जंग की कीमत कितनी भारी? 14 दिन में खत्म हो सकता है NASA का सालभर का बजट
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है, जो पूरी दुनिया को चौंका रहा है। दरसल जंग पर खर्च इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि महज 2 हफ्तों में NASA के पूरे साल के बजट के बराबर पैसा खर्च हो सकता है। हालांकि, यह सिर्फ आंकड़े नहीं बल्कि अमेरिका की बदलती प्राथमिकताओं की कहानी भी है।
दो हफ्ते की जंग में खत्म हो सकता है पूरा अंतरिक्ष बजट
अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा का सालाना बजट (NASA Annual Budget) करीब 24.4 अरब डॉलर है, इसी पैसे से चांद पर इंसान को दोबारा भेजने और आगे मंगल तक पहुंचने की तैयारी चल रही है। हालांकि, ईरान के साथ जारी जंग में खर्च की रफ्तार इतनी तेज है कि यही पूरी रकम सिर्फ दो हफ्तों में खत्म हो सकती है।
बता दें कि पहले ही हफ्ते में अमेरिका करीब 11.3 अरब डॉलर खर्च कर चुका है और यह सिर्फ हथियारों और गोला-बारूद का खर्च है, इसमें सैनिकों की तैनाती और बाकी इंतजाम शामिल नहीं हैं। अगर इन सबको जोड़ दिया जाए तो कुल खर्च और भी ज्यादा हो सकता है।
यह तुलना साफ दिखाती है कि जहां अंतरिक्ष मिशन सालों की मेहनत और योजना से तैयार होते हैं, वहीं जंग में उतना ही पैसा कुछ ही दिनों में खर्च हो जाता है।
क्या जंग के सामने स्वास्थ्य और पर्यावरण का बजट पड़ रहा है छोटा?
अमेरिका में खर्च का संतुलन अब बड़ा सवाल बनता जा रहा है, क्योंकि मामला सिर्फ अंतरिक्ष तक सीमित नहीं रहा। सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े बड़े संस्थानों का सालाना बजट भी जंग के शुरुआती खर्च से पीछे छूटता दिख रहा है।
वहां की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी को सालभर में करीब 8.8 अरब डॉलर मिलते हैं, जबकि रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र को लगभग 9.2 अरब डॉलर का बजट दिया जाता है। कैंसर पर रिसर्च करने वाला राष्ट्रीय कैंसर संस्थान भी करीब 7.4 अरब डॉलर में काम चलाता है।
हालांकि, जंग के पहले ही हफ्ते में करीब 11.3 अरब डॉलर खर्च (US Iran War Budget) होने से साफ हो गया है कि कुछ ही दिनों में इन जरूरी संस्थानों के पूरे साल के बजट से ज्यादा पैसा युद्ध में खर्च हो सकता है। यही वजह है कि अब यह बहस तेज हो रही है कि क्या अमेरिका लंबी अवधि में लोगों की सेहत, बीमारी से बचाव और पर्यावरण सुरक्षा से ज्यादा प्राथमिकता जंग को दे रहा है।
रिसर्च पर ब्रेक, जंग पर फुल खर्च!
गौर करने वाली बात यह है कि अब असर साफ तौर पर वैज्ञानिक अनुसंधान और नए आविष्कारों पर भी दिखने लगा है। अमेरिका का नेशनल साइंस फाउंडेशन, जो रिसर्च और इनोवेशन की रीढ़ माना जाता है, उसका सालाना बजट भी जंग के शुरुआती खर्च से छोटा पड़ गया है। इसी बीच सरकार ने खर्च घटाने के नाम पर हजारों अनुसंधान परियोजनाओं की फंडिंग कम कर दी है, जिनमें स्वच्छ ऊर्जा और चिकित्सा विज्ञान से जुड़े काम भी शामिल हैं।
दूसरी तरफ रक्षा बजट लगातार बढ़ रहा है और अमेरिकी रक्षा विभाग पहले से ही 900 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च कर रहा है। अब पेंटागन ने ईरान युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर से ज्यादा अतिरिक्त फंड मांगा है, जो मंजूर हुआ तो कई सरकारी एजेंसियों के पूरे बजट के बराबर या उससे भी ज्यादा हो सकता है।
कुछ नेताओं का कहना है कि इतनी अतिरिक्त राशि की जरूरत नहीं है, क्योंकि सेना के पास पहले से ही पर्याप्त संसाधन हैं। वहीं दूसरी ओर देश के अंदर कई सरकारी विभागों में कटौती, छंटनी और रिसर्च ग्रांट रद्द होने की खबरें इस बढ़ती असंतुलन की कहानी खुद बयां कर रही हैं।
क्या कहते हैं ये आंकड़े?
इन आंकड़ों को देखें तो साफ समझ आता है कि अमेरिका अब किस दिशा में ज्यादा ध्यान दे रहा है। एक तरफ लंबे समय के लिए विज्ञान अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यावरण जैसे जरूरी क्षेत्रों को सीमित धन मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध जैसे तात्कालिक कामों पर बहुत तेजी से पैसा खर्च किया जा रहा है।
हालांकि, यह बहस अभी भी चल रही है कि यह संतुलन सही है या नहीं, लेकिन इतना जरूर दिख रहा है कि जंग पर होने वाला खर्च और बाकी क्षेत्रों के बजट के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है, जो आने वाले समय में बड़े असर डाल सकता है।
