Amazon में करोड़ों की नौकरी, फिर भी भारतीय इंजीनियर को क्यों हो रही पैसों की टेंशन?

Amazon Employee Salary and Expenses in US
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अमेरिका में लाखों की नौकरी और शानदार लाइफस्टाइल देखने में जितनी आसान लगती है, असल में उतनी नहीं होती। Amazon में काम करने वाले भारतीय मूल के एक कर्मचारी ने अपनी सैलरी और खर्चों का खुलासा कर बताया कि करोड़ों कमाने के बाद भी वह खुद को आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस नहीं करते।

Amazon कर्मचारी ने बताई अपनी करोड़ों की कमाई

अमेरिका के सिएटल में रहने वाले भारतीय मूल के टेक प्रोफेशनल ईशान जैन Amazon में सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर के पद पर काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कुल सालाना कमाई करीब 2.85 लाख डॉलर (Amazon Employee Salary) यानी लगभग ₹2.8 करोड़ है। इसके अलावा कंपनी की तरफ से हेल्थ इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।

इतनी बड़ी सैलरी के बावजूद उन्होंने कहा कि,

उन्हें आर्थिक सुरक्षा का एहसास नहीं होता। टैक्स और 401(k) योगदान के बाद उनके हाथ में हर महीने लगभग 12 हजार डॉलर बचते हैं, जो भारतीय रुपये में करीब ₹11 लाख के बराबर है।

गौरतलब है कि अमेरिका जैसे शहरों में रहने का खर्च काफी ज्यादा होता है। ईशान का कहना है कि बढ़ती हेल्थकेयर, बच्चों की देखभाल और रोजमर्रा की महंगाई ने परिवार का बजट काफी तंग कर दिया है।

सिएटल में घर और परिवार का खर्च बना बड़ी चुनौती

ईशान जैन अपनी पत्नी और बच्चे के साथ सिएटल के एक उपनगर में चार बेडरूम वाले घर में रहते हैं। उनका दूसरा बच्चा भी नवंबर में आने वाला है। उन्होंने बताया कि,

पूरा परिवार एक ही आय पर निर्भर है, इसलिए खर्चों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। साल 2023 में घर खरीदा था और हर महीने करीब 5 हजार डॉलर केवल मॉर्गेज, टैक्स और इंश्योरेंस में खर्च हो जाते हैं। भारतीय रुपये में यह राशि लगभग ₹4.7 लाख बैठती है।

इसके अलावा घर के बिजली-पानी और अन्य यूटिलिटी बिल लगभग 800 डॉलर महीने तक पहुंच जाते हैं। परिवार के हेल्थ इंश्योरेंस पर करीब 750 डॉलर हर महीने खर्च होते हैं। ईशान के पास Tesla कार भी है, जिसकी मासिक किस्त 630 डॉलर है। वहीं उनकी Range Rover पूरी तरह से चुकाई जा चुकी है, लेकिन दोनों गाड़ियों के ईंधन और इंश्योरेंस पर भी अच्छा-खासा पैसा खर्च होता है।

परिवार हर महीने Costco से लगभग 1500 डॉलर की खरीदारी करता है। इसके अलावा दूसरी जगहों से भी 400 से 500 डॉलर तक का किराना आता है। चाइल्डकेयर और नैनी का खर्च भी काफी ज्यादा है, जो जरूरत के हिसाब से 100 से 250 डॉलर प्रतिदिन तक पहुंच जाता है।

करोड़ों कमाने के बाद भी क्यों नहीं है इमरजेंसी फंड?

ईशान जैन का कहना है कि वह जल्दी रिटायरमेंट की तैयारी कर रहे हैं। उनका लक्ष्य 50 साल की उम्र तक आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना है। इसी वजह से वह हर साल करीब 50 हजार डॉलर की बचत और निवेश करते हैं। उन्होंने बताया कि,

उनके पास भारत में 3 से 4 प्रॉपर्टी भी हैं, जिनसे भविष्य में रेंटल इनकम मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा वह स्टॉक्स, गोल्ड और सिल्वर जैसी फिजिकल एसेट्स में भी निवेश कर रहे हैं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि उनके पास कोई इमरजेंसी फंड नहीं है। ईशान का मानना है कि वह कैश रिजर्व रखने की बजाय अपनी बचत को लगातार निवेश में लगाते हैं। किसी आपात स्थिति में वह क्रेडिट कार्ड या दोस्तों और परिवार की मदद पर भरोसा करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि,

पिछले साल यात्रा और अन्य खर्चों की वजह से उन पर करीब 20 हजार डॉलर का पर्सनल कर्ज भी है। अब वह अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए अलग एजुकेशन फंड शुरू करने की योजना बना रहे हैं, जिसमें हर महीने कम से कम 500 डॉलर जमा करना चाहते हैं।

हालांकि उनकी कमाई आम लोगों के मुकाबले बेहद ज्यादा है, लेकिन अमेरिका में बढ़ती महंगाई और परिवार की जिम्मेदारियों ने यह दिखा दिया है कि बड़ी सैलरी हमेशा आर्थिक सुकून की गारंटी नहीं होती।

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Veer Rai

Founder & Editor, जय जगदम्बा न्यूज

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