मिडिल ईस्ट युद्ध से हिला भारतीय शेयर बाजार, विदेशी निवेशकों ने निकाले 52,000 करोड़

Iran War Impact on Indian Stock Market
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध का असर अब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव ने ग्लोबल मार्केट के साथ भारतीय शेयर बाजार को भी झटका दिया है। युद्ध शुरू होने के बाद विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा निकालना शुरू कर दिया है, जिससे बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली है।

विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से निकाले हजारों करोड़

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी निकासी की है।

मार्च के पहले पखवाड़े में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 52,704 करोड़ रुपये यानी करीब 5.73 अरब डॉलर निकाल लिए (Iran War Impact on Indian Stock Market) हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि,

इस बिकवाली की सबसे बड़ी वजह वैश्विक अनिश्चितता है। युद्ध के कारण निवेशकों में जोखिम लेने की क्षमता कम हो गई है और वे सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं।

हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत मानी जाती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तनाव और बाजार में अनिश्चितता का असर यहां भी साफ दिखाई दे रहा है।

फरवरी में लौटा था विदेशी निवेश, लेकिन युद्ध ने बदल दिया माहौल

अगर पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों का रुख पहले से ही काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 में विदेशी निवेशकों ने 3,765 करोड़ रुपये की निकासी की थी। इसके बाद दिसंबर 2025 में 22,611 करोड़ रुपये और जनवरी 2026 में 35,962 करोड़ रुपये बाजार से बाहर निकाले गए थे।

हालांकि फरवरी 2026 में स्थिति थोड़ी सुधरी थी। उस महीने विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों में सबसे ज्यादा निवेश माना गया। लेकिन फरवरी के अंत में मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद बाजार का माहौल फिर से बदल गया और मार्च में एक बार फिर बड़े पैमाने पर बिकवाली देखने को मिल रही है।

कच्चे तेल की कीमत और रुपये की कमजोरी भी बनी वजह

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट का युद्ध है, क्योंकि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है। हाल ही में क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जिससे वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई है।

इसके अलावा भारतीय रुपये में कमजोरी भी निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित कर रही है। जब रुपये पर दबाव बढ़ता है तो विदेशी निवेशकों को अपने निवेश पर जोखिम ज्यादा महसूस होता है। इसी वजह से निवेशक फिलहाल जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं और कई बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं।

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, निवेशकों को भारी नुकसान

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का असर शेयर बाजार पर भी साफ दिखा है। पिछले सप्ताह बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। पांच कारोबारी दिनों में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स (BSE) 4,355 अंक यानी करीब 5.51 प्रतिशत टूट गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी (Nifty 50) भी 1,299.35 अंक यानी करीब 5.31 प्रतिशत गिर गया।

इस गिरावट का असर बड़ी कंपनियों पर भी पड़ा है। सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों को कुल मिलाकर 4.48 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आती है तो भारतीय बाजार धीरे-धीरे संभल सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति और वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी हुई है।

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