर हैथवे (Berkshire Hathaway) के CEO पद से इस्तीफा दे दिया है।

करीब 6 दशकों तक कंपनी की कमान संभालने वाले बफेट की यह विदाई सिर्फ एक पद परिवर्तन नहीं, बल्कि कॉरपोरेट इतिहास के सबसे सफल दौर का अंत मानी जा रही है।

Warren Buffett Resignation: 60 साल का ऐतिहासिक सफर खत्म

वॉरेन बफेट ने बर्कशायर हैथवे की कमान उस वक्त संभाली थी, जब यह कंपनी एक छोटा सा टेक्सटाइल कारोबार हुआ करती थी। लेकिन उनकी दूरदर्शिता, अनुशासन और दीर्घकालिक निवेश सोच ने इस कंपनी को दुनिया की सबसे ताकतवर निवेश होल्डिंग में बदल दिया।

आज बर्कशायर हैथवे का मूल्यांकन 1 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा (करीब 90 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच चुका है। यह आंकड़ा खुद बफेट की रणनीति और धैर्य की कहानी बयां करता है। हालाकी उन्होंने CEO पद छोड़ा है, लेकिन निवेश की दुनिया में उनका असर अभी भी उतना ही मजबूत माना जा रहा है।

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अब कौन संभालेगा बर्कशायर हैथवे की कमान?

बर्कशायर हैथवे ने साफ कर दिया है कि 1 जनवरी 2026 से कंपनी की कमान ग्रेग एबेल संभालेंगे। बता दें कि ग्रेग एबेल अभी कंपनी के गैर-बीमा कारोबार के उपाध्यक्ष हैं और लंबे समय से वॉरेन बफेट के सबसे भरोसेमंद साथियों में गिने जाते रहे हैं।

एबेल ने बर्कशायर के ऊर्जा और बुनियादी ढांचा कारोबार को नई मजबूती दी है और बर्कशायर हैथवे एनर्जी को एक मजबूत, मुनाफेदार और स्थिर कारोबार में बदला है। इसी वजह से बफेट को उन पर पूरा भरोसा है कि वे आगे आने वाली चुनौतियों को समझदारी से संभाल सकते हैं।

हालांकि नेतृत्व बदलेगा, लेकिन कंपनी का मानना है कि एबेल की अगुवाई में बर्कशायर की निवेश सोच और काम करने का तरीका पहले जैसा ही बना रहेगा।

आगे की राह और बफेट की नई जिम्मेदारी

हालांकि वॉरेन बफेट मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद छोड़ रहे हैं (Warren Buffett Resignation), लेकिन वे बर्कशायर हैथवे के अध्यक्ष बने रहेंगे, जिससे कंपनी में नेतृत्व बदलाव के दौरान स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है। इस समय बर्कशायर के पास करीब 380 अरब डॉलर (लगभग 34,100 अरब रुपये) की भारी नकद राशि मौजूद है।

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गौरतलब है कि इस बड़े फंड का सही और समझदारी भरा इस्तेमाल करना आने वाले समय में नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी ग्रेग एबेल के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि इसी फैसले पर बर्कशायर की आगे की दिशा और निवेशकों का भरोसा टिका होगा।

किन कंपनियों में वॉरेन बफेट ने किया निवेश?

बता दें कि वॉरेन बफेट की एक ऐसे निवेशक हैं, जिनके एक बयान से ही बाजार की दिशा बदल जाया करती थी। Warren Buffett की अगुवाई में बर्कशायर हैथवे ने एप्पल, कोका-कोला, अमेरिकन एक्सप्रेस और बैंक ऑफ अमेरिका जैसी दिग्गज कंपनियों में बड़ा निवेश किया, जो आज भी कंपनी की ताकत बने हुए हैं।

बर्कशायर के पास कई पूरी तरह स्वामित्व वाली कंपनियां भी हैं, जिनमें BNSF रेलवे, गाइको इंश्योरेंस और बर्कशायर हैथवे एनर्जी शामिल हैं, जो लंबे समय से स्थिर कमाई का मजबूत आधार बनी हुई हैं।

Warren Buffett के सालाना शेयरधारक पत्र निवेश की दुनिया में किसी मार्गदर्शक किताब से कम नहीं माने जाते, जबकि हर साल ओमाहा में होने वाली बर्कशायर हैथवे की वार्षिक बैठक को पूंजीपतियों का वुडस्टॉक कहा जाता रहा है। इन मंचों के जरिए बफेट ने निवेशकों को धैर्य, भरोसे और लंबी अवधि की सोच का असली मतलब समझाया।

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क्या ग्रेग एबेल के आने से बदलेगी Berkshire Hathaway की पहचान?

बता दें कि निवेश विशेषज्ञों की मानें तो ग्रेग एबेल के नेतृत्व में भी Berkshire Hathaway की पहचान में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। खास बात है कि कंपनी आगे भी उसी सोच पर काम करती रहेगी, जिसे वॉरेन बफेट ने सालों तक मजबूत किया।

यानी लंबी अवधि का निवेश, मजबूत और भरोसेमंद कारोबार मॉडल और कम जोखिम के साथ स्थिर मुनाफे पर पूरा फोकस बना रहेगा। हालाकी नेतृत्व बदलेगा, लेकिन निवेश का मूल मंत्र वही रहेगा, जिससे बर्कशायर हैथवे को दुनिया की सबसे भरोसेमंद निवेश कंपनियों में गिना जाता है।

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